आदि कैलाश के दर्शन कर लौट रहे इंदौर के तिलक शर्मा की मौत, भगवान महाकाल के लिए बनाते थे चांदी के मुकुट

आदि कैलाश के दर्शन कर लौट रहे इंदौर के तिलक शर्मा की मौत, भगवान महाकाल के लिए बनाते थे चांदी के मुकुट

प्रेषित समय :19:17:23 PM / Fri, Oct 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर. उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा के दौरान इंदौर के युवा सराफा कारोबारी तिलक शर्मा की मौत हो गई. 27 वर्षीय तिलक सात दोस्तों के साथ कार से धार्मिक यात्रा पर गए थे. बताया गया है कि दर्शन के बाद लौटते समय अचानक उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी. दोस्तों ने उन्हें ऑक्सीजन देने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. बाद में उन्हें आर्मी बेस कैंप ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया.

तिलक इंदौर के सराफा बाजार में कारोबार करते थे. उनकी एक खास पहचान यह भी थी कि वे उज्जैन के महाकाल मंदिर के लिए चांदी के मुकुट और भगवान के शृंगार की सामग्री तैयार करते थे. उनके निधन की खबर से परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है.

दर्शन से लौटते समय बिगड़ी तबीयत

तिलक के दोस्त प्रतीक के मुताबिक, सात दोस्तों का समूह धार्मिक यात्रा पर निकला था. आदि कैलाश पहुंचने से पहले सभी ने नीम करौली बाबा, जागेश्वर और मुक्तेश्वर के दर्शन किए. इसके बाद नैनीताल घूमने के बाद वे कैलाश मानसरोवर क्षेत्र पहुंचे.

दर्शन के बाद वापसी के दौरान तिलक को अचानक सांस लेने में दिक्कत होने लगी. दोस्तों ने अपने पास मौजूद ऑक्सीजन किट से उन्हें ऑक्सीजन दी, लेकिन उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही.

इसके बाद उन्हें तत्काल आर्मी बेस कैंप ले जाया गया. वहां प्राथमिक उपचार के बाद दूसरे बेस कैंप के अस्पताल में भर्ती कराया गया. दोस्त के अनुसार, अस्पताल पहुंचने के करीब 10 से 15 मिनट बाद उनकी मौत हो गई.

अधिक ऊंचाई पर सांस लेने में हुई परेशानी

आदि कैलाश क्षेत्र समुद्र तल से करीब 5,945 मीटर की ऊंचाई तक स्थित है. इतनी अधिक ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन का दबाव कम होने के कारण सांस लेने में परेशानी और ऊंचाई से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि, तिलक की मौत का सटीक चिकित्सकीय कारण पोस्टमार्टम और संबंधित मेडिकल रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा.

घटना की सूचना आईटीबीपी की ओर से धारचूला पुलिस को दी गई. पुलिस ने शव को राजकीय चिकित्सालय में रखवाया, जहां पंचनामा और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई.

महाकाल के लिए बनाते थे चांदी के मुकुट

तिलक शर्मा इंदौर के सराफा बाजार में अपनी दुकान चलाते थे. वे उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर के लिए चांदी के मुकुट और शृंगार की कई वस्तुएं तैयार करते थे. इनमें चांदी के नेत्र, कानों के आभूषण, टीका और छत्र जैसी सामग्री शामिल थी.

उनके बनाए मुकुट और अन्य शृंगार सामग्री भगवान महाकाल के शृंगार में इस्तेमाल होती थी. सोशल मीडिया पर भी उनके काम से जुड़े कई वीडियो मौजूद हैं.

परिवार के इकलौते बेटे थे तिलक

तिलक अपने परिवार के इकलौते बेटे थे. उनके पिता भी उनके साथ कारोबार में सहयोग करते थे. परिवार में अगले साल होली के बाद उनकी शादी की तैयारियां होनी थीं, लेकिन इस दुखद घटना ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया.

दोस्त प्रतीक के अनुसार, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव को एंबुलेंस से पिथौरागढ़ ले जाने और फिर दिल्ली के रास्ते इंदौर पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही थी. परिजन भी इंदौर से उत्तराखंड के लिए रवाना हो गए थे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-