1 नवंबर 2026, रविवार: हिंदू पंचांग के अनुसार रविवार को कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि रहेगी. दोपहर के बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ होगी. इस दिन अहोई अष्टमी का व्रत भी रखा जाएगा. रविवार होने के कारण सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्व रहेगा. आज पुष्य नक्षत्र रहेगा, जबकि साध्य योग दोपहर तक प्रभावी रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई अष्टमी पर माताएं संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं. वहीं रविवार को सूर्यदेव को अर्घ्य देने और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने की परंपरा भी है. आइए जानते हैं नई दिल्ली के स्थानीय समय के अनुसार आज का पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, व्रत और पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी.
आज का पंचांग 1 नवंबर 2026
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दिन: रविवार
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विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थी)
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शक संवत: 1948
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मास: कार्तिक (पूर्णिमांत), आश्विन (अमांत)
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पक्ष: कृष्ण पक्ष
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तिथि: सप्तमी दोपहर लगभग 2:52 बजे तक, इसके बाद अष्टमी
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नक्षत्र: पुष्य अगले दिन 2 नवंबर को सुबह लगभग 4:30 बजे तक, इसके बाद अश्लेषा
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योग: साध्य योग दोपहर लगभग 2:39 बजे तक, इसके बाद शुभ योग
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करण: बव दोपहर लगभग 2:52 बजे तक, इसके बाद बालव
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सूर्योदय: सुबह लगभग 6:33 बजे
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सूर्यास्त: शाम लगभग 5:36 बजे
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चंद्रोदय: रात लगभग 11:40 बजे
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चंद्रास्त: दोपहर लगभग 12:42 बजे
ये सभी समय नई दिल्ली के स्थानीय पंचांग के अनुसार हैं.
Drikpanchang+2
रविवार को सूर्यदेव की पूजा का महत्व
रविवार का दिन भगवान सूर्य की उपासना के लिए विशेष माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि सूर्यदेव आरोग्य, ऊर्जा, आत्मविश्वास और मान-सम्मान के कारक हैं. इस दिन सुबह सूर्योदय के समय स्नान करके तांबे के पात्र से सूर्यदेव को जल अर्पित करने की परंपरा है.
जल में लाल पुष्प और अक्षत डालकर अर्घ्य दिया जा सकता है. इसके बाद सूर्य मंत्र 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जाप करना शुभ माना जाता है. श्रद्धालु आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं. रविवार को जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और अन्य उपयोगी सामग्री दान करने की भी धार्मिक परंपरा है.
अहोई अष्टमी व्रत का महत्व
1 नवंबर को अहोई अष्टमी का व्रत भी रखा जाएगा. यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना से किया जाता है. परंपरा के अनुसार माताएं दिनभर व्रत रखती हैं और शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं. पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है.
इस दिन अष्टमी तिथि दोपहर लगभग 2:52 बजे शुरू हो रही है. अहोई अष्टमी की पूजा और तारों को अर्घ्य देने के लिए स्थानीय परंपरा के अनुसार समय का ध्यान रखना चाहिए.
Tithi, Rahu Kaal, Muhurat+1
आज के शुभ मुहूर्त
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह लगभग 4:50 से 5:41 बजे तक
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अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
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विजय मुहूर्त: दोपहर लगभग 1:55 से 2:39 बजे तक
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गोधूलि मुहूर्त: शाम लगभग 5:36 से 6:02 बजे तक
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प्रदोष काल: शाम लगभग 5:36 से रात 8:12 बजे तक
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अमृत काल: रात लगभग 10:25 से 11:56 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन मुहूर्तों में पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान और आध्यात्मिक कार्य करना शुभ माना जाता है. ध्यान दें कि अभिजीत मुहूर्त का अंतिम हिस्सा यमगंड काल से मेल खाता है, इसलिए किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा.
Tithi, Rahu Kaal, Muhurat+2
आज का राहुकाल और अशुभ समय
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राहुकाल: शाम 4:13 से 5:36 बजे तक
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यमगंड: दोपहर 12:04 से 1:27 बजे तक
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गुलिक काल: दोपहर 2:50 से शाम 4:13 बजे तक
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दुर्मुहूर्त: शाम लगभग 4:08 से 4:52 बजे तक
परंपरागत ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है. रविवार को राहुकाल शाम के समय रहता है. इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत करने से पहले शुभ मुहूर्त देखना चाहिए.
Drikpanchang+1
आज क्या करें?
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सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें.
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सूर्य मंत्र का जाप करें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें.
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अहोई अष्टमी का व्रत रखने वाली महिलाएं विधि-विधान से अहोई माता की पूजा करें.
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संतान की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करें.
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जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और उपयोगी वस्तुओं का दान करें.
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परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम और सद्भाव बनाए रखें.
आज का आध्यात्मिक संदेश
"सूर्य की तरह अपने कर्मों से जीवन में प्रकाश फैलाएं और परिवार की खुशहाली के लिए प्रेम, धैर्य और समर्पण बनाए रखें."
रविवार का दिन आत्मचिंतन, सकारात्मकता और नई ऊर्जा के साथ जीवन की जिम्मेदारियों को निभाने का संदेश देता है. अहोई अष्टमी का पर्व संतान के प्रति माता के प्रेम, त्याग और मंगलकामना का प्रतीक है. इस दिन पूजा-पाठ के साथ परिवार के स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की कामना करें.
नोट: पंचांग में दिए गए सभी समय नई दिल्ली के स्थानीय समय (IST) के अनुसार हैं. अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति के कारण सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय और मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है. अहोई अष्टमी के व्रत, पूजा और तारों को अर्घ्य देने के समय के लिए स्थानीय पंचांग की पुष्टि अवश्य करें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

