इंदौर. देशभर में साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों की सप्लाई करने वाले एक कथित पैडलर को इंदौर क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है. आरोपी पर साइबर ठगों को अलग-अलग बैंकों के खाते उपलब्ध कराने का आरोप है. पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी के तीन बैंक खातों के खिलाफ देश के नौ राज्यों से साइबर धोखाधड़ी की 35 शिकायतें दर्ज हैं.
तीन बैंकों के खाते ठग गिरोह को किए सप्लाई
क्राइम ब्रांच के एडीसीपी (अपराध) राजेश दंडोतिया के मुताबिक, आरोपी सचिन विश्वकर्मा ने आईडीबीआई बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और स्टेट बैंक ऑफ मॉरीशस में अपने खाते खुलवाए थे. आरोप है कि इन बैंक खातों को उसने साइबर ठगी करने वाले गिरोहों तक पहुंचाया. ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है.
नौ राज्यों से मिलीं 35 साइबर शिकायतें
पुलिस के अनुसार राज्य साइबर मुख्यालय, भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C), केंद्रीय गृह मंत्रालय और साइबर क्राइम पोर्टल से प्राप्त जानकारियों के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों की पड़ताल की गई थी. इसी जांच में सचिन विश्वकर्मा के तीन बैंक खाते सामने आए.
इन खातों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड समेत नौ राज्यों से कुल 35 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी मिली है.
क्या होते हैं म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने के लिए करते हैं. कई मामलों में खाताधारक कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते और लेनदेन की सुविधा दूसरे लोगों को उपलब्ध करा देते हैं. इससे साइबर ठगी की रकम को ट्रैक करना और अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है.
इंदौर क्राइम ब्रांच अब आरोपी के बैंक खातों से जुड़े लेनदेन और साइबर ठगी के नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है. नौ राज्यों में दर्ज शिकायतों का संबंध सामने आने के बाद इस मामले का दायरा और बढ़ गया है.
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