आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना, मोबाइल और लैपटॉप के सामने समय बिताना तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी शरीर को धीरे-धीरे जकड़ने लगती है. इसका असर सबसे पहले कमर, कूल्हों, पैरों और कंधों में महसूस होता है. ऐसे में शरीर को सक्रिय और लचीला बनाए रखने के लिए योग एक प्रभावी अभ्यास हो सकता है. बॉलीवुड अभिनेत्री और फिटनेस प्रेमी शिल्पा शेट्टी भी नियमित रूप से अपने योग और व्यायाम से जुड़े अनुभव साझा करती रहती हैं. इस बार उन्होंने सोमवार की फिटनेस प्रेरणा के रूप में अकार्ण धनुरासन (Akarna Dhanurasana) के एक अलग रूप का प्रदर्शन किया है. इसे आर्चर पोज यानी धनुष खींचने वाले योगासन के नाम से भी जाना जाता है. इस अभ्यास में शरीर को बैठी हुई स्थिति में रखते हुए एक पैर को धड़ के पार उठाया जाता है और विपरीत हाथ को ऊपर की ओर फैलाया जाता है. यह देखने में भले ही आसान और आकर्षक लगे, लेकिन इसमें शरीर के कई हिस्सों का संतुलन, लचीलापन और मांसपेशियों की सक्रियता शामिल होती है.
शिल्पा शेट्टी ने दिखाया अकार्ण धनुरासन का अनोखा अंदाज
शिल्पा शेट्टी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में अकार्ण धनुरासन का एक अलग रूप दिखाया. पारंपरिक अकार्ण धनुरासन में साधक धनुष से तीर खींचने जैसी मुद्रा बनाता है. इसमें एक पैर को हाथ से पकड़कर कान की दिशा में लाया जाता है, जबकि दूसरा पैर सामने की ओर रहता है. शिल्पा ने जिस बदलाव के साथ यह आसन किया, उसमें एक पैर को शरीर के पार उठाते हुए विपरीत हाथ को सिर के ऊपर फैलाया गया.
अभिनेत्री ने वीडियो के साथ मजेदार अंदाज में लिखा कि इसे अच्छा स्ट्रेच ऑफ लक कहा जा सकता है. उन्होंने अपने प्रशंसकों को भी इस फिटनेस गतिविधि में शामिल होने और अपनी पसंद का अभ्यास साझा करने के लिए प्रेरित किया.
उनका यह वीडियो केवल एक कठिन योग मुद्रा का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह याद दिलाता है कि नियमित शारीरिक गतिविधि में नए और संतुलित अभ्यास शामिल करना भी जरूरी है. हालांकि किसी भी योगासन को केवल देखकर करने के बजाय उसकी सही तकनीक समझना महत्वपूर्ण है.
क्या है अकार्ण धनुरासन और क्यों पड़ा इसका नाम आर्चर पोज
अकार्ण धनुरासन का नाम संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है. 'अकार्ण' का अर्थ कान के पास और 'धनुरासन' का संबंध धनुष जैसी मुद्रा से है. पारंपरिक रूप में इस आसन में साधक एक पैर को हाथ से पकड़कर कान की ओर खींचता है. इससे शरीर की स्थिति धनुष पर प्रत्यंचा खींचने वाले तीरंदाज जैसी दिखाई देती है.
इस योगासन में पैरों, कूल्हों, पीठ और कंधों की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं. इसे करते समय शरीर का संतुलन बनाए रखना पड़ता है. यही वजह है कि इसमें केवल लचीलापन ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों का नियंत्रण और एकाग्रता भी महत्वपूर्ण होती है.
शिल्पा द्वारा दिखाया गया रूप पारंपरिक मुद्रा से अलग है. इसलिए इसे अकार्ण धनुरासन का एक वैरिएशन समझना चाहिए. योगाभ्यास करने वालों को यह ध्यान रखना चाहिए कि अलग-अलग वैरिएशन के प्रभाव और कठिनाई का स्तर भी अलग हो सकता है.
हैमस्ट्रिंग और कूल्हों की जकड़न कम करने में मददगार
इस स्ट्रेच का एक प्रमुख लाभ शरीर के निचले हिस्से में लचीलापन बढ़ाने से जुड़ा है. इसमें हैमस्ट्रिंग यानी जांघों के पीछे की मांसपेशियों, कूल्हों और ग्रोइन क्षेत्र में खिंचाव महसूस होता है. लंबे समय तक बैठने या कम शारीरिक गतिविधि के कारण इन हिस्सों में अकड़न महसूस हो सकती है.
नियमित और नियंत्रित स्ट्रेचिंग से मांसपेशियों की गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. इससे रोजमर्रा के कामों में झुकने, उठने और चलने जैसी गतिविधियों में सहजता महसूस हो सकती है. हालांकि किसी एक योगासन से दर्द या जकड़न पूरी तरह समाप्त होने की गारंटी नहीं दी जा सकती.
कंधों और पीठ की मांसपेशियों को भी करता है सक्रिय
इस योग मुद्रा में हाथ को ऊपर की ओर फैलाने और शरीर को संतुलित रखने की प्रक्रिया कंधों तथा ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करती है. शिल्पा के मुताबिक, इस अभ्यास में उन मांसपेशियों को भी काम करना पड़ता है, जो खींचने वाली गतिविधियों में उपयोग होती हैं.
कंधों और ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय रखना शरीर की स्थिरता और ऊपरी हिस्से की ताकत के लिए उपयोगी हो सकता है. विशेष रूप से ऐसे लोग, जो लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करते हैं, उन्हें कंधों और पीठ में अकड़न महसूस हो सकती है. उनके लिए नियमित हल्की स्ट्रेचिंग और सही मुद्रा में बैठना फायदेमंद हो सकता है.
इस आसन में रीढ़ की हड्डी के आसपास के हिस्से में भी खिंचाव और गतिशीलता का अनुभव हो सकता है. लेकिन इसे करते समय कमर पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना चाहिए.
आईटी बैंड और ग्रोइन क्षेत्र में भी मिलता है स्ट्रेच
शिल्पा ने इस मुद्रा के जिन लाभों का उल्लेख किया है, उनमें आईटी बैंड का स्ट्रेच भी शामिल है. आईटी बैंड जांघ के बाहरी हिस्से में मौजूद संयोजी ऊतक की एक मजबूत पट्टी होती है, जो कूल्हे से घुटने के बाहरी हिस्से तक जाती है. पैरों और कूल्हों की कुछ गतिविधियों में इसकी भूमिका होती है.
इसके अलावा ग्रोइन यानी जांघों के ऊपरी भीतरी हिस्से में भी खिंचाव महसूस हो सकता है. इस क्षेत्र में लचीलापन बनाए रखना पैरों की सहज गतिविधियों के लिए उपयोगी है. हालांकि किसी भी हिस्से में तेज दर्द, खिंचाव या असहजता महसूस होने पर अभ्यास रोक देना चाहिए.
योगासन करते समय इन सावधानियों का रखें ध्यान
अकार्ण धनुरासन का यह वैरिएशन हर व्यक्ति के लिए समान रूप से आसान नहीं है. इसे करने से पहले शरीर को हल्के वार्मअप और सामान्य स्ट्रेचिंग के जरिए तैयार करना चाहिए. शुरुआत में कठिन मुद्रा बनाने की कोशिश करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे अभ्यास करना बेहतर है.
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शरीर को जबरदस्ती न खींचें: पैर या हाथ को उतना ही फैलाएं, जितना बिना दर्द के संभव हो.
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धीरे-धीरे अभ्यास करें: अचानक पैर उठाने या शरीर को मोड़ने से बचें.
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संतुलन बनाए रखें: योग मैट पर स्थिर बैठकर ही अभ्यास शुरू करें.
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सांस सामान्य रखें: मुद्रा बनाते समय सांस रोकने के बजाय सहज रूप से सांस लेते रहें.
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दर्द होने पर रुक जाएं: तेज दर्द, चक्कर या असहजता महसूस होने पर तुरंत अभ्यास बंद करें.
जिन लोगों को कमर, कूल्हे, घुटने या कंधे में चोट अथवा गंभीर परेशानी है, उन्हें यह मुद्रा करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग प्रशिक्षक से सलाह लेनी चाहिए. गर्भावस्था या किसी अन्य स्वास्थ्य स्थिति में भी विशेषज्ञ की सलाह के बिना कठिन स्ट्रेचिंग नहीं करनी चाहिए.
रोजमर्रा की दिनचर्या में कैसे शामिल करें यह अभ्यास
योग का लाभ तभी बेहतर तरीके से मिल सकता है, जब इसे नियमित और सही तरीके से किया जाए. शुरुआत में कुछ मिनट हल्की स्ट्रेचिंग, गर्दन और कंधों की सहज गतिविधियां तथा पैरों को धीरे-धीरे फैलाने वाले अभ्यास किए जा सकते हैं. इसके बाद प्रशिक्षक की देखरेख में अकार्ण धनुरासन के आसान रूप को आजमाया जा सकता है.
लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों को हर कुछ समय बाद अपनी जगह से उठकर थोड़ा चलना चाहिए. इसके साथ पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है. केवल एक कठिन योगासन को दिनचर्या में शामिल कर लेने से फिटनेस के सभी लक्ष्य पूरे नहीं होते.
लचीलेपन के साथ संतुलन और सक्रियता पर भी जोर
शिल्पा शेट्टी का यह योग अभ्यास बताता है कि फिटनेस का अर्थ केवल मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना या कठिन व्यायाम करना नहीं है. शरीर का लचीलापन, संतुलन और मांसपेशियों का सही तालमेल भी उतना ही महत्वपूर्ण है. अकार्ण धनुरासन का यह वैरिएशन हैमस्ट्रिंग, कूल्हों, ग्रोइन, कंधों, आईटी बैंड और रीढ़ के आसपास के हिस्सों को स्ट्रेच करने के साथ ऊपरी पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद कर सकता है.
हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता अलग होती है. इसलिए योग को प्रतिस्पर्धा या दिखावे के बजाय अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार करना चाहिए. नियमित अभ्यास, सही तकनीक और शरीर के संकेतों का ध्यान रखना ही बेहतर फिटनेस की दिशा में सबसे जरूरी कदम है.
स्वास्थ्य संबंधी नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है. किसी बीमारी, चोट या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में योग शुरू करने से पहले योग्य चिकित्सक या प्रशिक्षक की सलाह लें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

