बीते कुछ दिनों से भारत और चीन के बीच का सीमा विवाद काफी चर्चा में है, मामला काफी गंभीर है अतः चर्चा होना लाजमी हैं पर हम इस बात को बिल्कुल नज़रअंदाज़ नही कर सकते कि भारत पाकिस्तान विवाद भी उतना ही चिंता का विषय है जितना भारत चीन विवाद. जब भी भारत पाक विवाद की बात होती है तो सामान्यतः दोनों देश एक दूसरे पर इल्ज़ाम ही लगाते नज़र आते है पर कोई भी पक्ष इसके समाधान की बात नही करता पर आज हम समझने की कोशिश करेंगे कि इसका समाधान कैसे संभव है? तथा इस समाधान के लागू होने के उपरांत उत्पन्न होने वाले विवाद और उसके हल के बारे में भी समझने की कोशिश करेंगे. इस मुद्दे पर विचार-विमर्श प्रारंभ करने से पहले आप सब को ये समझना होगा कि ये विचार-विमर्श का मकसद किसी भी पक्ष की भावनाओं को ठेश पहुचाने का कतई नही है. संविधान ने हर किसी को अपना पक्ष रखने और अभिव्यक्ति की आज़ादी दी है अतः ये विचार-विमर्श भी उसी सोच पर आधारित है.

जैसा कि हम जानते है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था विश्व की 42वी अर्थव्यवस्था है जो बांग्लादेश (39वी) से भी पीछे है और अगर भारत से इसकी तुलना की जाए तो इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि पाकिस्तान की कुल GDP के लगभग बराबर है भारत का 20 लाख करोड़ का राहत पैकेज तथा कोरोना महामारी के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से धराशाही हो चुकी है और अगर पाकिस्तान सरकार की बात करे तो इमरान खान की सरकार इसे संभालने में किसी भी तरह से कामयाब नज़र नही आ रही है. अतः भारत को पाकिस्तान के विरुद्ध हमेशा आक्रमक्ता वाली नीति पे काम करना होगा तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर पे आक्रामक तरीके से अपनी सैन्य गतिविधियों को दिन पर दिन बढ़ाना होगा जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान भी अपनी सैन्य गतिविधियों को बढ़ाने की कोशिश करेगा और मजबूरन उसे अपना रक्षा बजट बढ़ाना पड़ेगा अतः इसका सीधा असर निःसंदेह पाकिस्तान की पहले से ही डगमगाती अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा जिससे पाकिस्तान में नौकरियों की कमी आएगी, विकास के लिए पैसे की कमी आएगी तथा पाकिस्तान गरीबी और भुखमरी की ओर अग्रसर करेगा जिसका सबसे घातक परिणाम ये होगा कि पाकिस्तान की जनता अपने सरकार और सेना के खिलाफ विद्रोह करने पर मजबूर हो जाएगी अतः पाकिस्तान खुद पे खुद ही बर्बाद हो जाएगा. "न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी".
इस परिस्थिति से उत्पन्न होने वाले विवाद की बात करे तो पाकिस्तान में युवाओं के पास काम न होने के कारण वो गलत रास्ता अपना सकते हैं जिसके परिणामस्वरूप आतंकवादी गतिविधियों में और ज्यादा तेजी आ सकती है और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत के नियंत्रण में लेने के बाद भारत सरकार को इसके संरक्षण के लिए अतिरिक्त सेना और हथियारों की जरूरत पड़ेगी जिसमे काफी ज्यादा पैसा लगेगा अतः इसमे कोई संदेह नही होना चाहिए कि नुकसान भारत की अर्थव्यवस्था को भी होगा. 
इसका समाधान ये है कि भारत सरकार को इस नुकसान की पूर्ति के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाना पड़ेगा जिसके लिए चीन छोड़ के जा रही कंपनियों को भारत मे निवेश करने के लिए उन्हें आकर्षित करना होगा अतः संक्षेप में कहा जाए तो कोरोना महामारी को एक अवसर  में बदलना होगा और भारत को एक समृद्ध और आत्मनिर्भर देश बनाना होगा.

अब ये समझने की कोशिश करते हैं कि दूसरे समाधान के रूप में हमारे पास क्या विकल्प है?
 जैसा कि हम जानते हैं जम्मू कश्मीर को भारत का स्वर्ग कहा जाता है, चाहे लद्दाख की बात करे या गिलगिट बाल्टिस्तान इसकी खूबसूरती के सामने दुनिया के सुंदर से सुंदर पर्यटन स्थल घुटने टेक देते है अतः इनकी सुंदरता का पूरी दुनिया मे कोई सानी नही है. अगर पर्यटन की बात करे तो जितनी कमाई कश्मीर से हो सकती है उतनी शायद ही किसी और पर्यटन स्थल से!  पर हमारा दुर्भाग्य ये है कि ये इलाका पूरी दुनिया का सबसे ज्यादा सैन्य प्रभावित क्षेत्र है जिसके परिणामस्वरूप यहा न तो कोई पर्यटक भारत से आना चाहता है और न ही कोई पाकिस्तान से, विदेशी पर्यटक का यहा आना तो बस ख़्वाब में ही संभव है.
अगर भारत पाकिस्तान दोनों की सरकारें मिल कर ये समझौता करे कि कश्मीर को एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए और पूरे विश्व भर में इसका प्रचार प्रसार किया जाए तो दोनों के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि इससे जो भी पैसा आएगा उसे दोनों देश कश्मीर के विकास के साथ साथ अपने अपने देश की अर्थव्यवस्था को विकशित करने में भी लगा सकते हैं. अतः लड़ने के बजाए इससे फायदा उठा सकते हैं. 
कश्मीर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर समेत, के सभी हिस्से में  दोनों देशों के लोगो का प्रवेश मंजूर किया जाए, वहा जाने में न भारतीयों का पासपोर्ट लगे न पाकिस्तानियों का , पर हां इस बात का जरूर ख़याल रखा जाए कि किसी भी देश (भारत-पाक) का नागरिक कश्मीर छोड़ के अगर किसी भी दूसरे देश के हिस्से में जाना चाहता है तो उसे उचित अनुमोदन लेना अनिवार्य हो. 

चलिए अब समझने की कोशिश करते है कि इस पहल से क्या क्या फायदे होंगे?
इसका सबसे बड़ा फायदा कश्मीर के आवाम को रोजगार के रूप में मिलेगा जिससे वो गलत रास्ते पर नही जाएंगे जो अक्सर देखा जाता है कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों के रूप में.

हर दिन सीमा पर कितने सैनिक शहीद होते है जिसकी संख्या पूर्ण रूप से समाप्त हो जाएगी, ऐसा कर के सरकार हमारे सैनिक भाइयों के परिवारों को उन्हें(सैनिक भाइयों) हमेशा के लिए सुरक्षित रखने का तोहफा दे सकती है.

दोनों देश कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा दे के अरबो खरबों रुपये कमा सकते है जिसका इस्तेमाल कश्मीर के साथ साथ अपनी अपनी अर्थव्यवस्था के उत्थान के लिए लगा सकते हैं.

दोनों देश मिल कर कई छेत्र, जैसे विज्ञान, चिकित्सा, अंतरिक्ष, शिक्षा तथा और भी कई क्षेत्तों में एक दूसरे का सहयोग कर सकते हैं.

इस बात की गंभीरता को भी समझने की जरूरत है कि ये जितना विचार-विमर्श करने में आसान लगता है उससे कई ज्यादा जटिल इसे लागू करना है. 

अब ये समझने की कोशिश करते है कि ये कैसे संभव होगा?
इसे संभव बनाने के लिए सबसे पहले घाटी से आतंकवाद का सफाया करना होगा तथा दोनों देशों की सरकार को एक संधि पे हस्ताक्षर करने होंगे जिसके तहत दोनों देशों की सेना को आतंकवादियों के खिलाफ एक संयुक्त कार्यवाही करनी होगी और चाहे जितना भी समय लगे घाटी से इनका सफाया करना होगा क्योंकि आतंकवाद के रहते कोई भी छेत्र प्रगति नही कर सकता.

अब समझने की कोशिश करते है कि इससे क्या क्या विवाद खड़ा हो सकता है?
सबसे पहला विवाद तो ये हो सकता है कि पाकिस्तान आतंकवादियों का सफाया करने के मुद्दे पर मुकर सकता है क्योंकि पाकिस्तान ही उन्हें संरक्षण देता है और भारत के खिलाफ उनका इस्तेमाल करता है और दूसरी बात ये भी है कि पाकिस्तान का इस बात पे भारत पर भरोसा करना कि आतंकवाद का सफाया होने के बाद भारत पूरा कश्मीर कब्जाने की कोशिश नही करेगा और सहमति बनी हुई संधि पर काम करेगा, ये थोड़ा मुश्किल है पर इसपे दोनों पक्षो को एक दूसरे पे भरोसा दिखाना ही होगा अतः इसमे ही दोनों देशों की भलाई है.

दूसरा विवाद जमीन खरीदने को लेके हो सकता है तो इसका निवारण ये है कि दोनों देशों के लोगो को कश्मीर में जमीन खरीदने की आज़ादी दे दी जाए जिससे दोनों देशों में आपसी सौहार्द बढ़ेगा.

तीसरा विवाद दोनों देशों की विपक्षी पार्टियां राजनैतिक फायदे के लिए इस पहल का विरोध कर के उत्पन्न कर सकते हैं और सरकार पे दूसरे देश के सामने घुटने टेक देने का इल्जाम लगा सकते हैं ताकि देशवासियों को गुमराह किया जा सके और आने वाले चुनावों में बढ़त बनाया जा सके, वैसे देखा जाए तो वे भी चाहते है कि कश्मीर का हल निकले पर आज कल खास कर के भारत में राजनैतिक फायदे के लिए लोग देश का अच्छा बुरा भी भूल जाते हैं, इसे लेके थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है और दोनों देशों के आवाम को भी जागरूक रहने की जरूरत है तथा राजनैतिक पार्टियों को ये समझना पड़ेगा कि सबसे पहले देश हित है.

किसी भी क्षेत्र को अपने नियंत्रण में रखना तब तक जायज़ लगता है जब तक उससे कुछ फायदा हो. कश्मीर का हल निकालना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके विवाद से दोनों पक्षों को आज तक नुकशान ही झेलना पड़ा है. कश्मीर को नियंत्रण में लेने के लिए हथियारों पर अरबों गवाने से अच्छा है दोनों पक्ष मिल कर इसे पर्यटक स्थल बना कर अरबों कमाए ताकि दोनों देशों के साथ साथ कश्मीर के लोगो का भी भला हो.
 


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