66 वर्ष कोई उम्र नहीं होती.पर क्या करें अरुण जेटली की यही उम्र थी.वो हैं या नहीं है.इस पर मै भ्रमित हूँ  और शोकाकुल भी .अरुण जी क साथ ऐसा क्यों हुआ? कैसे हो गया.क्या जरुरी था ईश्वर के लिए.पर पता नहीं क्यों,लगता है कि ईश्वर की नगरी में भी अच्छे और अतिसंवेदनशील इंसानों की कमी हो गयी है?तभी हम देखते हैं अच्छे इंसानों को ईश्वर जल्दी अपने पास बुला लेता है. 
पर कहते हैं समय और प्रकृति पर किसी का नियंत्रण नहीं होता.हो भी नहीं सकता.पर क्या जिंदगी को आजतक किसी ने परिभाषित किया है? न तो किया है और न ही कर सकते हैं.पर हाँ ज़िन्दगी के दरम्यान किये कर्मो से ही उस जिंदगी को परिभाषित किया जा सकता है.जिंदगी और फ़िक्र का एक  अद्भुत रिश्ता होता है.जिसपर हम सबको फक्र होता है और होना भी चाहिए. 
अब हम सब मीडिया के दोस्तों को संसद के केन्द्रीय कक्ष में एक चिरपरिचित हंसी,ठहाको  के साथ सूचनाओ और जानकारियों का खज़ाना एक साथ नहीं मिल सकेगा.खबरों को साक्षी भाव देने वाले हर दिल अज़ीज़ अरुण जेटली अब नहीं रहे.वो अपनी अनंत चिरंतन यात्रा पर चल पड़े है.भाजपा को एक बार फिर जोरदार झटका लगा है.पिछले एक साल में बड़े नेताओं में से अटल जी,बलराम दस टंडन,अनंत कुमार,मनोहर परिक्कर,सुषमा स्वराज और अब अरुण जेटली  जी का जाना भाजपा और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है. 
अरुण जी अपने राष्ट्रवादी कार्यों के लिए सदैव याद किये जायेंगे.जब भी जीएसटी,मुद्रा और जनधन योजना की चर्चा होगी,अरुण जेटली याद किये जायेंगे. अरुण जी देश में राजनीति और क्रिकेट के अद्भुत संगम थे.
अरुण जी के साथ कई यादें है,कई संस्मरण है.क्या भूलू क्या याद करू.परन्तु उनके व्यक्तित्व के कई पहलुओं के बारे में जब भी यादों की गहराईयों में झांकने की कोशिश करता हूँ तो लगता है कि क्या इस दुनिया में ऐसा नेता दोबारा आएगा क्या? एक बड़ा सवाल?
बिहार के बाद,दिल्ली में पत्रकारिता  के 30 वर्षो से ज्यादा के कार्यकाल में मुझे देश के कई महान हस्तियों से रूबरू होने का अवसर मिला है .अरुण जेटली से पहली अविस्मरणीय मुलाकात लाल कृष्ण अडवाणीजी के साथ 1991-1992 में हुयी थी.और उसके बाद हम लोगो पत्रकारिता से जुड़े और अन्य कार्यक्रमों में मिलते रहे.उनकी चिरपरिचित मुस्कुराहटो के साथ.
अरुण जेटली के साथ मेरी कई यादें है,कई संस्मरण है.जो उनके व्यक्तित्व के कई पहलुओं के बारे हम सबको को बताता है.ज्ञान को विस्तार देता है और हम सबको को भविष्य के प्रति उत्प्रेरित करता है और रहेगा. 
अरुण जी काफी शौक़ीन थे.क्वालिटी और बेहतर उत्पादको लेकर तो अनुपम स्वाद को लेकर भी.अरूण जी “मीडियम स्ट्रांग” कॉफ़ी पसंद करते थे.जो पिछले दो-ढाई  वर्षों से वो डॉक्टरों के निर्देशों के अनुसार बाहर का कुछ भी खाना बंद कर दिया था.
दिसम्बर 2015 की बात है.लन्दन से आये लेबर पार्टी के सांसद और अपने बड़े भाई वीरेंद्र शर्मा जी एक कार्यक्रम के दौरान दिल्ली में थे.उनके मिलने के लिए संसद में अरुण जी से मैंने बात की.उस पर बोले कि एक घंटे के बाद नार्थ ब्लोक में रहूँगा.वही मिलते हैं.उस बातचीत में जो सम्वाद रहा.उससे मेरा काफी ज्ञानवर्धन हुआ.दोनो नेताओ ने भारत के बारे में तो बातचीत की ही,परन्तु भारत और ब्रिटेन के परस्पर संबंधो पर भी विस्तारपूर्वक चर्चा हुयी.वीरेंद्र शर्मा जी ने छूटते ही कहा-अरुण जी ज्ञान और अध्ययन इतना व्यापक है,उससे मैं अभिभूत हूँ.मुझे भी अपने नेता अरुण जेटली पर गर्व हुआ.
2015 में अमेरिका का एक संस्मरण है.जिसको OFBJP अमेरिका क ज्यादातर सदस्यों ने देखा और  अरुण जी के उस मनोविनोदी  स्वाभाव का आनंद लिया.उस वक़्त OFBJP अमेरिका के अध्यक्ष चन्द्रकांत पटेल जी थे.अपने गुरु भाई प्रमोद भगत,जो OFBJP,अमेरिका  के एक पदाधिकारी भी है.उनके साथ सबने उस ऐतिहासिक पल को देखा और महसूस किया.OFBJP,USA ने उस यात्रा में अरुण जी के सम्मान में एक कार्यक्रम का आयोजन रखा था.मै भी उस कार्यक्रम में निमंत्रित था.जैसे वो आये तो मेरे पर नज़र पड़ी-आगे बढ़कर हाथ मिलाया और बोले-बरखुरदार,यहाँ भी.मैंने कहा-आप जहाँ होते है,भारत वही होता है.इसलिए आपसे मिलने चला आया.उस कार्यक्रम में वे एक मंत्री के तौर पर नहीं,बल्कि के पार्टी कार्यकर्त्ता की तरह अपनी बातें रखी.वहां के कई कार्यकर्ताओं को वह व्यक्तिगत तौर पर जानते थे.
2014 के अमृतसर चुनाव में उनकी सक्रियता को लेकर भी कई किस्से हैं जो किसी के लिए भी अनुकरणीय हो सकता है.एक भी लोक सभा चुनाव का नहीं जीत पाने की कसक उनके दिल में रही.खूब मेहनत की थी उन्होंने अमृतसर में .पर लोक सभा चुनाव नहीं जीत सके थे.यदि मैं भाजपा के दिग्गज प्रमोद महाजन को याद करूँ तो वो भी पहली बार राज्य सभा द्वारा संसद पहुंचे थे.हालाँकि जाने के पहले वो एक लोक सभा चुनाव जीत गए थे. 
अरुण जी अपने स्वाभाव के अनुसार भाजपा के अलावा हर दलों के नेताओं के साथ भी सामंजस्य बनाकर रखने में उनकी महारत हासिल थी.2019 में लोक सभा चुनाव के पूर्व संसद के केन्द्रीय कक्ष का एक वाकया तो उनके संस्कार शैली और प्रेम को भी परिभाषित करता है.एक सांसद जींस पैन्ट और टीशर्ट में उन्हें दिख गये .शायद दक्षिण भारत के कोई सांसद थे.उनकी खुली टिपण्णी थी-यदि वो सांसद है तो उसे कपडे पहनने की तमीज़ और सलीका तो होना ही चाहिए.इस पर वहां पर मौजूद सभी उनसे सहमत थे.अपने  बड़े भाई वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा और हरीश गुप्ता उनकी सबसे ज्यादा खिचाई किया करते थे और हम सब उनका गाहे-बगाहे समर्थन.जिसको  वह दोस्ताना व्यवहार के तौर पर लिया करते थे.
7 दिसम्बर 2018 में ही लोक सभा चुनाव के पूर्व अरुण जी तत्कालीन केन्द्रीय राज्य मंत्री विजय गोयल के आवास पर एक पार्टी का  आयोजन था.उनके श्रोताओं में विजय गोयल,केन्द्रीय पीयूष गोयल के अलावा हम सब पत्रकार  थे.वह हम लोगो से एक आत्मीय भाव से अनौपचारिक चर्चा किया करते थे .मैंने अपने फोन से उनके कुछ मूड्स को कैद करने की कोशिश करने लेगा. इस पर उन्होंने देखा और मुस्कुराये.फिर बोले मैं समझ सकता हूँ कुमार साहेब.आप सिर्फ फोटो ही ले रहे है.रिकार्डिंग तो नहीं ही होगी.ऐसा था उनका स्नेह और परस्पर विश्वास.
एक निजी संस्मरण का मै यहाँ जरुर जिक्र करना चाहूँगा.मेरी बड़ी बिटिया सुश्री हरीतिमा का शुभ विवाह था. 27 जून 2017 को.करीब एक महीना पहले मै बिटिया विवाह का निमत्रंण देने गया था.निमत्रंण के बाद उनका कहना था–वादा तो नहीं कर रहा पर विवाह में आने की कोशिश जरुर करूँगा.बाद में उनके पुराने सहयोगी  श्री एस पी भाटिया जी ने बताया कि उस दरम्यान वो देश में नहीं रहेंगे और कई मेडिकल टेस्ट भी होने की बात है.पर उन्होंने आपके लिए आशीर्वाद स्वरुप एक पत्र दिया है.वो आशीर्वाद पत्र आज भी हमारे लिए एक  धरोहर है. दोस्त और दुश्मनी की परिभाषा को भी अरुण जी बखूबी निभाना जानते थे.उस मसले पर पार्टी के अन्दर और बाहर की कई खट्टी –मीठी कहानियां है. वैसे सभी दलों में उनकी पूछ थी और सम्मान भी.
1999 में उनके हाथो मुझे पत्रकारिता और लेखन कार्य के लिए सम्मानित किया गया.सम्मान के दौरान उन्होंने जो टिपण्णी की थी,वो आज भी मेरे लिए पूँजी हैं.
सच कहते हैं ,अरुण कभी अस्त नहीं होता,जी हाँ,अरुण सदैव अरुण रहता है और रहेगा.देश क एक बड़े नेता अरुण जेटली अब हमारे नहीं रहे,प्रभु के प्यारे हो गए.पर उनकी कृतियाँ सदैव हम सबको राष्ट्रवादी कार्यों के प्रति उत्प्रेरित करती रहेगी.
अरुण जेटली जी को शत शत नमन ...
 


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