किसी भी राज्य के समग्र विकास के लिए स्थायीत्व पहली शर्त होती है. सरकारों का चुन जाना और थोड़े समय में सत्ता में फेरबदल से विकास न केवल प्रभावित होता है बल्कि आम आदमी में निराशा का भाव भी उत्पन्न होता है. यही कारण है कि इस बार निर्वाचित सरकार को अगली बार निर्वाचित होने में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इस मामले में छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने आम आदमी को भरोसा दिलाया है कि राज्य के समग्र विकास के लिए स्थायी सरकार बनी रहेगी. रमन सरकार के 5000 दिनों का कार्यकाल पूर्ण होने को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए. साल 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य का दर्जा मिला और पहली बार बहुमत के आधार पर कांग्रेस ने अपनी सरकार बनायी. तीन वर्षों में कांग्रेस की सरकार के प्रदर्शन को, उसके विकास कार्यक्रमों को और कांग्रेस से उपजी निराशा ने भाजपा को अवसर दिया. भाजपा ने स्वच्छ छवि वाले केन्द्र में राज्यमंत्री रहे डॉ. रमनसिंह को राज्य की बागडोर सम्हालने की जिम्मेदारी सौंपी. मृदुभाषी, समन्वय के पक्षधर और राज्य के विकास के लिए स्वयं को झोंकने वाले डॉ. रमनसिंह ने छत्तीसगढ़ को विकास के ऐसे रास्ते पर लेकर निकले कि एक आदिवासी राज्य आज देश के विकसित प्रदेशों की गिनती में आ गया है. राज्य की अपनी धरोहर को उन्होंने विश्वमंच पर पहचान दिलायी. शिक्षा, स्वास्थ्य, सडक़, पानी, बिजली और रोजगार के अनेक अवसर के लिए उन्होंने रास्ते खोले. कुछ राज्य की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का श्रीगणेश किया जो कुछ केन्द्र समर्थित लोककल्याणकारी योजनाओं को व्यवहारिक रूप से अमल में लाकर छत्तीसगढ़ के विकास को नया आयाम दिया. 
    साल 2003 के बाद से डॉ. रमनसिंह छत्तीसगढ़ की जनता के दिल में ऐसे बसे कि लगातार तीन बार उनकी सरकार को जनादेश मिला. आज जब वे अपनी सरकार के 5 हजार दिन का जश्र मना रहे हैं तो यह रमन सरकार का जश्र नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य का जश्र है, उस मतदाता का जश्र है जिन्होंने सरकार पर भरोसा किया और सरकार ने उनके भरोसे को बनाये रखा. एकाएक यकीन करना मुश्किल सा हो जाता है कि लगातार कोई इतने लम्बे समय तक बहुमत के साथ रह सकता है? असंभव को संभव करना मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह को आता है. आखिरकार वे डाक्टर जो ठहरे. वे नब्ज पकड़ कर बीमारी जान लेते हैं और दवा करना भी उन्हें आता है. कवर्धा के डॉ. रमनसिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में सरगुजा से लेकर बस्तर तक ऐसी ऐसी दवा का इंतजाम किया है जिसकी कल्पना आम आदमी ने नहीं की थी. मिसाल के तौर पर जिस नमक के लिए सदियों से आदिवासी लूटे जाते रहे हैं, उन्हें महज 25 पैसे में नमक देकर लूट से बचा लिया. एक किलो नमक के बदले महंगी चिंरौजी देने वाले आदिवासियों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलने लगा. नक्सलियों की तथाकथा से आज पूरा देश वाकिफ है लेकिन पीडि़त परिवारों की बच्चों की शिक्षा का ऐसा मुकम्मल इंतजाम रमन सरकार ने किया कि वे देश के नामचीन कॉलेजों में गौरव करने वाले अंकों से परीक्षा पास करने लायक बन गए हैं. कोई इंजीनियर बन रहा है तो कोई डॉक्टर, किसी ने कौशल उन्नयन में कारीगरी सीख कर स्वयं का रोजगार पैदा कर लिया तो महतारी-बहनों को आत्मनिर्भर बनने के इतने अवसर मिले कि लोगों को सोचना पड़ रहा है कि इससे बेहतर और कौन सी सरकार होगी. 
    लाइवलीहुड कॉलेज मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन योजना का एक उपक्रम है। राज्य के सभी 27 जिलों में लाइवलीहुड कॉलेज की स्थापना की गई है और इन कॉलेजों में राज्य के युवाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है। मोटेतौर पर अब तक एक लाख से अधिक युवाओं को विभिन्न कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण उपरांत कुछेक ने राज्य के उद्योगों में नौकरी प्राप्त कर ली है तो अनेक ऐसे हैं जिन्होंने स्वयं का उद्यम स्थापित कर जीवोकोपार्जन कर रहे हैं। लाइवलीहुड कॉलेज में ट्रेनिंग प्राप्त करने वालों में लडक़े और लड़कियां दोनों हैं। लाइवलीहुड कॉलेज का यह कांसेप्ट वास्तव में रोजगार की दिशा खोलने के लिए अनूठा है। 
रमन सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है. आर्थिक रूप से उन्हें संबल बनाने के अनेक प्रयास तो किया ही गया है बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें पक्का बनाया गया है. इसका एक उदाहरण उर्मिला राज्य के एक छोटे से कस्बानुमा नगर देवभोग की एक बहुत ही गरीब मध्यम परिवार की बेटी उर्मिला सोनवाने है. पिता ने अपनी जमीन बेचकर उर्मिला की शादी के लिये प्रबंध किया था. उर्मिला स्वयं राज्य शासन में एक  शासकीय कर्मचारी के तौर पर कार्य करती है. उर्मिला एक पिता की मजबूरी को समझती थी और वह अपने पिता के अरमानों को पूरा करना चाहती थी लेकिन वह अपनी जिंदगी को भी नरक नहीं बनने देना चाहती थी. अपने फैसले के बाद वह कहती है- कुछ खोकर भविष्य बचाया जा सकता है तो यह करना चाहिये. पिता की जमीन बिक गयी, यह सही है लेकिन मेरा भविष्य सुरक्षित हो गया. उर्मिला के इस फैसले से समाज का सन्नाटे में आ जाना कोई अनपेक्षित नहीं था लेकिन बदलाव की शुरूआत जो उर्मिला ने की है, उसकी गूंज देवभोग जैसे छोटे से हिस्से में ही नहीं बल्कि पूरे देश में होने लगी है. 
    मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह अपनी आलोचना से विचलित नहीं होते हैं बल्कि वे अपने आलोचकों से संवाद कर अपनी गलतियों को ठीक करने की कोशिश करते हैं. यही कारण है कि मीडिया का साथ उन्हें हमेशा मिलता रहा है और मीडिया भी उन पर भरोसा बनाये रखा है. रमन सरकार ने एक रुपये किलो चावल देकर क्रांति का बिगुल फूंक दिया. उन्होंने सत्ता सम्हालते ही राज्य की जनता से वायदा किया था कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोएगा. अपने वचन की पूर्ति के लिए उन्होंने कई योजनाओं का श्रीगणेश किया. रोजगार के अभाव में पलायन सबसे बड़ी चुनौती थी सो उन्होंने एक रुपये किलो चावल देने की महत्वाकांक्षी योजना का आरंभ किया। साथ में तेल और नमक जैसी जरूरत की दूसरी चीजों को भी रियायती दर पर देना आरंभ किया। अपनी इस योजना को लेकर वे विरोधियों के निशाने पर भी रहे। डॉ. रमनसिंह की यह योजना थोड़े ही समय में लोकप्रियता की बुलंदी को छूने लगी। काम के अभाव में पलायन करने वाले छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और मजदूर पलायन से तौबा करने लगे। अनाज का वितरण में धांधली न हो, इसकी पुख्ता व्यवस्था उन्होंने की और इसका परिणाम यह निकला कि छत्तीसगढ़ के पीडीएस प्रणाली की सुप्रीम कोर्ट ने सराहना की।  उनके इन प्रयासों का सुफल यह मिला कि हर वर्ष बड़ी संख्या में काम की तलाश में पलायन करने वाले भाई-बहिनों को अब घर से बाहर भटकना बंद हो गया. सस्ते में अनाज, तेल और नमक के साथ साल भर रोजगार की व्यवस्था ने पलायन को ही पलायन करने पर मजबूर कर दिया. ऐसे लोग जो तीज-त्योहार पर अपनों से दूर रहते थे, परदेस में अत्याचार सहते थे लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था, ऐसे में रमन सरकार से मिली मदद ने उनकी घरवापसी करा दी. आज वे अपनों के साथ प्रसन्न हैं.
    रमन सरकार आम आदमी की सरकार बन गई थी। रमन सरकार राज्य की जनता को रोजगार और बेहतर जिंदगी देने के लिए ही प्रयासरत नहीं थी बल्कि उसकी कोशिश थी कि छत्तीसगढ़ की जीवनशैली, परम्परा एवं संस्कृति को न केवल संरक्षित किया जाए बल्कि उसे विस्तार भी दिया जाए। इस कड़ी में रमन सरकार ने राजिम कुंभ को विधान रूप धार्मिक गुरुओं की सहमति से मान्यता दिलाने का प्रयास किया। आज राजिम कुंभ छत्तीसगढ़ का प्रतिष्ठा आयोजन बन चुका है।  इस तरह इन 5 हजार दिनों में हर दिन एक ऐसे फैसले का रहा है जो छत्तीसगढ़ के विकास को नया आयाम देता है. ये दिन और बढ़ेंगे और विकास की नई इबारत लिखता दिखेगा मोर सुघ्घर छत्तीसगढ़.


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