हर आदमी चाहता है कि परिवार और समाज में उसकी एक पहचान बने. मगर कुछ ही लोग होते हैं जो अपने मकसद में कामयाब हो पाते हैं. पहचान न बन पाना एक बहुत बड़ा संकट होता है. यह ऐसा संकट है जो इंसान को अंदर ही अंदर तोड़ देता है. वह हीन भावना का शिकार हो जाता है. यह एक ऐसी समस्‍या है, जो इंसान के आगे बढ़ने में बहुत बड़ी बाधक बन जाती है. पहचान के संकट के अनेक कारण हो सकते हैं. अनेक व्‍याख्‍याएं हो सकती हैं. इन अनेक कारणों में एक कारण होता है कि हम किसी के पदचिन्‍हों पर चलना चाहते हैं. जब भी हम दूसरे के पदचिन्‍हों पर चलेंगे हम अपनी पहचान नहीं बना पाएंगे. जब हम अपनी क्षमताओं से अनभिज्ञ होते हैं, लक्ष्‍य की तलाश और उसे पाने की तैयारी अधूरेमन से करते हैं तब-तब हम दूसरों के मुंहताज बन जाते हैं. मंजिल तक पहुंचने के लिए दूसरों का हाथ थामते हैं और उसके पदचिन्‍हों पर अपना पग बढ़ा देते हैं.

अलग पहचान बनाने के लिए जरूरी है कि आपके सपने दूसरों से अलग होने चाहिए. उन सपनों को पूरा करने के लिए अपनी रणनीति बनाईए. दूसरों की बनाई रणनीति आपके लिए कारगर साबित नहीं होगी. क्‍योंकि आप अपनी रणनीति अपनी क्षमताओं को मद्देनजर रखते हुए बनाएंगे. इसमें सफलता की गुंजाईश बहुत अधिक होगी. रणनीति बनाने में दिल और दिमाग का प्रयोग एक साथ नहीं करना चाहिए. दिल और दिमाग से लिए गए निर्णय अलग-अलग तरह के होते हैं. हमारे आस-पास ऐसे लोग बहुत होते हैं, जो दिल से सोचते हैं, सबके लिए अच्‍छा सोचते हैं, सबका विकास चाहते हैं मगर अपनी बात कह नहीं पाते इसलिए कोई उन पर या उनके किए कार्यों पर ध्‍यान ही नहीं देता है. कोई बात नहीं. दिल से लिए हुए निर्णय गलत हो सकते है, लेकिन उनका कभी अफ़सोस नहीं होता है ! अगर हम कोई भी निर्णय अपने दिल से लेते है,तो अपना खुद को निर्णय होता है, वो किसी को थोपा नहीं होता है ! हम उस पे दिल से ही काम करते है और खुश रहते है ! तो अच्छी जिन्दगी जीने के लिए हमें अपने निर्णय अपने दिल से ही लेने चाहिए ! कुछ ऐसे लोग होते हैं जो करते कम हैं मगर हवा बड़ी बांधते हैं. उनकी हवाबाजी के लपेटे में सारी दुनिया आ जाती है. ऐसे लोग कभी तथ्‍यों और आंकड़ों पर बात नहीं करते. ऐसे लोगों द्वारा की जाने वाली प्रस्‍तुतियां दिल को नहीं बल्कि दिमाग को प्रभावित करती हैं. इस हवाबाजी की उम्र अधिक नहीं होती है.

आपको अपनी अलग पहचान बनाने में आपकी अक्‍खड़ता और आपकी फक्‍कड़ता बहुत मददगार साबित होती है. अक्‍खड़ता का अर्थ बदतमीजी नहीं है. अक्‍खड़ता का अर्थ है सुनिए सबकी करिए अपने मन की. अक्‍खड़ता में आपके वेश-भूषा की भी अहम् भूमिका होती है. अक्‍खड़ता आपके देसीपन की पहचान होती है और यही पहचान आपको आगे ले जाने में मददगार साबित होती है. वर्तमान राजनीतिक परिदृश्‍य में श्री नरेन्‍द्र मोदी एवं श्री अमित शाह इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं. सुनते सबकी हैं, करते अपने मन की हैं. इसी अक्‍खड़ता की वजह से भारतीय राजनीति का चाल चरित्र और चेहरा सब कुछ बदल गया है. सबकी बात सुनना और सबको तर्कों के साथ उद्धरण का वास्‍ता देते हुए सही जवाब देना अक्‍खड़ता की निशानी है. फक्‍कड़ता एक किस्‍म का साहस है. फक्‍कड़ता का तात्‍पर्य धन से है. जो लोग खाली जेब लेकर किसी नेक काम के लिए जब भी आगे बढ़ते हैं, लोग पैसों की थैली लेकर उनके पीछे खड़े हो जाते हैं. सिर्फ आपका लक्ष्‍य जनहिताय होना चाहिए और प्रयासों में ईमानदारी होनी चाहिए.

बहुत सारे लोग एक ही काम करते हैं, मगर हम उस व्‍यक्ति के द्वारा किए गए कार्य को याद रखते हैं, जो उस काम को अलग तरीके से करता है. लीक से हटकर चलना ही अक्‍खड़ता है. अपने अंदर की अक्‍खड़ता को बाहर निकालिए. निश्चित ही आपकी एक अलग पहचान बनेगी. 


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