आजादी के 71  वे वर्ष में हम पहुँच गए हैं. इन वर्षों में भारत ने कई सारे उतार चढ़ाव देखे किन्तु सबकी जमीन तो तैयार की आजादी के रणबांकुरों ने. इन बांकुरो में साहित्यकारों की भी अपनी  विशेष भूमिका थी जिन्होंने अंग्रेजों की चूले हिला दी थी.  ये अफसोसजनक कहा जा सकता है कि आज ऐसे साहित्यकारों को बहुत कम याद किया जाता है जिन्होंने अपनी कलम से क्रान्ति का बिगुल फूँका. आजादी के लिए  कुर्बानी में राजनेताओं और शहीदों के साथ-साथ साहित्यकार और पत्रकार भी शामिल  हुए थे जिन्होंने अपनी कलम की ताकत से पूरी ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी थी. इन साहित्यकारों और पत्रकारों में कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने देश के लिए कुर्बानियां दी जिन्हें हम देशवासियों को जानना चाहिए. इस श्रृंखला में सबसे प्रसिद्ध है मैथिली शरण गुप्त जी.  इन्होंने अपनी कलम के माध्यम से सुप्त भारतीयों में राष्ट्रीय भावना को जागृत किया इसलिए इन्हें राष्ट्रीय कवि होने का महान गौरव भी प्राप्त है. गुप्त जी अपनी रचना में लिखते हैं- जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह ह्रदय नहीं पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं.  गुप्त जी ने अपनी रचनाओं से देश प्रेम और जनचेतना की ऐसी लौ जलाई जिससे प्रेरित होकर उस समय के हर वर्ग के लोग स्वतंत्रता संग्राम में अपनी सक्रिय भागीदारी देने लगे . भारतेंदु हरिश्चंद्र ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. भारतेंदु हरिश्चंद्र एक कुशल पत्रकार , कवि , नाटककार , निबंधकार , इतिहासकार और उपन्यासकार के रूप में प्रसिद्ध है. भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने अपने जीवन काल में हिंदी साहित्य के क्षेत्र में इतना काम किया कि उनका युग  भारतेंदु युग  के नाम से प्रसिद्ध हुआ. भारतेंदु की रचनाओं में राष्ट्रीय भावना का स्वर विशेष रूप से मुखरित हुआ है. उन्होंने अंग्रेजों द्वारा अपने शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई.
वे लिखते हैं  अंगरेज राज सुख साज बजे सब भारी .
पै धन विदेश चलि जाता इहै अति ख्वारी ..
सजे ताहु पै महंगी काल रोग बिस्तारी .
दिन दिन दूने दुख इस देता हा हा थी ..
सबके ऊपर टिक्कस की आफत आई . 
हा ! हा ! भारत दुर्दशा न देखी  जाई .. 

भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने केवल 18 वर्ष की आयु में कवि वचन सुधा  नामक पत्रिका का संपादन एवं प्रकाशन प्रारंभ किया था. इसके अलावा इन्होंने कई अन्य पत्रिकाओं का संपादन  भी किया.
माखनलाल चतुर्वेदी ,बाल कृष्ण शर्मा नवीन  , सुभद्रा कुमारी चौहान आदि राष्ट्रीय काव्य धारा के प्रतिनिधि कवि हुए. इन लोगों ने अपनी रचनाओं में राष्ट्रीय और सांस्कृतिक संघर्ष को व्यक्त किया.
माखनलाल चतुर्वेदी ने अपनी रचना पुष्प की अभिलाषा में देश पर मर मिटनेवाले सैनिकों के मार्ग में बिछ जाने की  इच्छा व्यक्त की वे लिखते हैं  मुझे तोड़ लेना वनमाली ,उस पथ पर तुम देना फेंक.
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाएं वीर अनेक ..

बाल कृष्ण शर्मा  नवीन  ने  विपलव गान  में लिखा है 
कवि कुछ ऐसी तान सुनाओ, जिससे उथल-पुथल मच जाये.
एक हिलोर इधर से आये एक हिलोर उधर को जाये.
नाश ! नाश ! हां महानाश ! ! ! की प्रलयंकारी आंख खुल जाये .

सुभद्रा कुमारी चौहान की रचना है 

 सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,
बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,
गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,
दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी.
चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी ,

ऐसे ही अनेक रचनाकारों ने अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज उठाई जयशंकर प्रसाद का अरूण यह मधुमय देश हमारा  , सुमित्रानंदन पंत  ने  ज्योति भूमि ,जय भारत देश  निराला ने  

भारती ! जय विजय करे.
स्वर्ग सस्य  कमल धरे ..


रामधारी सिंह दिनकर ने

कलम आज उनकी जय बोल
जला अस्थियां बारी-बारी
छिटकाई जिसने चिंगारी जो चढ़ गए पुण्य-वेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल
कलम आज उनकी जय बोल.....

इन साहित्यकारों ने देश- प्रेम की ऐसी गंगा बहायी जिसने विदेशी हुकूमत की नींव हिला दी.  स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान एक ओर बाल गंगाधर तिलक ने नारा दिया  स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहुगा  तो दुसरी तरफ बंकिम चन्द्र चटर्जी का गीत वंदे मातरम आया, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने नारा दिया,  तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा  और जयशंकर प्रसाद नें   हिंमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती स्वयं प्रभा समुज्जवला स्वतंत्रता पुकारती  गीत की रचना की इस दौरान प्रेमचंद की रचनाएं आई. हम सब इस बात से भली भांति परिचित हैं कि प्रेमचंद स्वाधीनता संग्राम के निर्भीक योद्धा रहे है. उनकी रचनाओं के लिए अंग्रेजी सरकार द्वारा कई बार उन्हें यातनाएं झेलनी पड़ी पर उनकी कलम कभी रुकी नहीं वह निरंतर चलती रही. प्रेमचंद ने लिखा भी है कि "मैं मजदूर हूं बिना लिखे मुझे रोटी खाने का हक नहीं   प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं के द्वारा देश में स्वाधीनता के विचार का प्रचार-प्रसार ठीक उसी तरह किया जिस तरह सक्रिय राजनीति में सत्य अहिंसा के द्वारा गांधी जी ने किया. देश भक्ति की भावना को जागृत करती अनेक रचनाएं हमारे साहित्यकारों ने हमें प्रदान की  है. और फिर आज के दौर में  जब आप ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आंख में भर लो पानी जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी   गीत सुनते हैं तो आँखे छलछला जाती है क्यों ? क्योंकि ऐसे ही गीतों, आलेखों का कमाल है जिसने देश भक्ति की अलख दिलों में जलाई और राष्ट्रप्रेम से हमारा तन-मन ओतप्रोत किया.  भले ही ए मेरे वतन के लोगों...'गीत की रचना कवि प्रदीप ने 1962 के भारत चीन युद्ध में शहीद हुए जवानों की  श्रद्धांजलि बतौर  की थी. किन्तु आजाद भारत का ये गीत पूरे इतिहास को समेटता हुआ अपनी बात कहता है तभी तो जब इस गीत को लता मंगेशकर ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में गाया, तो इसे  सुनकर जवाहरलाल नेहरू जी की  आंखें भी भर आई थी. 
बहरहाल, आजादी के इस पावन अवसर पर समस्त शहीदों, रणबांकुरों को प्रणाम करते हुए उन कलमकारों को भी प्रणाम हैं जिनकी बदौलत हममे देशभक्ति का दिया आज भी प्रज्ज्वलित है


जानिए 2016 में कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में

1. असम में पुलिस फायरिंग के चलते टूटा हाई वॉल्टेज तार, 11 लोगों की मौत, 20 घायल

2. केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, जांच में मैगी सफल: नेस्ले इंडिया

3. गैर-चांदी आभूषणों पर उत्पाद शुल्क को लेकर जेटली अडिग

4. शंकराचार्य का विवादित बोल- साई पूजा की देन है महाराष्ट्र का सूखा

5. कन्हैया और उमर खालिद समेत 5 छात्र हो सकते है JNU से सस्पेंड

6. करोड़ों लोगों ने देखा प्यार का ये इजहार, आप भी जरूर देखिए

7. महाराष्ट्रः बार-बालाओं पर पैसे लुटाने या उन्हें छूने पर होगी सजा

8. नितिन गडकरी की पीएम मोदी को सलाह, गजलें सुनें, टेंशन फ्री रहें

9. कोल्लम हादसा-मंदिर के पास मिली विस्फोटकों से भरी तीन गाड़ि‍यां

10. शत्रु ने की नीतीश जमकर तारिफ, कहा- 2019 में PM पद के दावेदार

11. पाक अदालत में सबूत के तौर पर पेश हुआ ग्रेनेड फटा, 3 घायल

12. असम-बंगाल में हुई बंपर वोटिंग, CM गोगाई के खिलाफ केस दर्ज


************************************************************************************

बॉलीवुड      कारोबार      दुनिया      खेल      इन्फो     राशिफल     मोबाइल

************************************************************************************


पलपलइंडिया का ऐनडरोएड मोबाइल एप्प डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे.

खबरे पढने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने, ट्विटर और गूगल+ पर फालो भी कर सकते है.



अन्य जानकारियां :

सुरुचि: इस पेज पर कुकिंग और रेसेपी के बारे में रोज़ जानिए कुछ नया

तनमन: इस पेज पर जाने सेहतमंद रहने के तरीके और जानकारियां

शैली: यह पेज देगा स्टाइल और ब्यूटीटिप्स सहित लाइफस्टाइल को नया टच

मंगलपरिणय: इस पेज पर मिलेगी विवाह से जुड़ी हर वो जानकारी जिसे आप जानना चाहेंगी

आधी दुनिया: यह पेज साझा करता है महिलाओं की जिन्दगी के हर छुए-अनछुए पहलुओं को

यात्रा: इस पेज पर जानें देश-विदेश के पर्यटन स्थलों को

वास्तुशास्त्र: यह पेज देगा खुशहाल जिन्दगी की बेहद आसान टिप्स