अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति का दिवस है, 15 अगस्त. इस दिन से भारत ने खुली हवा में सांस लेना प्रारंभ किया. उस समय चारों तरफ प्रसन्नता दिखाई दी, लेकिन वर्तमान वातावरण को देखकर ऐसा लग रहा है कि हम स्वतंत्रता के वास्तविक मायनों को विस्मृत कर चुके हैं, आजादी का मतलब हमने मनमानी स्वच्छंदता मान लिया है. सच तो यह है कि आजादी के बाद हमारी स्वच्छंदता देशानुरुप होना चाहिए, लेकिन क्या आज के परिवेश को देखकर कोई यह कह सकता है कि स्वतंत्रता मिलने के बाद हमारा व्यवहार देशानुरुप रहा, कदाचित नहीं.

हम जानते हैं कि भारत सदैव से ही सांस्कृतिक संहिता का परिपालन करने वाला राष्ट्र रहा है. विश्व के देशों की भले ही राष्ट्रीय संहिताएं नहीं हों, लेकिन भारत के मामले में ऐसा कतई नहीं है. भारत के उच्च स्तरीय मानबिन्दु हैं. वर्ष 1947 में भारत को मिली स्वतंत्रता के बाद जैसा वातावरण अंगे्रज हमारे देश में छोड़कर गए थे, वैसे ही वातावरण में हम सभी गोता लगाते चले गए और उसको आत्मसात ही नहीं किया, वरन दो कदम आगे बढ़कर उससे भी आगे निकल गए. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का आशय हमने देश विरोधी नारे लगाने को ही मान लिया. सबसे बड़ी विसंगति यह है कि ऐसे कारनामों को राजनीतिक संरक्षण भी मिल जाता है.

स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि हम कुछ भी करें, बल्कि स्वतंत्रता का अर्थ यह है कि हम जो कुछ भी करें वह अपने देश के अनुरुप ही होना चाहिए. स्वतंत्रता का आशय अनुशासन है. अनुशासन हम सभी का राष्ट्रीय कर्तव्य होना चाहिए. अनुशासन नहीं होगा तो हमारे देश में देश विरोधी नारे भी लगेंगे और राजनीति भी होगी. लेकिन यह सत्य है कि एक देशभक्त व्यक्ति ऐसे किसी भी कार्य को सिरे से खारिज ही करेगा, जो देश के विरोध में हो. हम देख रहे हैं कि कश्मीर में क्या हो रहा है, जेएनयू दिल्ली में कैसे नारे लग रहे हैं? इनके लिए अनुशासन का कोई महत्व नहीं है. यह राष्ट्रीय मर्यादाओं को भी लांघ जाते हैं. लेकिन क्या आजादी का मतलब यही है, नहीं. आजादी तो हमें स्वयं के विवेक से निर्णय करने की छूट देती है, जो अंगे्रजों के शासनकाल में नहीं था. हम अपने भारत के सांस्कृतिक अनुशासन को आत्मसात करते हुए स्वतंत्रता के अर्थ निकालें तो हमें निश्चित रुप से जो दिशा मिलेगी, वह भारत के भवितव्य को तो स्वर्णिम बनाने में सहायक होगा, साथ अपने स्वयं के जीवन को भी उच्चतम सोपान पर ले जाने में सहायक होगा.

वर्तमान समय की आपाधापी में हम इस तथ्य को पूरी तरह से लगभग विस्मृत ही कर चुके हैं कि आज से 71 वर्ष पहले हमने जो स्वतंत्रता प्राप्त की, उसका क्या मूल्य चुकाया. वरिष्ठ पीढ़ी के नागरिक उस मूल्य से भली भांति परिचित हैं, लेकिन देश का युवा वर्ग और आने वाली पीढ़ी स्वतंत्रता के संघर्ष में जो बलिदान हुए, उसे भूल गए हैं. हमें इस बात का चिंतन करना होगा कि इनका बलिदान किसके लिए हुआ, उनका उद्देश्य क्या था? वास्तव में यह बलिदान के किस्से आज किताबों में धूल खा रहे हैं. हमें स्मरण करना होगा कि आज हम स्वतंत्र भारत में निवास कर रहे हैं, वह इन्हीं देशभक्त बलिदानियों का ही परिणाम है. जरा विचार कीजिए आज हम क्या कर रहे हैं? हम इतने स्वार्थ केन्द्रित होते जा रहे हैं कि हमें यह भी पता नहीं कि देश होता क्या है? आज की सबसे बड़ी वास्तविकता यही है कि हम अपने घर के बाहर की चिंता ही नहीं करते, दूसरे की कमियां निकालने में ही सारा समय निकल रहा है. हम सरकारों को दोष देने में सबसे आगे रहते हैं, जबकि हमारे भी कुछ राष्ट्रीय कर्तव्य हैं, इसी नाते हमें यह भी विचार करना होगा कि परतंत्रता में जो दंश हमारे पूर्वजों ने भोगा, वह हमारी भावी पीढ़ी को न भोगना पड़े. एक विचारक ने कहा है कि गुलामी में पैदा होने के लिए तुम जिम्मेदार नहीं हो, लेकिन उसी गुलामी में मर जाना, उसके लिए तुम और केवल तुम ही जिम्मेदार हो. देश भौगोलिक दृष्टि से भले ही स्वतंत्र हो गया हो, लेकिन मानसिक रुप से हमारी आधुनिक पीढ़ी आज भी गुलाम ही है, उसे न तो भारत की परंपराएं दिखती हैं और न ही अपनी स्वर्णिम विरासत. जो व्यक्ति अपने देश को अच्छा नहीं मानकर पाश्चात्य वृत्तियों को अपनाने वाला कार्य करता है, वह भारत को किस रुप में देखता होगा, इसका विचार किया जाता सकता है. पाश्चात्य वृत्ति के कारण ही आज देश सामाजिक बुराइयों के चंगुल में फंस रहा है. हम इन बुराइयों का विरोध भी करते हैं, और सरकार को दोष देते हैं, लेकिन क्या हमने सोचा है कि यह बुराई देश में क्यों और कैसे आर्इं? इसका कारण हम स्वयं ही हैं, जो सिनेमा, टीवी पर देखा, वैसा ही हम करते चले गए. यह मानसिक गुलामी नहीं तो और क्या है? सबसे ज्यादा चिंता की बात तो यह है कि इस प्रकार की मानसिकता अपने आपको प्रबुद्ध वर्ग की जमात में शामिल करने वाले लोगों की ही है. भारत की भोली भाली जनता भी इन नकली बुद्धिजीवियों के ज्ञान को सही जानकर भारत की सांस्कृतिक विरासत से कटती जा रही है.

स्वतंत्रता का मनमाना अर्थ निकालकर हमारे देश में मतभेद लगातार बढ़ते जा रहे हैं, मनों में भेद घर कर गए हैं. यहां तक कि राष्ट्रीय आस्थाओं पर आक्रमण भी किए जा रहे हैं. जिस देश में पुरातन काल से गौमाता की पूजा की जा रही है, लेकिन इसी पूजनीय गौमाता को सरेआम काटा जा रहा है. एक मजहब विशेष के आराधना स्थल फैलते जा रहे हैं और अयोध्या का राम मंदिर अपने निर्माण की बाट देख रहा है. यह कैसी स्वतंत्रता है, जिसके स्वत्व का अभाव है. अपनेपन का अभाव है. राम मंदिर और गौमाता भारत में अपनेपन में ही आते हैं. एक समय था जब यहां का बच्चा-बच्चा अपने को राम ही समझता था, हर बालिका को देवी का अवतार माना जाता था. आज यह परंपराएं कहां विलुप्त हो गर्इं. जहां तक राष्ट्रीय अनुशासन की बात है तो यह कहना समीचीन होगा कि हमें भारत को ध्यान में रखकर ही स्वतंत्रता के मायने निकालने होंगे, अपनी मनमानी से नहीं. अपने लिए जीने वाले कभी भी आदर्श नहीं बनते, बल्कि देश हित जीने वाले हमेशा ही आदर्श होते हैं. देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखें, इस पंक्ति को अपने जीवन का आधार बनाइये और वास्तविक स्वतंत्रता के साथ उत्सव मनाइये. जय भारत.


जानिए 2016 में कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में

1. असम में पुलिस फायरिंग के चलते टूटा हाई वॉल्टेज तार, 11 लोगों की मौत, 20 घायल

2. केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, जांच में मैगी सफल: नेस्ले इंडिया

3. गैर-चांदी आभूषणों पर उत्पाद शुल्क को लेकर जेटली अडिग

4. शंकराचार्य का विवादित बोल- साई पूजा की देन है महाराष्ट्र का सूखा

5. कन्हैया और उमर खालिद समेत 5 छात्र हो सकते है JNU से सस्पेंड

6. करोड़ों लोगों ने देखा प्यार का ये इजहार, आप भी जरूर देखिए

7. महाराष्ट्रः बार-बालाओं पर पैसे लुटाने या उन्हें छूने पर होगी सजा

8. नितिन गडकरी की पीएम मोदी को सलाह, गजलें सुनें, टेंशन फ्री रहें

9. कोल्लम हादसा-मंदिर के पास मिली विस्फोटकों से भरी तीन गाड़ि‍यां

10. शत्रु ने की नीतीश जमकर तारिफ, कहा- 2019 में PM पद के दावेदार

11. पाक अदालत में सबूत के तौर पर पेश हुआ ग्रेनेड फटा, 3 घायल

12. असम-बंगाल में हुई बंपर वोटिंग, CM गोगाई के खिलाफ केस दर्ज


************************************************************************************

बॉलीवुड      कारोबार      दुनिया      खेल      इन्फो     राशिफल     मोबाइल

************************************************************************************


पलपलइंडिया का ऐनडरोएड मोबाइल एप्प डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे.

खबरे पढने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने, ट्विटर और गूगल+ पर फालो भी कर सकते है.



अन्य जानकारियां :

सुरुचि: इस पेज पर कुकिंग और रेसेपी के बारे में रोज़ जानिए कुछ नया

तनमन: इस पेज पर जाने सेहतमंद रहने के तरीके और जानकारियां

शैली: यह पेज देगा स्टाइल और ब्यूटीटिप्स सहित लाइफस्टाइल को नया टच

मंगलपरिणय: इस पेज पर मिलेगी विवाह से जुड़ी हर वो जानकारी जिसे आप जानना चाहेंगी

आधी दुनिया: यह पेज साझा करता है महिलाओं की जिन्दगी के हर छुए-अनछुए पहलुओं को

यात्रा: इस पेज पर जानें देश-विदेश के पर्यटन स्थलों को

वास्तुशास्त्र: यह पेज देगा खुशहाल जिन्दगी की बेहद आसान टिप्स