आज बाजार में एक ही चर्चा सुनी जा रही है, वह चर्चा है जीएसटी की. जीएसटी के बारे में सरकार अपने विभिन्न प्रयासों से व्यापारी और आम जनता का भ्रम दूर करने का हर संभव प्रयत्न कर रही है. इसके बाद भी जीएसटी के बारे में कुछ व्यपारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है. इसके कारण कहीं विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं तो कहीं आर्थिक मामलों के जानकार इसे अभूतपूर्व कदम बता रहे हैं. दोनों प्रकारों के स्वरों के उभरने से ऐसा लग रहा है कि वास्तव में जीएसटी समस्या है या फिर समाधान. अगर समस्या है तो सरकार को समाधान कारक कदम उठाना चाहिए. कहा जा रहा है कि जीएसटी के बारे में अनभिज्ञता ही समस्या है. जो धारणा है वह शीघ्र ही समाप्त होगी, ऐसा विश्वास भी कुछ व्यापारियों को है.
वास्तव में पूरे देश को एक समान कर प्रणाली में लाने वाला जीएसटी कर सुधार का सबसे बड़ा पर्याय माना जा रहा है. इससे जहां व्यापारियों को कर जमा करने में आसानी होगी, वहीं आम जनता पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को भी कम किया जा सकेगा. फिलहाल देश में यही दिखाई देता था कि व्यापारी कई स्तर पर माल की कीमत तय करता था. जीएसटी के लागू हो जाने से व्यापारी स्तर पर होने वाली मूल्य वृद्धि पर लगाम लगाई जा सकेगी और कई जगह लगाए जाने वाले कर से भी मुक्ति मिलेगी. अभी देश में ऐसा देखने में आ रहा था कि शोरुम पर बिकने वाली कोई वस्तु साधारण दुकान से काफी महंगी होती है. शोरुम वाले वस्तु को सजाने के लिए उपयोग की जाने वाली सामग्री का दाम भी ग्राहक के खाते में जोड़ देते हैं, जिससे उपभोक्ता की जेब पर अनावश्यक बोझ बढ़ जाता था. जीएसटी के लागू होने से वस्तु की कीमत हर जगह एक ही होगी. इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इससे व्यापारियों पर कुछ भी प्रभाव नहीं होगा, जो कर लगेगा वह सीधे जनता से ही वसूल किया जाएगा. हालांकि यह भी सत्य है कि जनता पर करों का बोझ पहले से ही था, लेकिन जीएसटी के लागू हो जाने के बाद इन करों में पारदर्शिता आएगी, जिसे जनहितकारी कदम निरुपित किया जा सकता है.
जुलाई से जीएसटी की दरें लागू होने से आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा इसे जानना आपके लिए बहुत जरूरी है. 1 जुलाई से लागू होने जा रहा है एक समान कर वाला जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विसिस टैक्स एक ऐसा टैक्स है जो टैक्स के बड़े जाल से मुक्ति दिलाएगा. जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजें सस्ती हो जाएगी जबकि कुछ जेब पर भारी भी पड़ेंगी. लेकिन सबसे बड़ा फायदा होगा कि टैक्स का पूरा सिस्टम आसान हो जाएगा. 18 से ज्यादा टैक्सों से मिलेगी मुक्ति और पूरे देश में होगा सिर्फ एक टैक्स जीएसटी.
अब जबकि यह विधेयक लागू होने जा रहा है तो इसकी अलग-अलग परतों पर चर्चा करना आवश्यक हो जाता है. एक तरफ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह अर्थव्यवस्था में एक नई जान फूंकेगा, तो कुछ पार्टियों और राज्य इसे लागू करने के विरोध में भी हैं. कुछ उलझनों के बावजूद सरकार और अधिकांश आर्थशास्त्री इसे स्वतंत्रता के बाद भारत का सबसे बड़ा कर सुधार का कदम मान रहे हैं और इसके पीछे उनका तर्क है कि जीएसटी देश की टेढ़ी कर व्यवस्था को पटरी पर लाएगा और लाल फीताशाही को कम करेगा. गौरतलब है कि ये अकेला टैक्स, सामान के शहर में प्रवेश पर लगने वाले कर, एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स और अन्य राज्य स्तरीय करों की जगह ले लेगा. जानकारों के अनुसार, इससे मेक इन इंडिया प्रोग्राम को प्रोत्साहन तो मिलेगा ही, क्योंकि व्यापार क्षेत्र में उच्च कर दरों और लाल फीताशाही के कारण वर्तमान में व्यापार को 5 से 10 प्रतिशत का नुकसान होता है. जाहिर है, यह एक बड़ा आंकड़ा है और अगर गुड्स एन्ड सर्विसेज टैक्स जीएसटी, इस गैप को भरने में कामयाब रहता है तो एक बड़ी उपलब्धि के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में भी एक निश्चित उछाल आ सकता है. जीएसटी की महत्ता को हम कुछ यूं भी समझ सकते हैं कि भारत के एक राज्य में बनने वाला सामान जब देश के किसी दूसरे हिस्से में पहुंचता है तो उस पर कई बार टैक्स लग जाता है. इस स्थिति से जीएसटी छुटकारा दिला सकता है. जीएसटी का जो सबसे बड़ा फायदा बताया जा रहा है, उसके अनुसार टैक्स वो राज्य सरकारें वसूलेंगी, जहां उत्पाद की खपत होती है. ज्ञातव्य हो कि इससे पहले टैक्स वसूली वहां होती थी, जहाँ सामान बनता था और खपत वाले राज्यों में भी वैट इत्यादि से सरकारें अपनी आमदनी बढ़ाने का जरिया खोजती थीं. ऐसे में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे कम विकसित राज्यों को अधिक संसाधन मिलेंगे क्योंकि वहां उपभोक्ताओं की बड़ी संख्या है. समझना मुश्किल नहीं है कि क्यों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जीएसटी पर मोदी सरकार के सुर में सुर मिलाते नजर आये थे. साफ है कि यह व्यवस्था भारत के विभिन्न राज्यों के बीच राजस्व के बराबरी वाली वितरण व्यवस्था के रूप को प्रोत्साहन देती है. इस कानून का एक बड़ा फायदा यह भी बताया जा रहा है कि यह टैक्स वसूली में मदद करेगा और देश में कर चोरी को कम करेगा. जानकारी के अनुसार, यह पूरा तंत्र इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर तैयार किया जा रहा है इसलिए हर भुगतान का एक डिजिटल मार्क होगा, जिसे तलाशना आसान होगा.
जो व्यापारी जीएसटी का विरोध कर रहे हैं, उनके बारे में यही कहा जा सकता है कि वह इसका विरोध नाजायज तरीके से कर रहे हैं. क्योंकि व्यापारी जो कर अदा करता है, उसे वह जनता से वसूल करता है. जब देश की जनता कर देने का तैयार है तो फिर व्यापारी क्यों विरोध कर रहे हैं. एक व्यापारी ने तो यहां तक कहा कि जीएसटी लागू होना देश हित में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है. जीएसटी के आने के बाद किसी भी प्रकार की बेईमानी के अवसर समाप्त हो जाएंगे. जो व्यापारी नम्बर दो की राह पर चलकर देश का अहित कर रहे हैं, उनके सामने कठिनाई आएगी, लेकिन जो ईमानदारी से अपने व्यापार का संचालन कर रहे हैं, उन्हें किसी भी प्रकार की कोई शंका नहीं है. वास्तव में जीएसटी को जिस प्रकार से देश में कर सुधार का बड़ा कदम बताया जा रहा है, उसकी गंभीरता को देखते हुए व्यापारी को भी सरकार का साथ देना चाहिए और बाजार में पारदर्शिता लाने का प्रयास करना चाहिए. हां अगर यह व्यापारियों के समक्ष समस्या पैदा करेगा तो निश्चित ही सरकार को भी इसका गंभीरता पूर्वक चिन्तन करना चाहिए.
सरकार के अनुसार जीएसटी स्वतंत्रता के बाद कर सुधार का सबसे बड़ा कदम है, जिससे जीडीपी में वृद्धि और रोजगारों का सृजन होगा. केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था आने से भारत एक बड़े और एकीकृत बाजार के रूप में तब्दील होगा और जटिल करारोपण खत्म होने से विदेशी निवेशकों को आसानी होगी. एसोचैम के अनुसार छोटे या मध्यम उद्योग समूह, जो असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, को इस टैक्स सुधार कानून से काफी फायदा होगा. जीएसटी से कर संकलन में हो रहे कई तरह के व्यर्थ के खर्चों को रोकने में सहायता मिलेगी, जिससे राज्यों की आर्थिक हालात में सुधार होगा. जीएसटी से उन राज्यों को फायदा होगा, जहां टैक्स लीकेज की वजह से कर संकलन प्रणाली में भ्रष्टाचार चरम पर है. जीएसटी लागू होने से हर सौदा इस कर व्यवस्था के तहत आ जाएगा, जिससे लोगों के लिए करों की चोरी कर पाना आसान नहीं होगा, इसीलिये जीएसटी को काले धन से निबटने के विरुद्ध मजबूत हथियार के तौर पर देखा जा रहा है.


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