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कानून से ज्यादा जरूरी है सोच का बदलना

ललित गर्ग

बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण कानून यानी पॉक्सो में संशोधन संबंधी अध्यादेश को केंद्रीय मंत्रिमंडल और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई. अब बारह साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को मौत की सजा का प्रावधान किया जा सकेगा. प्रश्न है कि अभी तक पाॅक्सो कानून ही पूरी तरह से सख्ती से जमीन पर नहीं उतरा है तो उसे और कड़ा करना क्यों जरूरी है? हमारे देश में कानून बनाना आसान है लेकिन उन कानूनों की क्रियान्विति समुचित ढं़ग से न होना, एक बड़ी विसंगति है. क्या कारण है कि पाॅक्सों कानून बनने के बावजूद एवं उसकी कठोर कानूनी स्थितियों के होने पर भी नाबालिग बच्चियों से बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही है. पिछले दिनों उन्नाव, कठ



दुष्कर्मियों के लिए बना फांसी का फंदा

सुरेश हिन्दुस्तानी

देश में बढ़ते जा रहे दुष्कर्म मामलों के विरोध में बड़ी कार्रवाई करते हुए केन्द्र सरकार ने दोषियों को फांसी की सजा देने का अभूतपूर्व निर्णय लिया है. इसके लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018 को मंजूरी देकर कानून की मान्यता दे दी है. राष्ट्रपति द्वारा इस अध्यादेश की मंजूरी देने के बाद यह देश भर में लागू हो गया.

इस अध्यादेश के लागू होने के बाद दुष्कर्म करने वालों को कड़ी सजा देना संभव हो सकेगा. सवाल यह आता है कि संस्कारित भारत देश में इस प्रकार के अपराध की प्रवृति कैसे पैदा हो रही है? ऐसा वातावरण बनाने के पीछे वे कौन से कारण हैं, जिसके चलते समाज ऐसे गुनाह करने की ओर कदम बढ़ा रहा है. गंभीर



सोसायटी की हार्टबीट है पीआर 

मनोज कुमार

अंग्रेजी के पब्लिक रिलेशन को जब आप अलग अलग कर समझने की कोशिश करते हैं तो पब्लिक अर्थात जन और रिलेशन अर्थात सम्पर्क होता है जिसे हिन्दी में जनसम्पर्क कहते हैं. रिलेशन अर्थात संबंधों के बिना समाज का तानाबाना नहीं बुना जा सकता है और इस दृष्टि से पब्लिक रिलेशन का केनवास इतना बड़ा है कि लगभग सभी विधा उसके आसपास या उसमें समाहित होती हैं. पब्लिक रिलेशन को लेकर भारत में आम धारणा है कि यह एक किस्म का सरकारी का काम होता है या सरकारी नौकरी पाने का एक जरिया होता है. कुछ लोग पब्लिक रिलेशन को जर्नलिज्म से अलग कर देखते हैं. वास्तविकता यह है कि वह भारत की सोसायटी हो या दुनिया के किसी देश की सोसायटी, इन्हें जीवंत रखने के लिए जर्



बेटियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ पलपल इंडिया का संकल्प अभियान

पलपलइंडिया

आज भारतीय संस्कृति का महान पर्व अक्षय तृतीया  है. आज इस महान पर्व पर हम सब संकल्प लें कि अपने घर, नगर, प्रदेश या जहाँ भी हो बेटियां रक्षा करेंगे.अपना हो या पराया, जो भी दोषी होगा, उसकी सज़ा के लिए हम मोर्चा खोलेंगे.
यह संकल्प हे समाज में व्याप्त रूढ़ियों के खिलाफ, बेटियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ. अक्षय तृतीया  रूढ़ियों को तोड़ने का साहस देता है और एक नए भारत बनाने की शक्ति.
आइये हम सब साथ साथ चलते है एक संकल्प के साथ. आप सेल्फी सहित अपने सुझाव, अपने अनुभव और बदलाव के लिए जो कुछ भी किया जा सकता है. हमें मेल आईडी  palpal.editor@gmail.com पर भेज दें. हां, अपना संकल्प-पत्र भेजना ना भूलें. 



अन्ना अब लोकपाल नहीं, लोकलाज पर आवाज उठाओ

अभिमनोज

अन्ना हजारे हमारे समय की उस पीढ़ी के प्रवक्ता के रूप में मौजूद हैं जिनकी बातें लोग सुनते हंै और उस पर अमल करने की कोशिश भी करते हैं. ये वही अन्ना हजारे हैं जिनकी वजह से कांग्रेस केन्द्र की सत्ता से बेदखल हो गई.जनलोकपाल के मुद्दे पर उन्होंने ऐसा समां बांधा कि कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनमत एकत्र हो गया.इस अभियान में अचानक से कहीं से भाजपा ने अपना स्पेस क्रिएट कर लिया और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में स्वयं को स्थापित कर लिया.तब के प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह का मौन रहना कांग्रेस को भारी पड़ा तो बेलाग बोलने वाले नरेन्द्र मोदी में लोगों ने बदलते भारत का सपना देखा था.इस बदलाव का श्रेय अन्ना हजारे को जाता है लेक



गोल्ड कोस्ट में भारत की चमक 

ललित गर्ग

देश पर छाई विपरीत स्थितियों की धुंध को चीरते कॉमनवेल्थ गेम्स से आती रोशनी एवं भारतीय खिलाड़ियों के जज्बे ने ऐसे उजाले को फैलाया है कि हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है. वहां से आ रही रोशनी के टुकड़े देशवासियों को प्रसन्नता का प्रकाश दे रहे हैं . संदेश दे रहे हैं कि देश का एक भी व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की ठान ले तो वह शिखर पर पहुंच सकता है. विश्व को बौना बना सकता है. पूरे देश के निवासियों का सिर ऊंचा कर सकता है. इन दिनों अखबारों के पहले पन्ने के शीर्ष में छप रहे समाचारों से सबको लगा कि  ईक्कीसवें राष्ट्रमंडल खेलों में, कॉमनवेल्थ गेम्स में हमारे खिलाड़ियों ने जिस तरह से पदक जीते हैं, जो शारदार प्रदर्शन



संत-स्मृति पर्याप्त नहीं, संत-मार्ग पर भी चलें!

डॉ. युधिष्ठिर त्रिवेदी

संतों की स्मृति ही पर्याप्त नहीं है, संत-मार्ग पर हम चल सकें तो ही उनके सद्कार्य और हमारा जीवन सार्थक है! कर्मवीर स्वामी स्वतंत्रानंद महाराज का जीवन भी ऐसा ही प्रेरणास्पद है. उनका जन्म हुआ बिहार में, कर्मभूमि बना वागड़ तो कर्म में प्रमुख रहे... सेवा, शिक्षा, संस्कार, धर्म, वेद और यज्ञ-हवन. 
बिहार प्रांत के गया जिले में अप्रैल 1912 में पटवारी रामशरण शर्मा के घर जन्में स्वामी स्वतंत्रानंद प्रारंभ से ही शिक्षाप्रेमी थे. शिक्षा के कारण ही राष्ट्रीय चेतना उनमें बाल्यकाल से ही पैदा हो गई थी. पटना विश्वविद्यालय से वकालात पास करके जहानाबाद में वकालात का कार्य प्रारंभ किया. राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक यात्रा उनको आं



भलमनसाहत प्रचार की मोहताज नहीं होती

अनूप शुक्ल

सबेरे घर के बाहर बैठे चाय पी रहे हैं. धूप निकल आई है. बढिया वाली हवा बह रही है. आसपास के कुत्ते लगातार भौंक रहे हैं. शायद कुछ संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं. हम समझ नहीं रहे. कौन उठकर जाए बाहर देखने.

अखबार में पहले पेज पर विराट कोहली की फोटो है. सलमान खान अंदर हैं. आधा पेज पर सलमान से सम्बंधित खबरें हैं. किस्से-कहानियां, झलकियां भी. सोशल मीडिया गंजा पड़ा है सलमान खान की खबरों से. अपनी अक्ल और तरफदारी के हिसाब से लोग बयान जारी कर कर रहे हैं. मीडिया को भी एकाध दिन की तसल्ली हुई कि नया मसाला खोजना नहीं पड़ेगा.

कुछ दिन पहले सलमान खान 'हिट एंड रन' मामले में छूट भी गए थे. तब भी खूब स्टेटस बाजी हुई थी. कोई 'फुरसतिया' दोनों



क्या समाज के लिए घातक हो रहा है... सोशल मीडिया?

प्रदीप द्विवेदी

इस वक्त एक गंभीर सवाल यक्षप्रश्र बनता जा रहा है कि... क्या समाज के लिए घातक है- सोशल मीडिया?
इस दस अप्रैल को भारत बंद का आयोजन हुआ... आयोजन किसने किया? किसी को नहीं पता... न किसी संगठन ने जिम्मेदारी ली और न ही सरकार को कुछ समझ में आया... यह अपनी तरह का पहला बंद था जिसकी जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली, लेकिन सोशल मीडिया पर इसकी अपील चलती रही और देश के कई हिस्सों में न केवल कामकाज ठप्प हो गया, बल्कि... हिंसक प्रदर्शन के नतीजे भी नजर आए? केन्द्र/प्रादेशिक सरकारों ने सुरक्षा के मद्देनजर भारी इंतजाम किए तो ज्यादातर ने... न हम बंद के समर्थक हैं और न ही विरोधी, कह कर पल्ला झाड़ लिया. नतीजा? देश की प्रगति का... उपयोगी कामकाज का, एक



सत्ता की तड़प और विरोधी दलों की राजनीति

सुरेश हिन्दुस्तानी

भारतीय राजनीति कब किस समय कौन सी करवट बैठेगी, यह कोई भी विशेषज्ञ अनुमान नहीं लगा सकता. अगर इसका अनुमान लगाएगा भी तो संभव है कि उसका यह अनुमान भी पूरी तरह से गलत प्रमाणित हो जाए. हमारे देश में लम्बे समय तक सत्ता पक्ष की राजनीति करने वालों राजनेताओं के लिए यह समय वास्तव में ही अवसान काल को ही इंगित कर रहा है, अवसान इसलिए, क्योंकि उनके पास अपने स्वयं के शासनकाल की कोई उपलब्धि नहीं है. अगर उनका शासन करने का तरीका सही होता तो संभवत: उन्हें इस प्रकार की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता.

कांग्रेस आज भले ही अपनी गलतियों को वर्तमान सरकार पर थोपने का काम करे, परंतु इस बात को कांग्रेस भी जानती है कि वह केन्द्र सरकार का विरोध



 दंगाईयों के सामने घुटने टेकती व्यवस्था

डॉ.भूपेंद्र गौतम

न्यायालयों के निर्णय भी भारत में धर्म-जाति के चश्में से देखे जाने लगे हैं.फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध अभिनेता को मिली सजा हो या अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम का दुरुपयोग रोकने का निर्णय.ऐसे अनेक निर्णयों पर सार्वजनिक प्रश्न उपस्थित किये जा रहे हैं.न्यायपालिका की साख तार-तार हो रही है.ऐसे भी अवसर देखे गये हैं जब अधीनस्थ अदालतां को छोड़िये देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णयों की भी खुलेआम अवहेलना की गई.प्रजातन्त्र के लिए यह शुभ संकेत नहीं है.
अभी फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध अभिनेता सलमान खान को न्यायालय द्वारा काले हिरण के शिकार के जुर्म में पाँच वर्ष की सजा सुनायी गयी.इससे पहले इन्हें ही हिट एण्ड रन



जान है तो जहान है! 

संगीता पांडेय

जान है तो जहान है.... यदि ऐसा कहा गया है तो गलत नहीं है.  क्योंकि आप कामयाबियां तभी प्राप्त कर सकते हैं , जब आपका स्वास्थ्य भी बेहतर हो.  और स्वास्थ्य आपका तभी बेहतर होगा जब आप उसका पूरा पूरा ध्यान रखेंगे.  शायद यही वजह है कि स्वास्थ्य की गंभीरता को समझते हुए पूरी दुनिया में एक ऐसा दिन तय किया गया जब एकजुट होकर सब सेहतमंद रहने का संकलप लें, वो तमाम जानकारियां हासिल करें जो उत्तम जीवन के लिए आवश्यक हैं.  और ये भी कितना सुखद है कि 7 अप्रैल का दिन चुना गया जब पूरा विश्व इस दिन को स्वास्थ्य दिवस के रूप में मानता है. उत्तम स्वास्थ्य के लिए भी जीवन में सात चीजें आवश्यक है - अच्छा मन,  अच्छा तन, अच्छे विचार , अच्छे कार्य ,



इधर चला, मैं उधर चला... 

टी के मारवाह

चुनावों की सुगबुगाहट होते ही कुछ सदैव अतृप्त आत्माएं अपने वास्तविक स्वरूप में लौट आती हैं. अचानक बुद्धि जाग्रत हो, चक्षु दाएं-बाएं थिरकने लगते हैं. 
आखिर चार साल तक चुप रह कोने में पड़े रहकर तनखा भत्तों की भरपूर चांदी काटने के अलावा होता ही क्या है? कभी-कभी पार्टी मुखिया की तरफ से साल में दो चार अवसरों पर  सामूहिक बेहतरीन सुस्वाद भोजन का आनंद मिल जाता है, वो भी तमाम नसीहतों के बाद.  बहुत ही कम ऐसे नेता होते हैं जिनकी घ्राण शक्ति यानी सूंघने की बड़ी तेज होती है. ऐसे लोग मतदान पूर्व ही स्थिति  भांप लेते हैं और अगली सरकार के गठन होने से पहले ही अपनी सशर्त मांगे मनवा अपना और अपने परिवार का भविष्य सुनिश्चित कर ल



कब खुलेंगे! हिन्दी माध्यम, विशेष स्कूल

हेमेन्द्र क्षीरसागर

कब खुलेंगे! हिन्दी माध्यम विशेष स्कूल, यह जिज्ञासा समाप्त होने के बजाय दिनानुदिन बढते ही जा रही हैं। हिन्द देश में हिन्दी की व्यथा निराली है निजी क्षेत्र तो छोडिए! सरकारी तंत्र भी हिन्दी माध्यम विशेष  स्कूल खुलाने परहेज करता है। यकीन नही तो पन्ने पलट लीजिए खुदबखुद समझ आ जाएगा कि हमारे रहनुमाओं ने कितने हिन्दी  भाषी  विशिष्ट  विद्यालय का शंखनाद किया। रवैये से तो साफ जाहिर होता है कि मूल्क में हिन्दी की तालिम की जरूरत ही नहीं है। तभी गली-मोहल्ले और गांव-कस्बों में धडल्ले से अंग्रेजी माध्यम खुलते और हिन्दी माध्यम स्कूल बंद होते जा रहे है। खासतौर पर हमारी सरकारें भी अंग्रेजियत की दीवानी होकर प्रेम में



परेशान होने का मौसम

अनूप शुक्ल

आजकल परेशान होने का मौसम है. आदमी को और कुछ आये चाहे न आये परेशान होना आना चाहिये. बिना परेशानी के गुजर नहीं. आज के समय में अगर कोई परेशान नहीं है तो समझ लो कछु गड़बड़ है.

पहले के जमाने में लोग लोग लुगाइयों से और वाइस वर्सा परेशान होकर जिन्दगी निकाल लेते थे. लेकिन आज इत्ते भर से काम नहीं चल सकता. बहुत परेशान होना पड़ता है. लोग अपने आस पास से , दुनिया जहान से परेशान होते हैं तब कहीं काम चल पाता है.

परेशान होने के लिये बहुत परेशान नहीं होना पड़ता. आपकी इच्छा शक्ति हो घर बैठे परेशान हो सकते हैं. आजकल तो हर चीज की होम डिलीवरी का चलन है तो परेशानी का काहे नहीं होगा. बैठे-बिठाये हो सकते हैं. तरह-तरह के पैकेज हैं परेशानी के.



भगवान महावीर हैं सार्वभौम धर्म के प्रणेता 

ललित गर्ग

सदियों पहले महावीर जनमे. वे जन्म से महावीर नहीं थे. उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये. उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, संकीर्ण सोच एवं स्वार्थी मनोवृत्ति से नहीं प्राप्त की जा सकती उसके लिए सच्चाई को बटोरना होता है, नैतिकता के पथ पर चलना होता है और अहिंसा की जीवन शैली अपनानी होती है. महावीर जयन्ती मनाने हुए हम केवल महावीर को पूजे ही नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीने के लिये संकल्पित हो.
 भगवान महावीर की मूल शिक्षा है- ‘अहिंसा’. सबसे पहले ‘अहिंसा



हिन्दुओं को अल्पसंख्यक बनाने की तैयारी

सुरेश हिन्दुस्तानी

यूं तो भारत लोकतांत्रिक देश है और ये इसकी खूबसूरती भी है. परंतु जिस हिसाब से राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए देश के मान बिन्दुओं को धूमिल कर रहे हैं वो सच में दुर्भाग्यपूर्ण है. कला, संस्कृति से लेकर भगवान और धर्म भी राजनीति के कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है. यह स्थिति क्यों बनी और क्या ऐसी ही स्थिति हमेशा बनी रहेगी, यदि समय रहते इस सवालों के हल नहीं खोजे गये तो शायद पश्चाताप के अलावा कुछ नहीं बचेगा. कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने की मांग मान ली है. इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए केंद्र के पास भेजा गया है. लिंगायत की मांग पर विचार करने के लिए कुछ समय पहल



चुनौतियों के बीच हिन्दी रंगमंच 

मनोज कुमार

वैश्विक परिदृश्य में हर उत्सव के लिए एक दिन निश्चित किया गया है. इस क्रम में रंगमंच के लिए मार्च माह की 27 तारीख निश्चित है. यह दिन विश्व रंगमंच के नाम समर्पित है. विश्व रंगमंच की अवधारणा क्या है और क्यों मनाया जाता है, यह रंगमंच की विधा से जुड़ेे लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय कतई नहीं है लेकिन भारत में खासतौर पर हिन्दी रंगमंच से जुड़े लोगों के लिए आज भी रंगमंच एक चुनौती की विधा है.

रंगमंच को व्यापक फलक में देखा जाना चाहिए. रंगमंच, थियेटर यह ऐसी जगह है जो कलाकारों को मांजती है, निखारत है और उन्हें एक पहचान देती है. यहां कोई शपथ नहीं दिलाई जाती है कि इसके बाद वे समाज की शुचिता के लिए संदेशवाहक का काम करेंगे लेकिन स



सजन रे झूठ ही बोलो...

टी के मारवाह

आज के घमासान जीवन में अनेकों विरोधभास के जंजालों में दमघुटते वातावरण में वर्तमान तो चलायमान है पर भविष्य अदृश्य है. 
प्रतिदिन हम नई आशाओं और कल्पनाओं में घिरे कुछ बेहतर कर दिखाने का मन बनाते हैं पर सोचते कुछ और हैं घट कुछ और ही जाता है ,पत्तों का महल बनाते हैं हवा में उड़ा कोई और ही देता है हम दोष किस्मत को देने लगते हैं 
हम बात कर रहे हैं जरा सी असफलता से या मन खिन्न हो जाने भर से जीवन लीला समाप्ति करने की और चल पड़ते हैं रोजाना सुबह अखबार की सुर्खियों में ,परीक्षा में कम नंबर आने पर तो व्यापार में घाटा हो जाने पर या बाजार का सर पर असहनीय कर्जे का बोझ आ जाने पर ,या कर्ज वसूली वालों के आतंक से भयभीत हो तो माँ बाप



बिहार दिवस पर खुश होने वाली कुछ बातें 

सुरेंद्र किशोर

पश्चिम बंगाल जब बिहार की सराहना करता है तो बिहारी मानस खुश होता है. बिहार  सन 1912 तक  बंगाल का ही हिस्सा था.कुछ साल पहले पश्चिमं बंगाल सरकार ने बिहार के कुछ कामों को अपनाया था.
   एक जमाने में एक कहावत प्रचलित थी कि बंगाल जो कुछ आज सोचता है, बाकी भारत कल उसका अनुसरण करता है. कई कारणों से अब वह बात नहीं रही.  पश्चिम बंगाल की वाम सरकार ने बिहार का अनुसरण करते हुए अपने यहां की नौंवी कक्षा की छात्राओं को मुफ्त साइकिल देने का निर्णय किया था.
 मन मोहन सरकार के कार्यकाल के  वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राज्य सभा में कहा था कि बिहार में विकास दर 13 फीसदी रही जो सराहनीय है.राज्य के लिए विशेष पैकेज एक हजार करोड़



विश्व क्षय रोग दिवस: खांसी है तो इलाज क्यो नहीं करवाते

संगीता पांडेय

बीच बात में खाँसना ठसका हो सकता है , किन्तु बात बात में खाँसना , खाँसते रहना ठसका नहीं बल्कि खांसी का रोग है.   हो सकता है बदलते मौसम के कारण या प्रदूषणयुक्त वातावरण में जाने से या फिर संभव है किसी इंफेक्शन के कारण आपको खांसी हो गयी हो जो दो-चार दिनों में या तो खुद ब खुद या फिर डॉक्टरी सलाह के पश्चात दवाएं खाकर ठीक हो जाती है.  मगर इसके बावजूद ठीक न हो रही हो , और खांसी बढ़ती जा रही हो तो आप उन प्राथमिक दवाओं को छोड़ दें जिनका   आप अब तक सेवन करते आ रहे हैं बल्कि अच्छे डाक्टर के पास जाएं और गम्भीरतापूर्वक जांच भी कराएं , उसका इलाज भी कराएं.  ऐसा न करने या खांसी को मामूली रोग समझने की गलती हो सकता है आपको बहुत भारी पड़



विकास के नाम पर पर्यावरण की उपेक्षा क्यों?

ललित गर्ग

सबका साथ, सबका विकास वर्तमान सरकार का नारा है, यह नारा जितना लुभावना है उतना ही भ्रामक एवं विडम्बनापूर्ण भी है.यह सही है कि आम आदमी की जरूरतें चरम अवस्था में पहुंच चुकी हैं.हम उन जरूरतों को पूरा करने के लिए विकास की कीमत पर्यावरण के विनाश से चुकाने जा रहे हैं.पर्यावरण का बढ़ता संकट कितना गंभीर हो सकता है, इसको नजरअंदाज करते हुए सरकार राजनीतिक लाभ के लिये कोरे विकास की बात कर रही है, जिसमें विनाश की आशंकाएं ज्यादा हंै.विकास और पर्यावरण साथ-साथ चलने चाहिएं लेकिन यह चल ही नहीं रहे हैं, इसमें सरकारों के नकारापन के ही संकेत दिखाई देते हैं।

   विकास के वैसे तो अलग-अलग पैमाने हो सकते हैं, लेकिन जब विकास का रास



एक नई दृष्टि

छद्म

क्या है आना
या कि फिर पाना
एक नई दृष्टि ?

घटना के बगैर
या फिर उसकी तीव्रता के बगैर
क्यों बदल जाता है नजरिया
एक पल में,

अनायास क्यों कौंध जाती है
एक नई चेतना
क्यों बदल जाता है
मेरे खुद का अंतर्मन-मेरी ही दृष्टि में
क्यों अंगीकार हो जाती है
एक नई दृष्टि ?

हिमखंड का दिखना अनायास
सतह के ऊपर
भौतिकी तो नहीं
शायद है मन वाला विज्ञान,
समस्त अनुभूतियों के सापेक्ष
श्नैः-श्नैः पकता चावल
दे जाता है भान।

क्यों कर रस्ते से 
हट जाता है अहम्
क्यों कर कुछ बदल सा जाता है
मेरा स्वाभाव 
और मेरा व्यक्तित्व
एक पल में
पाकर एक नई दृष्टि।

आना नई दृष्टि का
क्य



मन की बात सुना दी? जन की बात सुन लेते तो यह बदलाव नहीं आता!

प्रदीप द्विवेदी

बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं कि ईश्वर ने हमें एक मुंह और दो कान इसलिए दिए हैं कि जितना औरों को हम सुनाते हैं उससे दो-गुना सुने? पर राजनीति में तो उल्टी ही परंपरा है, जितना सुनते हैं राजनेता उसका सौ-गुना सुना देते हैं.
पीएम नरेन्द्र मोदी मन की बात सुनाते हैं, अच्छी बात है, लेकिन... इस बीच थोड़ी-सी सहयोगी जन की बात भी सुन लेते तो शायद एमपी, यूपी, बिहार, राजस्थान के उपचुनावों में जनता भी भाजपा की बात ठीक-से सुन लेती.
मेरी दिक्कत यह है कि मैं किसी भी राजनीतिक दल का समर्थक नहीं हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि किसी भी राजनीतिक दल के उद्देश्यों में खराबी नहीं है, खराबी होती है... किसी भी दल को दल-दल में बदल देने वाले नेताओं में? 



नई ऊर्जा के साथ नववर्ष का स्वागत करें...

डाँ नीलम महेंद्र

कर्नाटक में युगादि, तेलुगु क्षेत्रों में उगादि, महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, सिंधी समाज में चैती चांद, मणिपुर में सजिबु नोंगमा नाम कोई भी हो तिथि एक ही है चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा, हिन्दू पंचांग के अनुसार सृष्टि की उत्पत्ति का दिन, नव वर्ष का पहला दिन,नवरात्रि का पहला दिन.
इस नववर्ष का स्वागत केवल मानव ही नहीं पूरी प्रकृति कर रही होती है.
ॠतुराज वसन्त प्रकृति को अपनी आगोश में ले चुके होते हैं,
पेड़ों की टहनियाँ नई पत्तियों के साथ इठला रही होती हैं,
पौधे फूलों से लदे इतरा रहे होते हैं, 
खेत सरसों के पीले फूलों की चादर से ढके होते हैं,
कोयल की कूक वातावरण में अमृत घोल रही होती है,
मानो दुल्हन सी सजी



सदी के असली महा नायक स्टीफन हॉकिंग

डॉ आशुतोष उपाध्याय

मंजिलें उन्ही को मिलती हैं
जिनके सपनों में जान होती है
सिर्फ पंखों से कुछ नहीं होता, 
हौसलों से उड़ान होती है

इन शब्दों को चरितार्थ करने वाले विश्व मे, इस सदी के महा नायक स्टिफन हॉकिंग हम से विदा हो गये.
मै अभी और जीना चाहता हूँ  
ये कथन किसी और के नहीं विश्व के महान वैज्ञानिकों में से एक स्टीफन हॉकिंग के थे, जो उन्होंने अपने 70 वें जन्म दिन के दिन कहे थे.जबरदस्त इच्छा शक्ति वाले स्टिफन जैसा शायद ही इस सदी में कोई और बचा हो.
8 जनवरी सन 1942 के दिन इंग्लैंड के ऑक्सफ़ोर्ड शहर में फ्रेंक और इसाबेल हॉकिंग दंपत्ति के यहाँ स्टीफन विलियम हॉकिंग का जन्म हुआ, एक विशेष संयोग है कि विश्व के एक अन्य महान व



जागृत ग्राहक, जागृत भारत

प्रो.संजय द्विवेदी

यह सिर्फ संयोग मात्र नहीं है कि विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस(15 मार्च) को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में देश के सबसे महत्वपूर्ण ग्राहक अधिकार संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत का दो दिवसीय अधिवेशन प्रारंभ हो रहा है. आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसवाले की उपस्थिति भी महत्तवपूर्ण है. इससे पता चलता है कि सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठन भी अब इस इस दिशा में सोचने लगे हैं और एक जागरूक ग्राहक के बहाने एक जागरूक राष्ट्र की कल्पना कर रहे हैं.

  इस बाजारवादी समय में जहां चमकती हुई चीजों से बाजार पटा पड़ा है, हमें देखना होगा कि आखिर हम कैसा देश बना रहे हैं. ल



सुकमा में फिर जवानों की शहादत से उठे सवाल

ललित गर्ग

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलवादियों ने सीआरपीएफ के नौ जवानों की नृशंस हत्या करके करोड़ों देशवासियों को आहत किया है.घात लगाकर बैठे इन नक्सलियों ने किस्टाराम थाना क्षेत्र के पलोड़ी में शक्तिशाली विस्फोट में  सीआरपीएफ  के वाहन को उड़ा दिया.विस्फोट के बाद नक्सलियों ने गोलीबारी भी की.इस प्रकार की नक्सलियों की अमानवीय एवं नृशंस हत्या एवं सीआरपीएफ के जवानों की शहादत  ने हर बार की तरह अनेक सवाल पैदा किये हैं.

मुख्य सवाल तो यही है कि क्या हमारे सुरक्षाकर्मियों की जान इतनी सस्ती है कि उन्हें इस तरह बार-बार नक्सलियों से जूझना पड़ता है? क्यों अपनी जान देनी पड़ती है? बार-बार सरकार का यह कहना कि शहीदों की शहादत व



ईमानदारी गर्व का विषय नहीं है!

अनूप शुक्ल

मैं आज से करीब दस साल पहले कानपुर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुये श्री पी.सी.द्विवेदी जी मिलने गया. वे कानपुर विश्वविद्यालय की विधि सम्बन्धी समस्यायें देखते थे. उनके पिताजी पंडित महावीर प्रसाद द्विवेदी प्रख्यात कांग्रेसी थे. पी.सी. द्विवेदी जी अपने पिताजी से बहुत प्रभावित थे लेकिन उनका झुकाव साम्यवाद की तरफ़ भी था. बाप-बेटे में वैचारिक मतभेद बने रहते थे. इतने कि पिताजी ने थाने में सूचित भी किया था- मेरे लड़के पर नजर रखी जाये वह कम्युनिष्ट हो रहा है.

द्विवेदीजी ने अपने कामकाज के दिनों के तमाम किस्से सुनाये. वे एक ईमानदार और निर्भीक कर्मचारी के रूप में विख्यात थे. कानून सम्बन्धी कामकाज देखते थे. कुछ मसलों



कठुआ केस: नाबालिग आरोपी की जमानत याचिका खारिज

भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई में 5 पाकिस्तानी रेंजर्स ढेर

पाकिस्तान ने कृष्णा घाटी सेक्टर में बरसाई गोली, 5 जवान घायल

सुरक्षाबलों की 80 कंपनियां सुनिश्चित करेंगी अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा

कठुआ केस: साध्वी प्रज्ञा ने कहा बच्ची का रेप हुआ ही नहीं, सिर्फ हत्या हुई है

जम्मू बनेगा बोन एंड ज्वाइंटस अस्पताल, 240 बेड की होगी क्षमता

हंदवाड़ा में सुरक्षाकर्मियों ने आतंकी ठिकानों से बरामद किया हथियारों का जखीरा

पुलिस ने हथियार समेत डॉक्टर को किया गिरफ्तार, आतंकवादी फरार

कठुआ मामला: पुलिस ने कहा-फैलायी जा रही भ्रामक खबर, चिकित्सकों ने की दुष्कर्म की पुष्टि

जम्मू-कश्मीर में शौचालय न होने के कारण 600 सरकारी कर्मचारियों का रोका गया वेतन

कठुआ SP सुलेमान चौधरी का तबादला

कठुआ गैंगरेप: कश्मीर के कई हिस्सों में रोकी गई इंटरनेट सेवा

नई रणनीति: उकसावे की कार्रवाई का ज्यादा ताकत से जवाब देगी सेना

कठुआ गैंगरेप में आया नया मोड़

कठुआ केस: एक जैसा नाम होने की मिली सजा, सोशल मीडिया ने बना दिया रेपिस्ट

जम्मू: हाई कोर्ट बार एसो ने सुको को बताया गैंगरेप मामले में वकीलों के प्रदर्शन का हमने समर्थन नहीं किया

पठानकोट: सेना की वर्दी में दिखे संदिग्ध लोगों के फिदायीन होने की आशंका

जम्मू के 3 जिलों में इंटरनेट मोबाइल सेवा वापस बहाल

मरने के बाद भी आसिफा को पोर्न साईट पर सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा

सरकार से बीजेपी के मंत्री देंगे इस्तीफा, कैबिनेट में होगा बदलाव

उरी में हादसा, बस दुर्घटनाग्रस्त होने से 32 लोग घायल

आतंकी समूह में शामिल हुआ जवान, सेना का कहना वह लापता है

आतंकियों ने पुलिसकर्मियों पर किया अटैक, एसपीओ सहित 2 घायल

कठुआ केस: राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस,पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने के आदेश

एलओसी पर पाक ने फिर की गोलाबारी, एक जवान शहीद

कठुआ गैंगरेप केस: पीडि़ता की वकील बोली न जाने कब मेरा भी हो जाए बलात्कार!

महबूबा ने मंजूर किया बीजेपी के दोनों मंत्रियों का इस्तीफा

कठुआ केस में दोषी वकीलों का रद्द होगा लाइसेंस

कठुआ गैंगरेप: आरोपी पुलिसवाले की मंगेतर ने कही ये बड़ी बात

कठुआ दुष्कर्म-हत्या मामले में 4 पुलिसकर्मी बर्खास्त

अखनूर में गड्ढे में मिला गुमशुदा किशोरी का शव

कठुआ मामला: बच्ची के पिता बोले मामले को सांप्रदायिक न बनाएं

कठुआ बलात्कार: मौत की सजा का कानून बनायेंगी महबूबा

कठुआ केस: राहुल बोले कोई कैसे कर सकता है ऐसी घटना के दोषियों का बचाव

सेना-आतंकियों के बीच मुठभेड़ में एक जवान शहीद, 2 घायल

कठुआ रेप और मर्डर केस में वकीलों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

बुलेटप्रूफ जैकेट से लैस होगी सेना, सरकार ने किया 639 करोड़ का करार

हिमाचल में बस हादसा: गहरी खाई में गिरी स्कूल बस,20 बच्चों की मौत

शांति की कोशिश:पीओके के लिए कारवां-ए-अमन बस रवाना

फारूक अब्दुल्ला: नियंत्रण रेखा को शांति रेखा में तब्दलील करें केंद्र

निर्मल सिंह ने कहा कश्मीर में आतंकवाद पर लड़ाई निर्णायक चरण में है

वैष्णो देवी के भवन की ओर जाते समय श्रद्धालु की हुई मौत

कश्मीर घाटी में शैक्षणिक संस्थान बंद

जम्मू-कश्मीर के लोगों का भरोसा जीत सकते हैं मोदी: महबूबा

पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत का बड़ा प्लान, 14000 बंकर बनाएगी सरकार

राजौरी में पाकिस्तान की ओर से की गई गोलीबारी में स्थानीय नागरिक जख्मी

आतंकवादियों ने घर में घुसकर किया युवक का अपहरण, 48 घंटो में दूसरी घटना

अनंतनाग में पत्थरबाजी से पलटा सीआरपीएफ का वाहन, 2 जवान शहीद

पाकिस्तान ने 2 महीने में 633 बार तोड़ा सीजफायर: सरकार

मीरवायज: याद रहे कश्मीर केवल कश्मीरियों का है और किसी का अभिन्न हिस्सा नहीं

महबूबा ने कहा शांति बहाल करना पाकिस्तान के हाथ में है

पाकिस्तान ने पुंछ की तरफ से किया सीजफायर का उल्लघंन, 5 जवान घायल

शोपियां से थे मारे गए 13 में से 10 आतंकी

श्रीनगर के कुछ हिस्सों में प्रतिबंध, बारामूला और बनिहाल के बीच रेल सेवा पर ब्रेक

J&K: एनकाउंटर खत्म, 13 आतंकी ढेर, तीन जवान शहीद, 4 नागरिकों की मौत

कश्मीर में हालात बिगड़ने की आशंका, अलगाववादियों ने बुलाया 2 दिनों का बंद

नियंत्रण रेखा पर पाक ने फिर की गोलीबारी

जम्मू कश्मीर के शोपियां में दो शीर्ष कमांडर सहित 8 आतंकी ढेर, 4 जवान घायल

पीएम मोदी को वाजपेयी जी की तरह पाकिस्तान से करनी चाहिए बातचीत: महबूबा मुफ्ती

अनंतनाग: आतंकियों ने पुलिसकर्मी को मारी गोली, फरार हमलावर की तलाश जारी

वैष्णो देवी दर्शनों के लिए उमड़ी भारी भीड़, टिकट काउंटर बंद

हिजबुल का ग्राऊंड वर्कर नजीर अहमद मलिक गिरफ्तार

शोपियां में राष्ट्रीय राइफल्स की पेट्रोलिंग पार्टी पर आतंकी हमला, जवानों ने मोर्चा संभाला

मां की आवाज पर आतंकवादी बेटा लौटा घर

चार आतंकियों को मर गिराने के साथ खत्म हुआ सुन्दरबनी ऑपरेशन

भारतीय सेना ने जवानों की शहादत का लिया बदला, मार गिराये 3 आतंकी



कश्यपमर कश्मीर और वराहमूला है बारामूला


पहले सीमा पर फायरिंग, फिर पहुंचा सुरक्षा परिषद के सदस्यों के पास पाकिस्तान


कश्मीर में बकरीद के लिए खरीदारी चरम पर


एमपी विजेंद्र सिंगल ने मां के चरणों में लगाई हाजरी


डोडा मे फटा बादल


भारत, पाकिस्तान के बीच दोस्ती का पुल बने कश्मीर : महबूबा


श्रीनगर: अदालत के बाहर आतंकी हमला


सरकार की कथित आपराधिक लापरवाही के खिलाफ पी.डी.पी. उतरी सडक़ों पर


दशर्नो के लिए हर रोज तीस हजार से भी अधिक श्रद्वालु धर्मनगरी मे


मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया


रक्त दान से किसी की जान बचाई जा सकती है


मोसम खराव रहने के वाद शनिवार को धर्मनगरी सहित भवन मार्ग पर मोसम वडा सुहावना


पैंथल मे मंकर संक्रति के दिन 114वा विशाल दंगल


रघुनाथ मंदिर केे परिस्पर मे कटडा वासियो की वैठक मुल्खराज पुरोहित की अध्यष्ता


महिला मोर्च द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया


ग्रेनेड ब्लास्ट में एक बच्चे की मौत, दो घायल


के.जी.एच.ई.पी. के आसपास नागरिकों की आवाजाही पर प्रतिबंध


सीवल डिफैंस की वैठक का आयोजन


अमित कुमार ने एस.एस.पी. श्रीनगर का कार्यभार संभाला


जनता लोकतांत्रिक प्रतिद्वंद्दिता का महत्व समझने लगी है: महबूबा, सीमांत क्षेत्रों के हित पीडीपी के अति महत्वपूर्ण


मतदाताओं को करें जागरूक


मां वैष्णो देवी जी के भवन पर श्रद्धालु घायल


राहत काजमी की फिल्म आइडेंटिटी कार्ड की पूरी शूटिंग कश्मीर में हुई


कश्मीर में कड़ाके की ठंडए लेह में पारा 11 डिग्री


जम्मू कश्मीर रणजी को 20 लाख पुरस्कार