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संघ की दस्तक सुनें

ललित गर्ग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तीन का भविष्य का भारत  विषयक विचार अनुष्ठान अनेक दृष्टियों से उपयोगी एवं प्रासंगिक बना. दिल्ली के विज्ञान भवन में देश के प्रमुख बुद्धिजीवियों और लगभग सभी दलों के प्रमुख नेताओं को आमंत्रित कर उन्हें न केवल संघ के दृष्टिकोण से अवगत कराया गया बल्कि एक सशक्त भारत के निर्माण में संघ की सकारात्मक भूमिका को भी प्रभावी ढ़ंग से प्रस्तुत किया. यह एक दस्तक है, एक आह्वान है जिससे न केवल सशक्त भारत का निर्माण होगा, बल्कि इस अनूठे काम में लगे संघ को लेकर बनी भ्रांतियां एवं गलतफहमियों के निराकरण का वातावरण भी बनेगा. प्रश्न है कि संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत को आखिर क्या जरूरत आ पड़ी कि उन्



माना कि सत्तर प्रतिशत देश भगवा है, लेकिन कलर अभी कच्चा है?

अभिमनोज

तीन प्रमुख राज्यों- एमपी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव और आम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पीएम नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी नेताओं को भरोसा दिलाया कि चुनाव में उनकी जीत पक्की है? और जनता मौकापरस्त महागठबंधन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है! 

खबर है कि... कार्यकारिणी में राजनीतिक प्रस्ताव के तहत- विजन 2022, रखा गया. प्रस्ताव में कहा गया है कि 2022 तक देश से जातिवाद, संप्रदायवाद, आतंकवाद और नक्सलवाद खत्म होगा, लेकिन राजनीतिक प्रस्ताव में राम मंदिर का जिक्र नहीं है? इस मौके पर अमित शाह ने चुनावी जीत के मंत्र दिए, उन्होंने कहा कि- 22 करोड़



मोदी मैजिक खत्म, बाबा और प्रादेशिक सरकारें उलझी जादू के जंजाल में?

प्रदीप द्विवेदी

मोदी मैजिक खत्म हो गया है, लेकिन इस जादू के जंजाल में बाबा रामदेव और एमपी, राजस्थान जैसी भाजपा सरकारें उलझ गई हैं?
बाबा, आम चुनाव- 2014 से पहले पीएम नरेन्द्रभाई मोदी की केन्द्र में सरकार बनवाने के लिए 35 रुपए लीटर पेट्रोल और 400 रुपए में गैस सिलेंडर का सपना दिखा रहे थे तो करोड़ों रुपयों का कालाधन देश में लाने का भरोसा भी दिला रहे थे? अब वही, आप की अदालत जैसे बाबा रामदेव के वीडियो सोशल मीडिया पर परेशानी का सबब बन रहे हैं, बाबा बेवजह सियासी शीर्षासन की मुद्रा में आ गए हैं! अब बाबा ठहरे योगी, पेट की गैस का समाधान तो कर सकते हैं, केन्द्र सरकार में पीएम तो हैं नहीं जो गैस सिलेंडर की समस्या सुलझा दें? वे किससे जाकर कहें कि वे भी



न ठाकुर रह गई, न दलित रह गई कांग्रेस 

प्रकाश भटनागर

इस कहानी के दोनों पात्रों में विरोधाभास के बावजूद समानता है.दोनों को मध्यप्रदेश की कांग्रेस माना जा सकता है.तो कहानी ये है कि एक ठाकुर साहब थे.उनके घर के सामने से एक दलित पगड़ी पहन कर गुजर रहा था.ठाकुर साहब को भला कहां बर्दाश्त होता.उन्होंने दलित को टोका, पगड़ी पहन कर तो तू मेरे सामने से गुजर नहीं सकता। दलित ने दलील दी, ठाकुर साहब, जमाना बदल गया है अब आजकल ऐसा नहीं होता है। ठाकुर ने तलवार निकाल ली.कहा, तेरी तो पगड़ी भी गर्दन के साथ मेरे कदमों में होगी.दलित ने कहा, यह तो अन्याय है, मौका मुझे भी मिलना चाहिए.मैं भी घर से तलवार लेकर आता हूं। ठाकुर राजी हो गया.उधर दलित तलवार लेने घर गया और इधर ठाकुर चिंता में.कहीं इसने मुझे हर



राष्ट्रभाषा को तरसती हिंदी  

संगीता पांडेय

हिंदुस्तान हिंदी से है , हिन्द से है और जब हिन्द में ही हिंदी की दुर्दशा हो तो लगता है जैसे किसी देश की आत्मा ही नहीं है. देश को एकसूत्र में जोड़कर रखने वाली एक भाषा होती है जो देश का हरेक व्यक्ति जानता समझता है और संवाद के माध्यम से वो अपने देश में होने का अहसास पाता  है. हिंदी भारतीय भाषाओं में सबसे ज्यादा बोली-समझी जाने वाली भाषा है और ये कोई आज से नहीं है बल्कि संस्कृतनिष्ठ भारत के समय से इसका विकास निर्बाध गति से हुआ है. भारतीय इतिहास में देवनागरी लिपि को करीब दस हजार साल पहले का बताया गया है , इस लिपि के अनुसार भारत में ही कई भाषाओं का विकास हुआ जिसमें हिंदी सबसे बड़ी भाषा के रूप में रही.  देवनागरी लिपि को ही एक



केवल भारत बंद समाधान नहीं है!

ललित गर्ग

पेट्रोल और डीजल के बढ़ते मूल्यों को लेकर आम जनता परेशान है, उसका दम-खम सांसें भरने लगा है, जीवन दुश्वार हो गया है और इन स्थितियों को लेकर राजनीतिक दलों यानी विपक्षी दलों का सक्रिय होना स्वाभाविक ही है. जब पेट्रोल और डीजल के लगातार बढ़ते दामों के बावजूद केंद्र सरकार कोई कदम उठाती नहीं दिख रही हो तो विपक्ष का हमलावर होना भी समझ आता है, लेकिन इस हमले का स्वरूप भारत बंद की शक्ल में ही क्यों हो? विपक्षी दल और खासकर कांग्रेस यह स्पष्ट करे कि इस तरह भारत बंद करने से उसे या फिर आम जनता को क्या हासिल होने वाला है?  केवल  भारत बंद  से जनता की सहानुभूति पाने का रास्ता अनेक प्रश्नों को खड़ा कर रहा है. बंद और हड़ताल जैसे तरीक



पैरेरल यूनिवर्स हो सकते हैं ?

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

पैरेलल यूनिवर्स की परिकल्पना और उस यूनिवर्स में पहुंचने के तौर-तरीके के संबंध में जो बात विजुअल मीडिया पर मौजूद है उस पर चर्चा करना चाहता हूं पैरेलल यूनिवर्स के संबंध में साफ कर देना चाहता हूं कि पैरेलल यूनिवर्स किसी भी स्थिति में मौजूद तो है असंख्य पैरेलल यूनिवर्स मौजूद है न की हमारे सौरमंडल से जुड़ा हुआ कोई एक मात्र सौरमंडल लेकिन एक सौरमंडल से दूसरे सौरमंडल में प्रवेश के कोई शॉर्टकट रास्ता है यह समझने के लिए ब्लैक होल थ्योरी को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है .
मेरे हिसाब से पैरेलल यूनिवर्स में प्रवेश का तरीका केवल यांत्रिक होगा किंतु प्रोफ़ेसर हॉकिंस को अनदेखा करना भी गलत ही है इसका कारण है कि जो चुंबकी



विपदा का सामना ही समाधान है... 

हेमेन्द्र क्षीरसागर

आपदाएं सामान्य जीवन के साथ-साथ विकास की प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं और अचानक ही हमें ऐसी हिंसा का मुंह देखना पडता हैं. जो न केवल जिंदगियां और ढांचा को तबाह कर देता हैं बल्कि परिवारों को एक-दूसरे से अलग-अलग-थलग कर देती हैं. जनसंख्या के बढते दबाव, शहरी औद्योगिक विकास, वनों के कटाव तथा सीमांत भूमि पर खेती के साथ-साथ मानव अभिप्रेरित जोखिमों में भी वृद्धि हुई हैं. आपदाओं का प्रभाव बहु-विषयक है जो कि घरेलु, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय आदि. आपदा विभिन्न प्रकार के संकटों जैसे: भंूकप, बाढ या तूफान, आग, कृत्रिम त्रासदी, संक्रामक रोगों का परिणाम होती हैं, जिसमें ऐसी नाजुक स्थिति उत्पन्न हो जाती है जो समुदायी,



अर्थव्यवस्था की सुनहरी होती तस्वीर

ललित गर्ग

भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जिसकी विकास गति ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। कृषि क्षेत्र में अच्छे प्रदर्शन एवं विनिर्माण के कारण चालु वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी ) की वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही है जबकि इसी तिमाही में चीन की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही है। अब हमारा देश सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाला देश हो गया है। भारत अब इंग्लैण्ड को पीछे छोड़ कर बहुत जल्दी ही दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। यह वर्तमान नरेन्द्र मोदी सरकार के लिये शुभ एवं श्रेयस्कर होने के साथ-साथ एक अच्छी खबर है। 

अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाने के हमारे आजाद भारत के संक



 पेट्रोल कहां महंगा है, भाई? तब भी एक डालर प्रति लीटर ही तो था!

प्रदीप द्विवेदी

नासमझ लोग बेवजह गैस-पेट्रोल के रेट को लेकर हंगामा मचा रहे हैं? व्हाट्सेपिए, वाद-विवाद कर रहे हैं... फेसबुकिए, फेस बिगाड़ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की समझ तो है नहीं, बस... जो मन में आया ताना मार दिया? अरे, विश्व अर्थव्यवस्था की समझ होगी तभी मन की बात में वजन आएगा.
कांग्रेस के जमाने में एक डालर पचपन रुपए का था तो एक लीटर पेट्रोल का दाम हुआ एक डालर, आज एक डालर सत्तर रुपए का है तो एक लीटर पेट्रोल का दाम आज भी है- एक डालर. कहां महंगा हुआ?
कांग्रेस के जमाने में भी गैस सिलेंडर करीब दस डालर का मिलता था, आज भी तकरीबन उतने में ही मिल रहा है? कहां गैस सिलेंडर महंगा हुआ?
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का सीएम मोदी के जमाने क



क्या गूगल पर लगाम लगा पाएंगे ट्रम्प?

डाँ नीलम महेंद्र

क्या यह संभव है कि दुनिया की नजर में विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति भी कभी बेबस और लाचार हो सकता है?
क्या हम कभी अपनी कल्पना में भी ऐसा सोच सकते हैं कि एक व्यक्ति जो विश्व के सबसे शक्तिशाली देश के सर्वोच्च पद पर आसीन है, उसके साथ उस देश का सम्पूर्ण सरकारी तंत्र है और विश्व की आधुनिकतम तकनीक से युक्त फौज है, उस व्यक्ति के खिलाफ भी कभी कुछ गलत प्रचारित किया जा सकता है?
शायद नहीं? या फिर शायद हाँ?
आज जब अमेरिका के राष्ट्रपति गूगल फेसबुक और ट्विटर पर अपने अपने प्लैटफोर्म से जनता के सामने अपने खिलाफ लगातार और बार बार फेक न्यूज़ परोसने का इल्जाम लगाते हैं,
आज जब डोनाल्ड ट्रंप जैसी शख़सियत कहती  है कि गूगल पर &n



पीएम मोदी ने अपने ही वोट बैंक को नाराज कर दिया है?

अभिमनोज

जो सियासी हालात बन रहे हैं उनको देखते हुए लगता है कि केन्द्रीय भाजपा से पीएम मोदी का एकाधिकार कमजोर पड़ता जा रहा है, ऐसी स्थिति में पीएम मोदी और अमित शाह अपनो के ही सवालों के घेरे में नजर आएंगे? इन तकरीबन साढ़े चार साल में भाजपा में केवल और केवल इन दोनों के निर्णय ही लागू होते रहे हैं. शुरूआत के तकरीबन साढ़े तीन वर्ष तक केन्द्रीय भाजपा की कामयाबी ने पार्टी के भीतर एक तरफा अनुशासन कायम कर दिया था, लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद यह एक तरफा अनुशासन कमजोर पड़ता गया और अब तो पीएम मोदी का जादू पार्टी के अंदर भी बेअसर होने लगा है? यही वजह है कि भाजपा को अब पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के सहारे की ज



कांग्रेस : दामन पर सिख दंगों का दाग

सुरेश हिन्दुस्तानी

देश के वीभत्स हत्याकांड के नाम से पहचान बनाने वाला सिख नरसंहार मामला एक बार फिर से सुर्खियों में है. यह सुर्खियां वर्तमान कांग्रेस मुखिया राहुल गांधी के उस बयान के कारण पैदा हुई हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि सिख हत्याकांड में कांग्रेस का किसी भी प्रकार का हाथ नहीं है. केवल इस प्रकार के बयान देने भर से किसी का हाथ नहीं हो, ऐसा कह पाना संभव नहीं माना जा सकता. यह सही है कि सिखों का नरसंहार केवल इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उत्पन्न हालातों का परिणाम था, यह प्रतिक्रिया किसने की, यह एक अलग सवाल है, लेकिन बिना किसी संलिप्तता के इतना बड़ा हादसा हो ही नहीं सकता. इसलिए भारतीय जनता इस मामले में कांग्रेस को सदैव कठघरे में खड़ा



प्राकृतिक संसाधन जीवन का बहुमूल्य साधन 

हेमेन्द्र क्षीरसागर

हम जिस पर्यावरण में रहते हैं वह अनेक घटकों से मिलकर बना हैं. इसका प्रत्येक घटक हमें किसी न किसी रूप में लाभ पहुंचाता हैं. हमारी आवश्कताएं चाहे मौलिक हो, भौतिक हो, सामाजिक हो, अर्थिक हो, अथवा सांस्कृतिक हो इनकी पूर्ति प्रकृति से ही संभव होती हैं. प्रकृति ने हमें भूमि, जल, वायु, खनिज, ईधन, सूर्य का प्रकाश और वन आदि ऐसे संसाधन विरासत में दिया हैं, जो हमारे जीवन का बहुमूल्य साधन हैं. यह तो हम सभी जानते हैं कि संसाधन सम्पूर्ण पृथ्वी पर असमान रूप से वितरित हैं तथा इनका उपयोग मनुष्य के क्रियाकलापों पर निर्भर करता हैं. यदि इन संसाधनों का उचित प्रयोग करें तो मानव जाति का कल्याण और यदि दुरूपयोग हो तो विनाश निश्चित हैं. अलबत्त



इंसाफ अभी बाकी है...

प्रकाश भटनागर

कभी प्रवचन में एक कहानी सुनी थी. घनी रात थी. लोगों का समूह नदी पार करने आया. जो नौका दिखी, उस पर बैठ गया. अंधेरे के चलते हाथ को हाथ नहीं सूझता था. लोग अंदाजे से किनारे की ओर जाने की नीयत से बारी-बारी चप्पू चलाते रहे. सूरज निकला तो पता चला कि नाव अपनी जगह से जरा भी आगे नहीं बढ़ी थी. वजह यह कि लोग उस रस्सी को खोलना ही भूल गए थे, जिससे नाव उस किनारे पर बंधी हुई थी.

यहां भी बात रस्सी की ही हो रही है. फांसी के फंदे वाली रस्सी. बलात्कार के मामलों ने भयावहता से देश को घेर रखा है. इस अंधेरे के बीच अपराधों की नदी को पार करने की कोशिश की गई. बारह वर्ष से कम आयु वाली बच्चियों के बलात्कारियों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान बनाकर. पहले मध्



अमिट रहेगा संत लोंगोवाल का बलिदान 

ललित गर्ग

पंजाब ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत की माटी को प्रणम्य बनाने में अकाली आन्दोलन के प्रमुख एवं चर्चित सिख संत महापुरुष हरचंद सिंह लोंगोवाल का पंजाब समस्या के समाधान में अमूल्य योगदान है, वे अखण्ड भारत एवं आदर्श एवं संतुलित समाज रचना के प्रेरक थे. वे धार्मिकता एवं राजनीति के समन्वयक महानायक थे. उन्होंने सिख राजनीति को नये आयाम दिये, घोर अन्धकार की स्थितिया में वे एक रोशनी बनकर सामने आये. 
हरचंद सिंह लोंगोवाल का जन्म 2 जनवरी 1932 को पटियाला रियासत, वर्तमान में पंजाब के संगरूर जिले के एक छोटे से ग्राम गिदरैनी में एक साधारण परिवार में हुआ. वे पंजाब में चल रहे आतंकवाद एवं हिंसा की जटिल स्थितियों के बीच सन् 1980 में अका



आश्रय स्थल में ही आसरा नहीं तो फिर आसरा कहाँ साहेब

डाँ नीलम महेंद्र

ये कैसी तरक्की है यह कैसा विकास है
जहाँ इंसानियत हो रही हर घड़ी शर्मसार है,?
ये कैसा दौर है ये कैसा शहर है
जहाँ बेटियों पर भी बुरी नजर है?
ये कौन सी सभ्यता है ये कौन सी संस्कृति है कि 
जहाँ एक पुरूष का मानव शरीर में जन्म लेना मात्र ही मानव होने की पहचान शेष है?
और एक महिला के लिए स्त्री शरीर के साथ जन्म लेने मात्र ही उसका दोष है?
जिसकी सजा कभी उसने  आठ माह की आयु में, कभी तीन साल की उम्र में झेली है तो कभी आठ साल की उम्र में माँ तक बनके और कभी अपनी जान तक गंवा कर चुकाई है?
लेकिन ऐसा भी नहीं है कि आज यौन शोषण केवल बच्चियों का ही हो रहा हो.
टिस, यानी टाटा इंस्टीट्यूट आँफ सोशल सांइसेज की रिपोर्ट म



आप माउंट आबू फिर आएंगे न अटलजी!

निरंजन परिहार

अटल बिहारी वाजपेयी पहाड़ों की खूबसूरती के कायल थे. हिल स्टेशनों की छटा उन्हें खूब आकर्षित करती थी. यही कारण था कि अटलजी राजस्थान के बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन माउंट आबू में बस जाना चाहते थे. उन्होंने एक बार तो अपने साथियों से खुद के लिए घर भी तलाशने को कहा.  घर तलाशा भी गया. अटलजी ने उसे देखा भी, मगर पसंद नहीं आया. अपनी माउंट आबू यात्रा में एक बार वे उनके बेहद करीबी मित्र जगदीश अग्रवाल के माउंट आबू स्थित सबसे शानदार और खूबसूरत होटल हिलटोन के केव रूम्स में ठहरे थे. केव रूम्स दरअसल पहाड़ी की टेकड़ी पर चट्टानों के बीच बने दो कमरों, अजंता और एलोरा कमरों का एक सेट है. जिनमें एक रूम का तो बेड भी गुफानुमा चट्टान में ही है. चारो



वाजपेयी जी को अलविदा नहीं कहा जा सकता

ललित गर्ग

भारतीय राजनीति का महानायक, भारतीय जनता पार्टी के 93 वर्षीय दिग्गज नेता, प्रखर कवि, वक्ता और पत्रकार श्री अटल विहारी वाजपेयी मौत से जंग करते हुए इस संसार से विदा हो गये हैं. उनका निधन न केवल भारत की राजनीति की बल्कि राष्ट्रीयता की अपूरणीय क्षति है. पूरा राष्ट्र अपने महानायक से जुदा होकर आहत है, सन्न है. उनके निधन को एक युग की समाप्ति कहा जायेगा. इस समाप्ति को राजनैतिक जीवन में शुद्धता की, मूल्यों की, राजनीति की, आदर्श के सामने राजसत्ता को छोटा गिनने की या सिद्धांतों पर अडिग रहकर न झुकने, न समझौता करने की समाप्ति समझा जायेगा. उन्होंने न केवल देश के लोगों का दिल जीता है, बल्कि विरोधियों के दिल में भी जगह बनाई है.
हो स



राजनीति की राह जहाँ कुछ सही गलत नहीं होता

डाँ नीलम महेंद्र

राजनीति की राह जहाँ कुछ सही गलत नहीं होता 
उस पर नैतिकता की नई राह बनाने वाले अटल
आज उस राह को सूना कर गए...
कवि ह्रदय के साथ राजनीति की नई परिभाषा गढ़ने वाले अटल
देश को पार्टी और खुद से भी पहले रखने वाले अटल
अपने विरोधियों को भी अपनी तारीफ करने के लिए विवश करने वाले अटल
कभी हार नहीं मानने वाले अटल
एक वोट से हारकर भी जीत जाने वाले अटल
बता गए कि मौत जिंदगी से बढ़ी हो ही नहीं सकती
क्योंकि वो जिंदा थे, जिंदा हैं और हमेशा रहेंगे
अपनी कविताओं में
अपने भाषणों में
देश के करोड़ों दिलों में ही नहीं
अपने विरोधियों के भी दिलों में.



अटल-अटल थे, अमर रहेंगे

कुमार राकेश

सच में मौत से ठन गयी थी अटल जी की .विगत 13 वर्षों से अवचेतन अवस्था में जीना,वो भी क्या जीना था.मगर वे जिए,खूब जिए .मौत से लड़े.खूब लड़े.जमकर लड़े .निश्चिन्त भाव से लड़े,अपनी साँस की अंतिम कड़ी तक लड़ते रहे.लड़ते रहे और फिर चल पड़े चिरंतन यात्रा की ओर. अपने अटल जी , आपके अटल जी.हमारे अटल जी .देश के अटल जी.विदेशो के अटल जी .भारत के अटल जी और घोर दुश्मन पाकिस्तान के भी अटल जी .आखिर क्या जादू था.हम सबके अटल जी में.सच में वे एक युगपुरुष थे.सडक से संसद तक लोकप्रिय एक आम जन नेता अटल जी.

सदैव रहेंगे हम सबके दिल में मेरे भगवन.जी हम दोनों एक दुसरे को इसी शब्द से पुकारते थे और अभिवादन किया करते थे.जब भी मिलते.आमना सामना होता.सचमुच ख़ुशी की ऊर्जा



समय से आगे का चिंतक महात्मा अटल 

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

आज स्तब्ध हो जाना लाज़िमी है जिसकी अवधारणा थी कि डेमोक्रेटिक सिस्टम में हिंसा और वैमनस्यता का कोई स्थान न नहीं. एक कवि के अतिरिक्त शायद ही कोई इतना नरम रुख रखता हो एक सियासी होने के बावज़ूद. 
हिंसा के विरुद्ध एक समरस वातावरण निर्माण की कोशिश को ये देश याद रखेगा. 
अटल बिहारी वाजपेयी जी के जबलपुर आगमन पर हम युवा पीढ़ी के लोग अक्सर उस सभा में ज़रूर जाते थे. मैं तो उनकी मानवीय संवेदनाओं पर आधारित जीवन क्रम का प्रभाव देखना चाहता था. उनके वक्तव्यों में समकालीन परिस्थितियों के लिए सामाजिक सहिष्णुता के लिए जो भी कंटेंट्स होते थे सृजन के विद्यार्थी के रूप में मेरे अनंत तक उतरती थी. वक्तता के रूप में अपनी ओर सम्मोहि



मृत्यु नहीं परकाया प्रवेश है यह...

प्रकाश भटनागर

मौत की कोई सूरत नहीं होती. जिस्म नहीं होता. फिर भी उसका वजूद होता है. जो अंतत: जीवन के अस्तित्व को अपने अदृश्य आंचल तले ढंककर साथ ले जाता है. मृत्यु का यही क्रूर कारोबार है. पूरे हक से वह जीवन छीन लेने का जिसे प्रदान करने में उसका रत्ती भर भी योगदान नहीं होता. लेकिन आज एक पल को तो मृत्यु भी कांपी होगी. अस्पताल में अटल बिहारी वाजपेयी के बेजान होते जिस्म को पूर्णत: निर्जीव करते समय उसे भी अपनी हार का अहसास हुआ होगा.

हार इस बात की कि उसने वाजपेयी के प्राण हरे लेकिन उन्हें मृत घोषित  नहीं करवा पाई. वाजपेयी हमेशा जीवित रहेंगे. सच्चे इंसान के तौर पर मिसालों में. अच्छे राजनीतिज्ञों के जिक्र में सर्वकालिक उदाहरण बन कर. उ



भारतीय राजनीति के महामना

मनोज कुमार

अटलजी देह से गये हैं लेकिन अपने पीछे इतना कुछ दे गए हैं जिसकी व्याख्या करना सम्भव नहीं है. एक राजनेता के रूप में सम्मान, समन्वय और सत्ता के लिए समझौते के खिलाफ रहने की सीख देते हैं तो इससे आगे बढ़कर मनुष्य के दुख को खुद में समेट कर मनुष्य होने का परिचय देते हैं. संवेदनशील मन का यह महामना अपनी कविता में हर बार एक नई दुनिया की रचना करते दिखते थे. राजनीति और राजनैतिक दोनों ही मार्ग पर वे हमेशा सामयिक बने रहेंगे क्योकि नीति और नैतिकता के शीर्ष पर एक नाम अटलजी का होगा. अटलजी का स्मरण औपचारिक ना होकर बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलने का प्रण आम और खास, सत्ता और समाज ले तभी उनकी सार्थकता होगी. वे हमारे बीच थे, हैं और हमेशा रहें



स्वतंत्रता का अर्थ स्वछंदता नहीं, अनुशासन है...

सुरेश हिन्दुस्तानी

अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति का दिवस है, 15 अगस्त. इस दिन से भारत ने खुली हवा में सांस लेना प्रारंभ किया. उस समय चारों तरफ प्रसन्नता दिखाई दी, लेकिन वर्तमान वातावरण को देखकर ऐसा लग रहा है कि हम स्वतंत्रता के वास्तविक मायनों को विस्मृत कर चुके हैं, आजादी का मतलब हमने मनमानी स्वच्छंदता मान लिया है. सच तो यह है कि आजादी के बाद हमारी स्वच्छंदता देशानुरुप होना चाहिए, लेकिन क्या आज के परिवेश को देखकर कोई यह कह सकता है कि स्वतंत्रता मिलने के बाद हमारा व्यवहार देशानुरुप रहा, कदाचित नहीं.

हम जानते हैं कि भारत सदैव से ही सांस्कृतिक संहिता का परिपालन करने वाला राष्ट्र रहा है. विश्व के देशों की भले ही राष्ट्रीय संहिताए



आजादी के साहित्यकार बाँकुरे 

संगीता पांडेय

आजादी के 71  वे वर्ष में हम पहुँच गए हैं. इन वर्षों में भारत ने कई सारे उतार चढ़ाव देखे किन्तु सबकी जमीन तो तैयार की आजादी के रणबांकुरों ने. इन बांकुरो में साहित्यकारों की भी अपनी  विशेष भूमिका थी जिन्होंने अंग्रेजों की चूले हिला दी थी.  ये अफसोसजनक कहा जा सकता है कि आज ऐसे साहित्यकारों को बहुत कम याद किया जाता है जिन्होंने अपनी कलम से क्रान्ति का बिगुल फूँका. आजादी के लिए  कुर्बानी में राजनेताओं और शहीदों के साथ-साथ साहित्यकार और पत्रकार भी शामिल  हुए थे जिन्होंने अपनी कलम की ताकत से पूरी ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला कर रख दी थी. इन साहित्यकारों और पत्रकारों में कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने देश के लिए कुर्



सोमनाथ चटर्जी:एक वामपंथी अध्याय का अंत

सुरेश हिन्दुस्तानी

विरले ही ऐसे राजनेता होते हैं जो अपने जीवनकाल में राजनीति के स्वर्णिम अध्याय के रुप में स्थापित हो जाते हैं. ऐसे ही राजनेता के रुप में हम सोमनाथ चटर्जी को स्मरण करें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. सोमनाथ चटर्जी वास्तव में वामपंथी राजनीति के स्वर्णिम अध्याय ही थे. उनका अवसान वामपंथी राजनीति के उच्चतम अध्याय का अंत ही माना जाना चाहिए. वामपंथी धारा के होने के कारण वे भले ही आलोचनाओं की परिधि में आते रहे होंगे, लेकिन उनका व्यक्तिगत जीवन इन आलोचनाओं की परिधि से बहुत दूर था. सोमनाथ चटर्जी का पूरा जीवन राजनीतिक सिद्धांतों के अनुरुप ही था, वे किसी से मतभेद तो रख सकते थे, लेकिन मन में किसी भी प्रकार का भेद नहीं पालते थे.&n



विदेशों में ही क्यों बढ़ रही है हिन्दी की ताकत

ललित गर्ग

भारत एक है, संविधान एक है.लोकसभा एक है.सेना एक है.मुद्रा एक है.राष्ट्रीय ध्वज एक है.लेकिन इन सबके अतिरिक्त बहुत कुछ और है जो भी एक होना चाहिए.बात चाहे राष्ट्र भाषा हो या राष्ट्र गान या राष्ट्र गीत- इन सबको भी समूचे राष्ट्र में सम्मान एवं स्वीकार्यता मिलनी चाहिए.राष्ट्र भाषा हिन्दी को आजादी के 72वर्ष बीत जाने पर भी अपने ही देश में घोर उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है, जो राष्ट्रीय शर्म का विषय है, जबकि विश्व में हिन्दी की ताकत बढ़ रही है, जिसका ताजा प्रमाण है कि संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) द्वारा हिन्दी में ट्वीटर सेवा शुरु करना.देश के सम्मान में उस समय और अधिक इजाफा हुआ जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने ट्विटर पर हिंदी में अप



न धरना, न प्रदर्शन? अहिंसक अभियान है-सवर्ण सत्याग्रह!

पलपलइंडिया

न बंद, न धरना और न ही कोई प्रदर्शन? अहिंसक अभियान है- सवर्ण सत्याग्रह! आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए वैचारिक आंदोलन है- सवर्ण सत्याग्रह? और, इसके लिए चाहिए देश के सभी वर्गों, देश के सभी समाजों का समर्थन... सहयोग!

आजादी के बाद जातिगत आरक्षण को आगे बढ़ाने में, जारी रखने में सामान्य वर्ग के नेताओं का अमूल्य योगदान रहा है... यह जारी रहना चाहिए, लेकिन इन सत्तर वर्षों में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोग पिछड़ते चले गए? आज उन लोगों को संरक्षण की जरूरत है, और यह संभव है सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण से!

वोटों की राजनीति के चलते भाजपा, कांग्रेस सहि



पुलिसकर्मियों की हत्या महबूबा बोलीं-केन्द्र की ताकत नहीं आ रही काम

BSF जवान की मौत और शव से बर्बरता,भारत लेगा पाक से बदला!

बांदीपोरा में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच फायरिंग, एक आतंकी ढेर

PAK ने BSF जवान को मारने से पहले की थी बर्बरता,कई घंटों तक दी यातनाएं

आतंकियों के निशाने पर पुलिसकर्मी, दी जा रही धमकी नौकरी छोड़ो या मरो

BSF जवान को अगवा कर पाक ने की शव के साथ बर्बरता

सेना ने मेजर लितुल गोगोई को यूनिट से हटाया, होटल में पकड़े गए थे लड़की के साथ

LOC पर तड़के 3 बजे से जबरदस्त गोलीबारी जारी

पूर्व सरपंचों की मांग कठुआ हत्याकांड मामले में करवाई जाये CBI जांच

J&K:पुलवामा में आतंकियों ने किया CRPF कैंप पर ग्रेनेड से हमला

सर्जिकल स्ट्राइक की पूर्व संध्या पर सेनाओं के टॉप कमांडरों को संबोधित करेंगे PM मोदी

कुलगाम में SAF जवान की आतंकियों ने की हत्या

गृह मंत्री ने किया स्मार्ट फेंसिंग का उद्घाटन,पाक सीमा को बताया सबसे खतरनाक

जितेंद्र सिंह:नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी जम्मू पर फैसला थोपने की कर रही हैं कोशिश

जम्मू में बेटे ने बूढ़े पिता की करंट लगाकर की हत्या

17 नवंबर से 9 चरणों में होंगे कश्मीर पंचायत चुनाव,11 दिसंबर को मतगणना

आतंकियों ने कश्मीर में सुरक्षाबल के वाहनों को निशाना बनाकर किया हमला

5 आतंकवादियों के मारे जाने के बाद जम्‍मू-कश्‍मीर में भड़की हिंसा, नागरिक की मौत

एलओसी पर पाक सेना की गोलीबारी में भारतीय सेना का जवान शहीद

श्रीनगर के पम्पोश होटेल में लगी भीषण आग, दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर मौजूद

जम्मू-कश्मीर: कुलगाम में सुरक्षाबलों ने पांच आतंकियों को मार गिराया

कुलगाम में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया, मुठभेड़ जारी

राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार समारोह में शिल्पकारों को किया गया पुरस्कृत

चिनाब नदी में मिनी बस के गिर जाने से 12 लोगों की मौत,10 घायल

पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ रोकने भारत ने LoC पर खड़ी की वर्चुअल फेंसिंग

जम्मू कश्मीरः सोपोर मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने 2 आतंकियों को किया ढेर

टेरर फंडिंग केस: कश्मीरी कारोबारी जहूर अहमद वटाली को जमानत

वैष्णो देवी-कटरा के रास्ते पर आतंकी खतरा, हाई अलर्ट जारी

पाकिस्तान से तस्करी कर श्रीनगर लाई गई 10 करोड़ की हेरोइन जब्त

जम्मू में लाइव टीवी शो के दौरान महिला स्कॉलर की हार्ट अटैक से मौत

J&K: रात 2 बजे सुरक्षाबलों ने शुरू किया सर्च ऑप्रेशन, 2 आतंकी ढेर

कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर भारी भूस्खलन, जम्मू-श्रीनगर मार्ग बंद

कश्मीर घाटी में भारत बंद का मिला-जुला असर

जम्मू-कश्मीर में सेना ने घुसपैठ कर रहे तीन आतंकियों को किया गिरफ्तार

श्रीनगर में अज्ञात बंदूकधारियों ने आतंकवादी को मार गिराया

जम्मू-कश्मीर में अज्ञात बंदूकधारियों ने हुर्रियत कार्यकर्ता की गोली मारकर की हत्या

कठुआ में अवैध अनाथ आश्रम से छुड़ाए गए 20 बच्चे, पादरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप

J&K:अनंतनाग में पुलिस की पिकेट पर हमला, 1 लश्कर आतंकी ढेर

कश्मीर में बीडीओ कार्यालय में लगी आग, महत्वपूर्ण दस्तावेज जले

दिलबाग सिंह बने जम्मू-कश्मीर के डीजीपी, वैद्य का हुआ तबादला

शांति के लिए कश्मीर मुद्दे का समाधान निकालना अनिवार्य: इमरान खान

पुलवामा में मुठभेड़, उत्तर प्रदेश के एक मजदूर की मौत

सौतेली मां की करतूत: बेटी से रेप करवा निकाल ली आंखें

सोपोर में आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर किया ग्रेनेड हमला, 4 जवान जख्मी

MBA पास युवक बना आतंकी, AK-47 सहित फोटो हुआ वायरल

कश्मीर पुलिस के मन में खौफ पैदा करने में आतंकी हो रहे सफल!

आर्टिकल 35A: फारूक अब्दुल्ला ने की ASG के रूख की आलोचना

पुलवामा में सुरक्षाबलों ने शुरू किया व्यापक तलाशी अभियान

खुफिया सूचना मिलने पर सुरक्षा बलों ने आतंकियों का घेरा,गोलीबारी जारी

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की धमकी के बाद 3 SPO ने छोड़ी नौकरी

आतंकी और फोर्स एक-दूसरे के परिवारवालों को प्रताड़ित कर रहे हैं: महबूबा

अलगाववादियों के बंद से घाटी में जनजीवन प्रभावित

SC में टली आर्टिकल 35-A की सुनवाई, अब होगी जनवरी 2019 में

सुरक्षाबलों ने दिए बड़ी कार्रवाई के संकेत, जारी की मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची

सुरक्षा कारणों से कश्मीर में आज भी स्थगित रहेगी ट्रेन सेवा

बौखलाए आतंकियों ने पुलिसकर्मियों के 9 परिजनों को किया अगवा

भूस्खलन से श्रीनगर-जम्मू हाईवे फिर बंद, सैकड़ों वाहन फंसे

सुरक्षाबलों ने 9 संदिग्धों को गिरफ्तार कर किया 3 आतंकी मॉड्यूल्स का पर्दाफाश

NIA की गिरफ्त में, हिज्बुल चीफ सैयद सलाउद्दीन का बेटा शकील अहमद

कश्मीर में अलगाववादियों ने किया हड़ताल का आह्वान,सुरक्षा कारणों से ट्रेन सेवा स्थगित

बांदीपोरा में सुरक्षाबलों व आतंकियों के बीच जारी मुठभेड़ में 1 आतंकी ढेर

LoC के नजदीक देखा गया पाकिस्तानी लड़ाकू विमान,दहशत में लोग

पुलिसकर्मियों की हत्या से पहले आंतकी नायकू ने जारी किया था ऑडियो क्लिप



कश्यपमर कश्मीर और वराहमूला है बारामूला


पहले सीमा पर फायरिंग, फिर पहुंचा सुरक्षा परिषद के सदस्यों के पास पाकिस्तान


कश्मीर में बकरीद के लिए खरीदारी चरम पर


एमपी विजेंद्र सिंगल ने मां के चरणों में लगाई हाजरी


डोडा मे फटा बादल


भारत, पाकिस्तान के बीच दोस्ती का पुल बने कश्मीर : महबूबा


श्रीनगर: अदालत के बाहर आतंकी हमला


सरकार की कथित आपराधिक लापरवाही के खिलाफ पी.डी.पी. उतरी सडक़ों पर


दशर्नो के लिए हर रोज तीस हजार से भी अधिक श्रद्वालु धर्मनगरी मे


मुठभेड़ में एक आतंकवादी मारा गया


रक्त दान से किसी की जान बचाई जा सकती है


मोसम खराव रहने के वाद शनिवार को धर्मनगरी सहित भवन मार्ग पर मोसम वडा सुहावना


पैंथल मे मंकर संक्रति के दिन 114वा विशाल दंगल


रघुनाथ मंदिर केे परिस्पर मे कटडा वासियो की वैठक मुल्खराज पुरोहित की अध्यष्ता


महिला मोर्च द्वारा एक कार्यक्रम आयोजित किया गया


ग्रेनेड ब्लास्ट में एक बच्चे की मौत, दो घायल


के.जी.एच.ई.पी. के आसपास नागरिकों की आवाजाही पर प्रतिबंध


सीवल डिफैंस की वैठक का आयोजन


अमित कुमार ने एस.एस.पी. श्रीनगर का कार्यभार संभाला


जनता लोकतांत्रिक प्रतिद्वंद्दिता का महत्व समझने लगी है: महबूबा, सीमांत क्षेत्रों के हित पीडीपी के अति महत्वपूर्ण


मतदाताओं को करें जागरूक


मां वैष्णो देवी जी के भवन पर श्रद्धालु घायल


राहत काजमी की फिल्म आइडेंटिटी कार्ड की पूरी शूटिंग कश्मीर में हुई


कश्मीर में कड़ाके की ठंडए लेह में पारा 11 डिग्री


जम्मू कश्मीर रणजी को 20 लाख पुरस्कार