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क्या राष्ट्रपति चुनाव के बाद शुरू होगा अगला राजनीतिक अध्याय?

प्रदीप द्विवेदी

राष्ट्रपति चुनाव के लिए रामनाथ कोविंद के नामांकन भरने के साथ ही उन सारी चर्चाओं पर विराम लग गया जिनमें अनुमान लगाया जा रहा था कि शायद भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी आदि में से किसी को यह सम्मान प्राप्त हो सकता है. राजनीतिक समय हाथ से निकल चुका है और भाजपा के नए सारथियों ने साफ कर दिया है कि उनकी सोच और दिशा क्या हैं? नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने खामोशी ओढ़ रखी है, हालांकि शत्रुघ्र सिन्हा जैसे समर्थकों ने जोरशोर से उनके नाम को आगे भी बढ़ाया था लेकिन राजनीति बड़ी क्रूर होती है. उगते सूर्य के सामने ही योग करती है... शेष का तो राजयोग भाग्य के भ



नजरिया:राष्ट्रपति के चुनाव के बाद बदलेंगी बिहार की राजनीतिक समीकरणें?

अभिमनोज

राष्ट्रपति पद के लिए भाजपा उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को गैरभाजपाई दलों का समर्थन लगातार मिल रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रामनाथ कोविंद के नाम पर पहले ही व्यक्तिगत खुशी जाहिर कर दी थी, और अब... जद (यू) विधायक रत्नेश सदा ने पटना में संवाददाताओं से कहा कि जद (यू) राष्ट्रपति चुनाव में रामनाथ कोविंद का समर्थन करेगा! उन्होंने दावा किया कि पार्टी के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने भी अपनी मंशा पहले ही व्यक्त कर दी थी। रत्नेश ने कहा कि... बिहार का कोई राज्यपाल पहली बार राष्ट्रपति बनने जा रहा है, ऐसे में... यह हमारे लिए गर्व की बात है और हम रामनाथ कोविंद के साथ हैं! 
याद रहे, नीतीश कुमार ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपत



कोविद को नीतीश के समर्थन से विपक्ष मौन

सुरेश हिन्दुस्थानी

देश के सबसे बड़े पद राष्ट्रपति के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के वर्तमान राज्यपाल रामनाथ कोविद का नाम आगे करके एक प्रकार से झूठ पर आधारित राजनीति करने वाले राजनीतिक दलों के मुंह बंद कर दिए हैं. हालांकि राजग की ओर से रामनाथ कोविंद का नाम तय करने के बाद विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से विरोधी बयान आना स्वाभाविक ही था. लेकिन जैसे जैसे समय निकल रहा है, स्थितियां राजग के अनुकूल होती जा रही हैं. विपक्ष की ओर से एक स्वर ऐसा भी सुनाई दिया कि रामनाथ कोविद को जानता ही कौन है? ऐसा कहने वालों की बुद्धि पर तरस आता है. क्योंकि जो व्यक्ति लम्बे समय से भारतीय राजनीति में सक्रिय रहा हो और जो राजनीतिक दृष्टि से प्रभावी बिहार जैस



आडवाणी के अधूरे सपने

रवि श्रीवास्तव

इस भीषण गर्मी में राजनीति की भी लू चल रही है. देश में राष्ट्रपति पद का चुनाव होने वाला है. एनडीए ने राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार घोषित कर दिया है.
 एनडीए के उम्मीदवार घोषित करने के बाद सोशल मीडिया पर बहस का दौर शुरू हो गया. लालकृष्ण आडवाणी को एक बार फिर बीजेपी ने दरकिनार कर दिया है. आडवाणी जी से हमदर्दी रखने वाले अपना पूरा विरोध सोशल मीडिया पर जता रहे हैं. 
इस विरोध में बीजेपी कार्यकर्ता भी दो खेमें बटते नज़र आए हैं. बीजेपी सासंद शत्रुघन सिंहा ने आडवाणी को राष्ट्रपति के लिए बेहतर विकल्प बताया है. लालकृष्ण आडवाणी को राष्ट्रपति पद के लिए रेस में माना जा रहा था. 
आडवाणी का सपना पहले पी



किसानों के कंधों पर राजनीति?

प्रदीप द्विवेदी

किसानों की समस्याओं में राजनीतिक दलों की महज इतनी दिलचस्पी है कि किसानों के कंधों पर अपनी राजनीति किस तरह से आगे बढ़ाई जाए? जहां कोई दल सत्ता में है तो वह किसानों को अपने साथ बांधे रखने के लिए, किसानों के लिए योजनाएं जैसी गलियां तलाशता नजर आता है तो जो सत्ता विरोधी खेमे में बैठा है वह किसानों को अपनी ओर करने के लिए कर्जमाफी जैसी चुनौती उछाल रहा है. किसानों में भी एक क्रीमी लेयर तैयार हो गई है जो वास्तविक परेशान किसानों की आड़ में अपने हित साध रही है. लंबे समय से खराब फसल के मुआवजे से लेकर कर्ज लेने और कर्जमाफी तक के फायदे तक इस क्रीमी लेयर ने जम कर उठाए हैं! छोटे किसान तो इज्जत की खातिर अपने लोन समय पर चुकता कर देते



राष्ट्रपति विद्वत या दलित!

डॉ भूपेन्द्र गौतम

राष्ट्रपति देश की शान, सम्मान, स्वाभिमान के प्रतीक होते हैं .प्रणव मुखर्जी के बाद लगभग तय है कि रामनाथ कोविंद अगले राष्ट्रपति होंगे .भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी घोषित कर समर्थक तथा विपक्षी   दलों को सूचित कर दिया है . वोटों का गणित उनकी ओर है .

श्री कोविंद शालीन व्यक्ति माने जाते हैं. राष्ट्रपति पद के लिए सर्वथा योग्य हैं .वकील होने से कानून के जानकार हैं .उच्च तथा सर्वोच्च न्यायालय में वकालत कर चुके हैं .केन्द्र सरकार के काउंसिल रहे हैं .संसदीय प्रणाली और परम्परा से वाकिफ हैं .दो बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं .सम्प्रति वे बिहार जैसे बड़े राज्य के राज्यपाल हैं .प्रशासन में कुशलता हासिल है .इन सब



नजरिया : आप से दूर होता विश्वास!

अभिमनोज

आप का कुमार से लगातार विश्वास उठता जा रहा है तो उधर कुमार का विश्वास भी आप के बड़े नेताओं पर डगमगा रहा है... ऊपर से वैचारिक मतभेद और अंदर से बढ़ता मनभेद आप को किस मोड़ पर ले जा कर खड़ा करेगा यह अभी कहना जल्दीबाजी होगी!  राजनीतिक जानकार... दिल्ली सरकार के मंत्री रहे कपिल मिश्र के बाद अब आप के प्रमुख नेता माने जाने वाले कुमार विश्वास की आप से जल्दी ही विदाई तय मान रहे हैं. कुमार विरोधियों की कोशिश यही है कि विश्वास को अविश्वास के कटघरे में इस तरह खड़ा कर दिया जाए कि वे स्वयं आप को छोड़ दें... इसी के मद्देनजर कुमार पर प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष उकसानेवाले राजनीतिक हमले शुरू हो गए हैं... दिलीप पांडेय का कुमार से प्रत्यक्ष ससम्



युवापीढ़ी की निराशा बहुत घातक हो सकती है!

ललित गर्ग

देश की अर्थव्यवस्था भले ही कई देशों के मुकाबले दोगुनी वृद्धि कर रही हो लेकिन युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने के मामले में देश पिछड़ रहा है.रोजगार एवं उद्यम के मोर्चें पर युवा सपनों का बिखरना देश के लिये एक गंभीर चुनौती है.हमें गंभीरता से विचार करना चाहिए कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां हैं, जो इस पीढ़ी की तरुणाई को मूच्र्छित कर रही है, निराशा का वातावरण निर्मित कर रही है.एक सबल एवं सशक्त राष्ट्र की बुनियाद ही हिलती हुई दिखाई दे रही है.जबकि सरकार ने रोजगार सृजन के लिए मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया जैसे कई कार्यक्रम चला रखे हैं.कहीं ऐसा तो नहीं कि अन्य सरकारी योजनाओं की तरह ये योजनाएं भी कोरा दिखावा है.युवापीढ़ी रा



मर जवान! मर किसान! और अब मर नौजवान!

बरुण कुमार सिंह

भारतीय जनता पार्टी ने 16 मई 2014 को दिन तीन साल पहले लोक सभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया था। जिसने बड़े-बड़े राजनीतिक पंडितों को चैंका दिया। यह तो सब मानते थे कि बीजेपी को बढ़त हासिल है, पर वह इतनी अधिक सीटें ले आएगी और कांग्रेस 50 की सीमा भी नहीं छू पाएगी, इसकी शायद ही किसी ने कल्पना की थी। पिछले तीन दशकों के उपरांत किसी पार्टी को देश में पूर्ण बहुमत मिला था। इस प्रचंड जीत के बाद नरेंद्र मोदी 26 मई 2014 को शपथ ग्रहण कर देश के प्रधानमंत्री बने। आज भी पूरे जोश-खरोश के साथ अपने काम पर डटे हैं। चुनाव से पहले भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर नरेंद्र मोदी ने जनता से जो वादे किए थे, उनकी वजह से उनसे लोगों की उम्मीदें बहुत बढ़ ग



 चुनाव जीतना है तो कर्ज माफ करो

डॉ भूपेन्द्र गौतम

 उत्तर प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र में भी किसानों के कर्जमाफी की घोषणा हो गयी है। किसानों को फसलों के लिए दस-दस हजार रुपए  देने की सहायता देने भी निर्णय किया गया है।  कर्जमाफी की यह आग तेजी से अन्य प्रदेशों में फैलती जा रही है। मध्य प्रदेश में इस आग से हुए किसान झुलस कर अपनी जान गवां चुके हैं। प्रदेश में शांति बहाली के लिये मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक दिन का उपवास करना पड़ा।
    कर्जमाफी एक तरह से चुनाव जीतने का सबसे सशक्त तरीका बनता जा रहा है। वैसे देखा जाय तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित पूरी सरकार कर्जमाफी की घोषणा के पश्चात् किं-किंचित विभूष्ता की हालत में है। क्या करें, कैसे करें की



कांग्रेस: विनाश काले विपरीत बुद्धि

सुरेश हिन्दुस्थानी

‘अच्छे को बुरा साबित करना, दुनिया की पुरानी आदत है’ वर्तमान राजनीतिक वातावरण को देखते हुए यह आसानी से कहा जा सकता है कि आज यह गाना कांग्रेस  के लिए सटीक लग रहा है। कांग्रेस  के नेता संदीप दीक्षित ने सेना प्रमुख के बारे में जिस प्रकार की टिप्पणी की है, उससे ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस  जिस प्रकार से विनाश की ओर कदम बढ़ा रही है, उसी प्रकार उसके नेताओं की बुद्धि भी विपरीत होती जा रही है। देश में जो अच्छा हो रहा है, उसे गलत ठहराने की कांगे्रस में परम्परा सी बनती जा रही है। 
कांग्रेस  ने हिन्दुओं के लिए मां का दर्जा रखने वाली गौमाता को सरेआम काटकर उसका राक्षसी रुप से भक्षण किया और आज कांग्रेस  के



केन्द्र सरकार: सैद्धान्तिक सफलता,प्रायोगिक प्रश्रचिन्ह!

प्रदीप द्विवेदी

 केन्द्र में पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीन साल हो चुके हैं. इन तीन सालों में अपने इरादों के दम पर भाजपा ने सैद्धान्तिक सफलता तो प्राप्त कर ली है लेकिन प्रायोगिक मोर्चे पर अभी प्रश्रचिन्ह लगा हुआ है... नोटबंदी जैसे निर्णय में जनता सैद्धान्तिकरूप से सरकार के समर्थन में रही लेकिन प्रायोगिक परिणाम नजर नहीं आ रहा... कश्मीर मुद्दे पर केन्द्र सरकार के सैद्धान्तिक इरादों पर शक नहीं लेकिन सख्त कदम पर सुस्ती समझ से परे है. लाल बत्ती हटाने जैसे निर्णय से इसके प्रभाव का गलत इस्तेमाल करनेवालों को जरूर परेशानी हो रही है लेकिन इससे जनता को कोई बड़ा और सीधा फायदा महसूस नहीं हो रहा है!
जनता की सीधी जरूरतें अच्छे द



शिक्षा से जुड़े सवालों का अनुत्तरित होना 

ललित गर्ग

दुनिया के परिदृश्य में भारत में जिस रफ्तार से प्रगति हो रही है, चाहे वह आर्थिक हो, सांस्कृतिक हो, वैज्ञानिक हो, कृषि की हो, तकनीक की हो, उस अनुपात में देश में शिक्षा की अपेक्षित प्रगति आजादी के 70 वर्ष बाद भी हासिल न होना शोचनीय है। नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने तब से एक नये युग के आरंभ की बात कही जा रही है। न जाने कितनी आशाएं, उम्मीदें और विकास की कल्पनाएं संजोयी गयी हंै और उन पर न केवल देशवासियों की बल्कि समूचे विश्व की निगाहें टिकी हुई है। लेकिन शिक्षा की धीमी गति एवं शिक्षा के प्रति सरकार की ढुलमुल नीति विडम्बनापूर्ण स्थिति को दर्शाती है। शिक्षा की उपेक्षा करके कहीं हम विकास का सही अर्थ ही न खो दे। ऐसा



बेआबरू क्या बैरंग हो के निकले..

प्रभा जैन

सूरत के कपडा व्यापारियों की हालत तो ऐसे दिख रही हे जैसे न उगलते बनता है ,न ही निगलते .देश का कपडा व्यापारी पेट पर लात पड़ने से बौखलाया हुआ है. उसका बौखलाना जायज भी है .आगे भी ऐसे ही हालत रहने वाले है.सूरत के सामने जो खुद को बौना समझते थे वे भी खुल कर जीएसटी के विरुद्ध अपना विरोध जाहिर कर चुके हैं.बंद और आंदोलन की घोषणा से सूरत का कपडा बाजार सकते में है . अमूमन वे सोच भी रहे है की क्या विरोध कर लेने से हड़ताल कर लेने से रिजल्ट उनके फेवर में ही होगा ऐसा संभव हो भी और नहीं भी.जहां सूरत को देश के कपडा मंडी की बड़ी ताकत मानते है .उनका मार्गदर्शन करना तो दूर वे  खुद भी उसका अनुसरण भी नहीं कर पाए है . 

मीडिया प



अन्नदाता आखिर कब तक केवल मतदाता बना रहेगा 

डॉ. नीलम महेंद्र

चाहे तमिलनाडु हो आन्ध्रप्रदेश हो महाराष्ट्र हो या फिर अब मध्यप्रदेश पूरे देश की पेट की भूख मिटाने वाला हमारे देश का किसान आज आजादी के 70 साल बाद भी खुद भूख से लाचार क्यों है?
इतना बेबस क्यों है कि आत्महत्या करने के लिए मजबूर है?
और जब हमारे देश का यही अन्नदाता अपनी ही सरकार से अपनी माँगो को मनवाने के लिए पाँच दिन से शांतिपूर्ण आन्दोलन कर रहा था तो छटे दिन अचानक क्यों वो उन आतंकवादियों से भी खतरनाक हो गया जिन पर पैलेट गन के उपयोग से भी मानवाधिकारों के हनन की बातें उठती हैं, लेकिन किसानों पर काबू पाने के लिए गोलियों का सहारा ले लिया गया और किसके आदेश पर?
और उससे भी शर्मनाक यह कि सरकार न तो किसानों की तकलीफ समझ



बिहार में विकास कम, राजनीति ज्यादा

नवीन कुमार

बिहार आज भी अपनी नियति पर रो रहा है। विकास की जमीन पर यह राज्य अब भी रेंगता हुआ दिख रहा है। युवाओं को अपनी तकदीर बनाने के लिए पलायन करके दूसरे प्रदेशों की मिट्टी का सहारा लेना पड़ रहा है। वह प्रदेश हमेशा गरीब रहता है जहां के युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता है। अफसोस, इन सबसे बिहार के राजनेताओं को कोई सरोकार नहीं है। करोड़ों रूपए के चारा घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है और भाजपा इस पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हुए अगले चुनाव में पहलवान बनने के लिए ताल ठोंक रही है। इस समय बिहार में राजनीतिक उथल-पुथल भी मची हुई है। इससे आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

चारा घोटाले मामले में अदालत के पहले के निर्णय



सरकार की भूल का बड़ा खामियाजा

डॉ भूपेन्द्र गौतम

मध्यप्रदेश के मंदसौर में फायरिंग से छह किसानों की दर्दनाक मौत और अनेक किसानों के घायल होने के बाद सरकार ने अपील जारी की है। इसमें मुख्यमंत्री की ओर से कहा गया है कि मध्यप्रदेश में किसानों की सरकार है। हमारी सरकार किसानों के हित में सदैव कार्य कर रही है। अपील में आगे कहा गया है कि पिछले दो दिन में आपसे (किसानों से ) हुई चर्चानुसार आपकी मांगों को स्वीकृत करने के आदेश जारी कर दिये गये हैं। 
    सही है। किसानों की प्याज, दाल आदि अच्छे दामों पर खरीदने का निर्णय लिया गया। यह निर्णय आंदोलनकारी किसानों के साथ वार्ता कर लिये जाते तो संभव है किसान मान जाते। हड़ताल खत्म हो जाती। किसान बे-मौत मारे नहीं जाते। वार्ता



बिहार: अंधे कुएं में शिक्षा

नवीन कुमार

बिहार में बारहवीं की परीक्षा में 65 फीसदी छात्रों के फेल हो जाने से यहां की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यह सवाल करना लाजिमी है कि क्या बिहार में अंधे कुएं में शिक्षा मिल रही है? बिहार में शिक्षा में इतनी गिरावट क्यों आ गई है? क्या बिहार के छात्र सिर्फ चोरी से ही पास करते हैं? बिहार के युवाओं का भविष्य क्या होगा? इतने सारे सवाल सिर्फ सवाल करने के लिए नहीं हैं बल्कि बिहार की शिक्षा और युवाओं को लेकर चिंता है। बिहार और बिहार की शिक्षा कई मायनों में पहले से ही बदनाम है। बिहार से बाहर प्रतिभाशाली बिहारी युवाओँ को भी शक की निगाह से देखा जाता है और मजाक के तौर पर उनसे पूछ भी लिया जाता है कि डिग्री फर्जी तो नहीं है? य



दिवस विशेष: पर्यावरण और विकास

अरुण तिवारी

पर्यावरणीय समृद्धि की चाहत, जीवन का विकास करती है, विकास की चाहत, सभ्यताओं का। सभ्यता को अग्रणी बनाना है, तो विकास कीजिए। जीवन का विकास करना है, तो पर्यावरण को समृद्ध रखिए। स्पष्ट है कि पर्यावरण और विकास, एक-दूसरे का पूरक होकर ही इंसान की सहायता कर सकते हैं; बावजूद इस सच के आज पर्यावरण और विकास की चाहत रखने वालों ने एक-दूसरे को परस्पर विरोधी मान लिया है।। पर्यावरण सुरक्षा की मुहिम चलाने वाले ऐसे कई संगठनों को विकास में अवरोध उत्पन्न करने के दोषी घोषित किया जाता रहा है। दूसरी ओर, पर्यावरण के मोर्चे पर चुनौतियां ही चुनौतियां हैं। जिनका जवाब बनने की कोशिश कम, सवाल उठाने की कोशिशें ज्यादा हो रही हैं। ऐसा क्यों ?



जिम्मेदारी का घड़ा और स्वच्छता की पहल

मनोज कुमार

गर्मी की तपन बढऩे के साथ ही अनुपम मिश्र की याद आ गयी. उनके लिखे को एक बार फिर पढऩे का मन किया. उनको पढ़ते हुए मन में बार बार यह खयाल आता कि वे कितनी दूर की सोचते थे. एक हम हैं कि कल की भी सोच पाने में समर्थ नहीं है. तालाब आज भी खरे हैं, को पढ़ते हुए लगता है कि जिस राजधानी भोपाल में मैं रहता हूं, वह तो ताल और तलैया की नगरी है. इससे छलकता पानी बरबस हमें सम्मोहित कर लेता है लेकिन 25-30 किलोमीटर दूर चले जाने पर वही भयावह सूखा दिखता है. गर्मी की तपन के साथ ही सबसे पहले गले को चाहिए ठंडा पानी लेकिन जब मैंने पानी बचाया ही नहीं तो मुझे पानी मिलेगा कहां से? यह सोचते हुए मन घबरा जाता है. सोचता हूं कि मेरे जैसे और भी लोग होंगे. प्यासे और पसी



पेरिस समझौता:ट्रंप की चिंता पर भारी भारतीय चिंतन

गिरीश बिल्लोरे “मुकुल”

ट्रंप की वक्रोक्ति आनी तय  थी पर्यावरण के मसले पर विकसित देशों को दीनो-ईमान के पासंग पर रखा जाना अब तो बहुत मुश्किल है. स्मरण हो कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर  30 नवंबर से 12 दिसंबर 2015.को एक महाविमर्श का आयोजन हुआ था.  उद्देश्य था ग्लोबल वार्मिंग के लिए उत्तरदायी कार्बन डाई आक्साइड गैस के विस्तार  को रोका जावे. समझौता भी ऐतिहासिक ही कहा जा सकता है . 2050 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 40 और 70 प्रतिशत के बीच कम किया जाने की और 2100 में शून्य के स्तर तक लाने के उद्देश्य की पूर्ती के लिए तक 2.7 डिग्री सेल्सियस तक ग्लोबल वार्मिंग में कमी लाने का लक्ष्य नियत करना भी दूसरा वैश्विक  कल्याण का संकल्प है. इस समझौते का मूलाधार रहा ह



विरोध का गिरता स्तर गोवध

डॉ. नीलम महेंद्र

किसी भी राज्य या फिर राष्ट्र की उन्नति अथवा अवनति में राजनीति की एक अहम भूमिका होती है।
मजबूत विपक्ष एवं सकारात्मक विरोध की राजनीति  विकास के लिए आवश्यक भी हैं लेकिन केवल विरोध करने के लिए विरोध एवं नफरत की राजनीति जो हमारे देश में आज कुछ लोग कर रहे हैं काश वो एक पल रुक कर सोच तो लेते कि इससे न तो देश का भला होगा और न ही स्वयं उनका।
मोदी ने जिस प्रकार देश की नब्ज अपने हाथ में पकड़ ली है उससे हताश विपक्ष आज एक दूसरे के हाथ पकड़ कर सब मिलकर भी अति उतावलेपन में केवल स्वयं अपना ही नुकसान कर रहे हैं। अपने ही  तरकश से निकलने वाले तीरों से खुद को ही घायल कर रहे हैं।
जिस निर्लज्जता के साथ यूथ काँग्रेस के कार्



विश्व तंबाकू निषेध दिवस:संकल्प ही विकल्प!

अरुण तिवारी

तंबाकू नशा है और इसे इस्तेमाल करने वाले - नशेड़ी ! संभव है यह संबोधन तंबाकू खाने वालों को बुरा लगे, लेकिन समय का सच यही है और विश्व तंबाकू निषेध दिवस की चेतावनी भी। भारत में जितनी भी चीजें नशे के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं, मात्रा के पैमाने पर इनमें तंबाकू का नंबर सबसे आगे है। 27 करोङ, 50 लाख तंबाकू उपभोक्ताओं के साथ भारत नंबर दो देश है। चीन का स्थान पहला है। 505 वर्ष पहले जब पुतर्गाली तंबाकू नाम का यह नशा लेकर हिंदुस्तान आये होेंगे, तब उन्होने यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन भारत.. अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बङा तंबाकू उत्पादक देश बन जायेगा। आंध्र प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, बिहार और महाराष्ट्र भ



नजरिया : आप के दुश्मन आप?

अभिमनोज

आप को अचानक दुर्लभ जनसमर्थन मिला और दिल्ली विधान सभा चुनाव में चमत्कारी जीत दर्ज करा के सबको आश्चर्यचकित कर दिया, लेकिन... इसके बाद दिशाहीन हो गई आप, अपनी ही दुश्मन बन गई! पहले जनविश्वास गंवाया और अब आप के ही साथी सीएम अरविंद केजरीवाल के खिलाफ होते जा रहे हैं!

दरअसल, अरविंद केजरीवाल हर असफलता के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाते रहे हैं और यही सच्चेझूठे आरोप आप को कमजोर करते गए. जनता को इस बात से कोई मतलब नहीं है कि किस काम के  नहीं होने के पीछे क्या कारण रहे हैं... जनता को तो इससे मतलब है कि काम हुआ कि नहीं? जनता को लगने लगा है कि उनके सपने साकार करने में आप सक्षम नहीं हैं!

हो सकता है कि अरविंद केजरीवाल के



ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म

मनोज कुमार

‘ठोंक दो’ पत्रकारिता का ध्येय वाक्य रहा है और आज मीडिया के दौर में ‘काम लगा दो’ ध्येय वाक्य बन चुका है। ध्येयनिष्ठ पत्रकारिता से टारगेटेड जर्नलिज्म का यह बदला हुआ स्वरूप हम देख रहे हैं। कदाचित पत्रकारिता से परे हटकर हम प्रोफेशन की तरफ आगे बढ़ चुके हैं जहां उद्देश्य तय है, ध्येय तो गुमनाम हो चुका है। इस बदलाव का परिणाम है कि हम अपने ही देश मेें अभिव्यक्ति की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हम भूल जाते हैं कि पराधीन भारत में हमें अभिव्यक्ति  की स्वतंत्रता गोरे शासकों ने नहीं दी थी और उनसे जो बन पड़ा, वह हम पर नियंत्रण करने की कोशिश करते रहे लेकिन पत्रकारिता के हमारे पुरोधाओं ने उनकी परवाह किए बिना ‘ठो



प्रधान सेवक के 3 साल

हेमेन्द्र क्षीरसागर

बधाई हो! 2014 में दिल से चुनी गई मोदी सरकार के 3 साल पूरे हो गए। पहली बार ऐसा हुआ कि, प्रधानमंत्री बनाने के लिए सरकार चुनी गई। सरकार के सरदार बने बचपन में चाय बेचने वाले नरेन्द्र मोदी। पर हुआ क्यां देश  का मुखिया बनते ही इन्होंने अपनी भारतीय जनता पार्टी को मां और संसद को मंदिर कहते हुए सदन के दर पर माथा टेका। इतना ही नहीं लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर देश का प्रधान मंत्री नहीं अपितु प्रधान सेवक के रूप में सापेक्षिक पदनावत् किया। शायद ही देश में ऐसा कभी हुआ होगा जब प्रधानमंत्री ने जनता के साथ इतना करीबी रिश्ता  बनाया हो। इसी रिश्ते  के बलबूते ही प्रधान मंत्री अपनी मन की बात जन के साथ बढी



ज्योतिषी भगवान नहीं है!

प्रदीप द्विवेदी

जैसे शरीर विज्ञान का अच्छा जानकार डॉक्टर हर किसी को पहलवान नहीं बना सकता है वैसे ही ज्योतिष विज्ञान का अच्छा जानकार ज्योतिषी हर किसी को धनवान नहीं बना सकता है! जैसे डॉक्टर रोग समझ, दवाई दे कर रोग में राहत प्रदान कर सकता है वैसे ही ज्योतिषी तारों-सितारों की गणना करके समस्या समाधान में सहायक हो सकता है... जिस तरह कोई भ्रष्ट डॉक्टर अपने ज्ञान का दुरूपयोग करके रोगी को ठग सकता है वैसे ही दुष्ट ज्योतिषी भी अक्सर चमत्कृत लोगों को ठगने में कामयाब रहते हैं. इसलिए अच्छे ज्योतिषों का सम्मान करें, लेकिन याद रखें... ज्योतिषी भगवान नहीं है!
धर्म और ज्योतिष व्यवसाय नहीं हैं... न ये निशुल्क हैं और न ही सशुल्क हैं, ये तो स्वैच्छ



जिम्मेदार चेहरों पर कालिख का लगना

ललित गर्ग

आजकल राष्ट्र में थोड़े-थोड़े अन्तराल के बाद ऐसे-ऐसे घोटाले, काण्ड या भ्रष्टाचार के किस्से उद्घाटित हो रहे हैं कि अन्य सारे समाचार दूसरे नम्बर पर आ जाते हैं. पुरानी कहावत तो यह है कि ”सच जब तक जूतियां पहनता है, झूठ पूरे नगर का चक्कर लगा आता है.“ इसलिए भ्रष्टाचार एवं घोटाले के प्रसंगों को कई बार इस आधार पर गलत होने का अनुमान लगा लिया जाता है. पर हमारे देश में ऐसे मामलें तो सच ही होते हैं, घोटाले झूठे नहीं होते. यह बात अलग है कि इन मामलों को दबाने वाली शक्तियां ज्यादा ताकतवर होती है. सच जब अच्छे काम के साथ बाहर आता है तब गूंँगा होता है और बुरे काम के साथ बाहर आता है तब वह चीखता है. सीबीआई की एक विशेष अदालत ने को



कहीं अपने होने का अर्थ ही न खो दें राहुल गांधी !

निरंजन परिहार

समय आ गया है जब राहुल गांधी कांग्रेस की समान संभाल लें। लेकिन राहुल हैं कि पता नहीं किस दिन का इंतजार कर रहे हैं। वक्त बीता जा रहा है। कुछ समय और निकल गया फिर अगर वे अध्यक्ष बन भी जाएंगे, तो भी इस देश में कोई बहुत बड़ा तूफान खड़ा नहीं होनेवाला। क्योंकि तब तक कांग्रेस के फिर से खड़े होने की क्षमता ही खत्म हो जाएगी।

कांग्रेसी तैयार हैं। कांग्रेस भी तैयार है। लेकिन राहुल गांधी तैयार नहीं लगते। पता नहीं क्यूं। देश में कांग्रेस के लिए सफलता के रास्ते लगातार संकरे होते जा रहा है। हार पर हार हो रही है। निकट भविष्य में भी, कहीं भी जीत का कोई रास्ता बनता नहीं दिख रहा है। ज्यादा सच कहें,तो कांग्रेस के राजनीतिक भवि



पुलिस मुठभेड़ में मारा गया पांच लाख का इनामी अपराधी आनंदपाल

वसुंधरा राजे के आश्वासन के बाद राजस्थान में जाट आंदोलन खत्म

उत्तर प्रदेश पहुंची जाट आंदोलन की आग, आगरा में 9 बसों में हुई तोड़फोड़

जयपुर ट्रैफिक पुलिस के विज्ञापन पर भड़के जसप्रीत बुमराह?

जाट आंदोलन: प्रदर्शनकारियों ने अलवर-मथुरा रेल मार्ग किया ठप

राजस्थान:बीपीएल व एपीएल परिवार को घर के बाहर लिखना पड़ेगा- मैं गरीब परिवार से हूं

राजस्थान: जेल कर्मचारी हड़ताल पर, मैस की बंद

सुप्रीम कोर्ट ने कहा परिवार की खुशियों के लिए महिलाएं देती हैं अपने प्यार की कुर्बानी

शौच करती महिलाअाें की तस्वीरें लेने से रोका, तो पीट-पीट कर मार डाला

जयपुर: जेट एयरवेज के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग, यात्रीयों में हड़कंप

राजस्थान: कारों मे भिड़ंत से लगी भयंकर आग, सवार गायब

राजस्थान में किसानों का महापड़ाव शुरू, 250 पुलिस अधिकारी, 1300 जवान तैनात

हिरण शिकार मामले में 6 जुलाई को कोर्ट में पेश होंगे सलमान खान

बैंक की कुंडली से जान सकेंगे आर्थिक भविष्य!

भारत ने 3 किलोमीटर मार करने वाली 'नाग' मिसाइल का किया परीक्षण

भारी पड़ सकते हैं भ्रामक विज्ञापन!

थानेदार बोला मेरे साथ एंजॉय करो तभी तुम्हारे पति की जमानत होगी

बदइंतजामी: राजस्थान सरकारी अस्पताल में चार दिन के बच्चे की उंगलियां कुतर गए चूहे

राजस्थानः हार्दिक ने फूंका किसान आंदोलन का बिगुल, किसानों ने रोकी दूध-सब्जी की आपूर्ति

इंद्रा बिश्नोई का दावाः आज भी जिंदा है भंवरी देवी

राजस्थान के 7 लाख किसानों को मिलेगा 6 लाख का बीमा

बापू को चतुर बनिया कहने पर अमित शाह के खिलाफ राजनैतिक विवाद शुरु

राज्यस्थान: मंत्री का पेड़ पर चढ़कर मोबाइल पर बात करना आया काम, गांव में पहुंच गया नेटवर्क

घुसपैठ रोकने के लिए सीमाओं को अधिक चाक चौबंद बनाएंगे: राजनाथ

नियमों का उल्लंघन कर निम्बाहेडा से MP सीमा तक बाइक से गए राहुल

सांसें चलने तक पीटते रहे पूरी रात, फिर शव को उल्टा लटकाया

कार पर गिरा नमक से भरा ट्रक, 5 लोगों की मौत

विकास केवल अडाणी-अंबानी का हो रहा, किसान बदहाल हैं: बीजेपी विधायक


ओबीसी का अवधि पूर्ण आरक्षण समाप्त हो अन्यथा सुप्रीम कोर्ट में जायेगा ब्राह्मण फेडरेशन!


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राजस्थान: नेटवर्क से परेशान हुए मंत्री, बात करने के लिए चढ़ गए पेड़ पर


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राजस्‍थान में सड़क हादसा, शीशा तोड़ते हुए सीधे कार में जा घुसा घोड़ा


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भंवरी हत्याकांड मुख्य साजिशकर्ता इंद्रा विश्ननोई मप्र से गिरफ्तार


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राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के नए अध्यक्ष बने सीपी जोशी, ललित मोदी के बेटे को हराया


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राजस्थान: सरकारी गेस्ट हाउसों में अब नेताओं और अधिकारियों को नहीं मिलेगा उधार


  • 190626

राजस्थान: बहन ने करवा दी प्रेम में बाधा बन रहे भाई की हत्या


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राज्यस्थान:बालिका वधु को ससुरालवालों के चंगुल से सहपाठियों ने छुड़ाया


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अभिनव पहल : भृगु संहिता से जान सकेंगे भूत, भविष्य और वर्तमान!


  • 190458

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा, गाय को घोषित करें राष्ट्रीय पशु, गोवध पर हो उम्रकैद


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राजस्थान: नींव की खुदाई में ढहा पड़ोसी का मकान, तीन की मौत


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5 दिनों से जंजीरों में जकड़ा शख्स आजाद, पंचों के खिलाफ मामला


  • 190360

पंचायत का तुगलकी फरमान, पति काे जंजीराें से बांध पत्नी से मरवाए चांटे!


  • 190288

राजस्थान: तिरंगा बने डिब्बे में बेचे जा रहे थे जूते, लोगों ने किया हंगामा


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गोलीबारी अभ्यास के दौरान सीमा सुरक्षा बल के आठ जवान घायल


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प्रधानमंत्री हस्तक्षेप कर आर्थिक आरक्षण पर सर्वदलीय बैठक बुलायें


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राजस्थान: ससुराल वालों से त्रस्त सगी बहनों ने अपने बच्चों के साथ ट्रेन के सामने दे दी जान


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राजस्थान में प्रताप प्रदेश के गठन के लिए आगे आए सरकार!


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राजस्थान: गौरक्षकों ने गोवंश मुक्त कराने के बाद ट्रक में आग लगाई


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मुंबई, कोटा दुनिया के सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाले शहरों में शामिल


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पोखरण पहुंची होवित्जर तोपें, तीन माह तक चलेगा परीक्षण


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आर्थिक आरक्षण पर ब्राह्मण फेडरेशन के नेता जुटेंगे खाटूश्यामजी में


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गैंगरेप के बाद धर्म परिवर्तन का बनाते थे दवाब, वीडियो कर देते थे वायरल


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सुपारी किलर से करवाई दामाद की हत्या, मां-बाप, भाई समेत 5 गिरफ्तार


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राजस्थान: ISI का संदिग्ध एजेंट गिरफ्तार, कई दस्तावेज बरामद


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एसबीसी के लिए लड़ रहे गुर्जरों को ओबीसी से ही करना पड़ेगा संतोष


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