किरण माहेश्वरी. राजस्थान भाजपा की महिला राजनेताओं में वसुंधरा राजे के बाद दूसरी दमदार नेता का नाम था किरण माहेश्वरी.

शुरूआत से ही चुनौती स्वीकारते हुए वह आगे बढ़ी और भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बनी. यही नहीं भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में उन्हें प्रमुख जगह मिली और महासचिव तथा उपाध्यक्ष बनीं. उदयपुर के बाद उन्होंने राजसमंद को अपनी कर्मभूमि बनाया और लगातार तीन बार राज्य विधानसभा के लिए चुनी गई.

महिला राजनेता के साथ वह अपने साथ काम करने वाले लोगों के लिए भी परिवार के सदस्य के रूप में काम करती थी. मुझे याद है कि जब वह उदयपुर नगर परिषद में सभापति थी और जिला महामंत्री विजय प्रकाश विप्लवी की तबियत इतनी खराब हो गई कि उनका उपचार उदयपुर में संभव नहीं था, ऐसे में वह विप्लवी को हवाई जहाज से मुंबई लेकर गई तथा वहां बॉम्बे हॉस्पिटल में उनका उपचार कराया. यही नहीं, वह मुम्बई में तब तक डटी रहीं, जब तक विप्लवी की तबियत ठीक नहीं हुई. इसीलिए वह उनके कार्यकर्ताओं की दीदी बन गई.

भले ही उन्होंने अपना राजनीतिक केंद्र राजसमंद बना लिया लेकिन उदयपुर के कार्यकर्ताओं से हमेशा संपर्क में बनी रही. महीने में एक-दो बार उदयपुर अवश्य आती तथा लोगों से मिलती. जहां तक संभव होता वह हर व्यक्ति का जायज काम समय पर कराने का प्रयास करतीं.

जब वाजपेयी बोले, इतनी देर किसलिए....

किरण माहेश्वरी ने पंद्रहवीं लोकसभा के लिए उदयपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ी. उनका मुकाबला कांग्रेस की दिग्गज नेता डॉ. गिरिजा व्यास से था. तब अटल बिहारी वाजपेयी की सभा चित्तौड़गढ़ में हुई थी और उसमें संभाग की सभीलोकसभा सीटों के भाजपा प्रत्याशी मंच पर मौजूद थे. तब अटल बिहारी वाजपेयी ने किरण माहेश्वरी को कहा कि उन्होंने संसद में आने के लिए इतनी देर क्यों की? वाजपेयी ने माहेश्वरी की लोकप्रियता को भांपते हुए यह कहा था कि उन्हें तो पहले ही संसद में आ जाना चाहिए था.  

चुंगी चोरी पकड़कर हुई चर्चित....

किरण माहेश्वरी जब उदयपुर नगर परिषद (अब नगर निगम) की सभापति थी तब उन्होंने चुंगी चोरी को लेकर जबरदस्त कार्रवाई की. तब चुंगी चोरी के सबसे अधिक मामले पकड़े जाने के चलते वह प्रदेश भर में चर्चित हुई.

धुरविरोधी रहे कटारिया भी बोले किरण मेरी सहयोगी....

भाजपा में मेवाड़ के दिग्गज नेता माने जाने वाले गुलाबचंद कटारिया भले ही यह दावा करें कि किरण माहेश्वरी को वह राजनीति में लाए लेकिन किरण समर्थकों का आज भी कहना है कि उन्होंने अपना वजूद खुद बनाया. किरण माहेश्वरी, कटारिया के लिए खतरा लगी तो उन्होंने उदयपुर से उन्हें दूर करने की कम कोशिश नहीं की. हालांकि, राजसमंद भी उनके लिए घर जैसा बन गया था. किरण माहेश्वरी के निधन पर कटारिया ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि किरण उनकी सहयोगी थी. पार्षद से लेकर विधायक बनाने में उनकी भूमिका रही और उनके चले जाने से भाजपा को ही नहीं, बल्कि निजी तौर पर उनको क्षति हुई है.

दुर्गावाहिनी प्रमुख से विधायक-सांसद और मंत्री तक का सफर....

किरण माहेश्वरी ने साल 1987 में हिन्दू संगठन दुर्गा वाहिनी के प्रमुख के तौर पर राजनीतिक सफर की शुरूआत की. वह इस पद पर 1990 तक रही. जिसके बाद वह दो साल तक वह भाजपा महिला मोर्चा की जिला महामंत्री और अगले दो साल के लिए महिला मोर्चा देहात की जिलाध्यक्ष रही. साल 1994 में उदयपुर नगर परिषद के लिए पहली बार पार्षद का चुनाव लड़ा और सभापति निर्वाचित हुई.

वर्ष 2002 से 2003 तक वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य बनी. साल 2004 में वह पहली बार संसद का चुनाव लड़ी और कांग्रेस की दिग्गज नेता डॉ. गिरिजा व्यास को हराकर उन्होंने सभी को चौंका दिया. जिसके चलते साल 2004 में उन्हें भाजपा राष्ट्रीय महासचिव और 2007 में महिला मोर्चा राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली. संसदीय कार्यकाल पूरा होने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा देते हुए साल 2008 में राजसमंद से विधायक का चुनाव लड़ा तथा तत्कालीन वसुंधरा सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री बनीं.

इसके बाद वह लगातार तीसरी बार राजसमंद से विधायक निर्वाचित हुई. हालांकि इस बीच भाजपा ने उन्हें अजमेर संसदीय सीट से सचिन पायलट के खिलाफ मैदान में उतारा लेकिन वहां उन्हें हार मिली, जो पहली और अंतिम हार रही.

पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी की कोरोना से मौत....

मेवाड़ में भाजपा की दिग्गज नेत्री राजसमंद विधायक एवं पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी (59) का रविवार रात साढ़े बारह बजे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया. वह कोरोना से पीड़ित थी तथा गत 28 अक्टूबर को उनकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी. स्वास्थ्य में सुधार नहीं होने पर सात नवम्बर को उन्हें उदयपुर से एयरलिफ्ट कर मेदांता अस्पताल ले जाया गया था और वह पिछले 22 दिनों से आईसीयू में भर्ती थी.

बताया गया कि सांस में तकलीफ तथा लंग्स में इंफेक्शन के चलते उनकी सांसें थम गई!

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