पमरे में नयी पद्धति से संरक्षा और गति में वृद्धि, 20 गेज फेस लुब्रीकेटर ट्रैक पर लगाये गये

पमरे में नयी पद्धति से संरक्षा और गति में वृद्धि, 20 गेज फेस लुब्रीकेटर ट्रैक पर लगाये गये

प्रेषित समय :19:32:49 PM / Fri, Jun 25th, 2021

जबलपुर. रेल गाडिय़ों के संचालन में रेल ट्रैक और रेल गाड़ी के व्हील में घर्षण एक प्रमुख भूमिका निभाता है. इस घर्षण में रेल संचालन अच्छे से हो उसके लिए गेज फेस लुब्रीकेटर का प्रयोग किया जाता है. दुनिया इस नयी तकनीक का उपयोग कर रही है. इस पद्धति को भारतीय रेल और पमरे में लागू किया गया है. उसमें गेज फेस लुब्रिकेशन कार्य किया जा रहा है. इस पद्धति का उपयोग बहुत घुमावदार ट्रैक, अधिक ढलान वाले सेक्शन एवं घाट सेक्शनों में ज्यादा होता है. पमरे में मुख्यत:  यार्ड, घाट सेक्शन एवं स्टेशनों के पहुँच मार्ग पर किया जा रहा है.

गेज फेस लुब्रीकेटर का उपयोग घाट रेलखंड बुधनी-बरखेड़ा और मेजर यार्ड न्यू कटनी जंक्शन, कटनी एवं कटनी मुड़वारा के रेल ट्रैक के घुमावदार सेक्शनों पर गेज फेस लुब्रिकेटर लगाकर कार्य किया जा रहा है. इस तकनीक में गेज फेस लुब्रिकेशन से ट्रैक और रेल व्हील की घिसाई को कम करते हैं, एवं रेल के सरफेश में खराबी नहीं आती है. जिससे ड्रिलमेन्ट न हो, उच्च घर्षण की बजह से जब ट्रेन बहुत घुमावदार से चलती है तो आवाज न करें. गाड़ी को सरलता से संचालन के लिए तथा बारिश के मौसम में गेज फेस लुब्रिकेटर लगाकर सुगमता लाई जाती हैं.

इसके उपयोग से यह फायदा

- ट्रेनों की संरक्षा बढ़ती है और असामान्य घटना में कमी आती है.
- ट्रेन के लोड को खींचने  में पॉवर कम लगता है.
- उर्जा कर्षण में कमी आती है.
- रेल का घिसाव कम होता है.
- रेल की समय अवधि बढ़ती है एवं रखरखाव में कमी आती है.

इतने गेज फेस लुब्रिकेटर यहां लगे

पश्चिम मध्य रेल में वर्ष 2020-21 में जबलपुर मण्डल में 08, भोपाल मण्डल में 07 एवं कोटा मण्डल में 05 सहित कुल 20 गेज फेस लुब्रिकेटर लगाये गये है. जिसमें भोपाल मण्डल के बुधनी- बरखेड़ा घाट सेक्शन में 06 गेज फेस लुब्रिकेटर लगाया गया है. जबलपुर मण्डल के न्यू कटनी जंक्शन, कटनी मुड़वारा और कटनी के घुमावदार ट्रैक पर गेज फेस लुब्रिकेटर को लगाया गया है. ये नयी तकनीक हाइड्रोलिक पद्धति से काम करता है. जब ट्रेन गुजरती है तो गेज फेस लुब्रिकेटर से ग्रीस निकलता है जिससे कम्पन में कमी एवं आवाज में भी कमी आती है. जिससे ट्रेन को लोड को खींचने में आसानी होती है. इस तकनीक का उपयोग मानसून में ज्यादा फायदेमंद रहता है. इस पद्धति के उपयोग करने से रेल की बचत होगी. इस नयी पद्धति से संरक्षा, मैनपॉवर के उपयोग में कमी आयेगी और गति में वृद्धि होती है. 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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