लखनऊ में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेला में देशभर से लेखक, प्रकाशक और पुस्तक प्रेमी इस मेले में जुटे हुए हैं. यहां का मंच वरिष्ठ साहित्यकारों के उद्बोधन से गुंजायन रहता है. रोजाना पुस्तकों, सामाजिक चेतना के विषयों और विसंगतियों पर चर्चा होती है.
इस कड़ी में वाणी प्रकाशन के बैनर तले सजे मंच पर चर्चा हुई नाथपन्थ और नाथ संप्रदाय पर. वाणी प्रकाशन ग्रुप से प्रकाशित लेखक डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी की नयी पुस्तकें ‘नवनाथ’, ‘नाथ सम्प्रदाय : दर्शन कथा नाथपन्थ की’, और ‘नाथ सम्प्रदाय : युवा कल्याणार्थ नाथपन्थ’ का लोकार्पण व परिचर्चा का आयोजन हुआ.
परिचर्चा में उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष तथा बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी और स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी आरएन बनर्जी उपस्थित रहे.
प्रो. गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि नाथपन्थ पर केंद्रित इन पुस्तकों के माध्यम से लेखक ने ना सिर्फ़ नाथपन्थ सम्प्रदाय को प्रतिस्थापित किया है बल्कि मनीषियों और योगियों के इस ज्ञान संसार को वर्तमान युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का कार्य भी किया है.
वाणी प्रकाशन ग्रुप की कार्यकारी निदेशक अदिति माहेश्वरी गोयल ने कहा कि भारत दर्शन का मेला है. ‘नाथ सम्प्रदाय’, ‘सनातन दर्शन’, ‘वैष्णव दर्शन’, ‘भक्ति साहित्य’, ‘सूफ़ी साहित्य’, ‘अघोरी पन्थ’, ‘किन्नर समुदाय’, ‘यक्ष दर्शन’, ‘सिख दर्शन’, ‘पारसी गूढ़ प्रश्न’, ‘नवनाथ’ समेत तमाम सम्प्रदाय अपने आप में ज्ञान का सागर हैं.
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