दुआरे सरकार के तर्ज पर घरों में शराब भी पहुंचाएगी ममता बनर्जी सरकार

दुआरे सरकार के तर्ज पर घरों में शराब भी पहुंचाएगी ममता बनर्जी सरकार

प्रेषित समय :16:30:29 PM / Thu, Jan 27th, 2022

कोलकाता. ममता बनर्जी सरकार ने दुआरे सरकार और दुआरे राशन जैसी अनूठी परियोजनाएं तैयार की थी, जिससे सरकारी परियोजनाओं और राशन को घर-घर पहुंचाया जा सके. इसी तर्ज के बाद, राज्य सरकार अब शराब की एक ई-रिटेल प्रणाली विकसित करने पर विचार कर रही है ताकि शराब को घरों तक पहुंचाया जा सके. विपक्ष द्वारा नए प्रस्ताव का दुआरे मोड़ (दरवाजे पर शराब) के रूप में मजाक उड़ाया गया है. बता दें कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार दुआरे सरकार के तहत सरकारी योजनाओं  को घर-घर तक पहुंचाती है और उनकी शिकायतों का निपटारा करती है. इस मामले में ममता बनर्जी की सरकार ने दुआरे सरकार से करोड़ों घर तक पहुंचने में सफल रही है.

राज्य के आबकारी विभाग के अनुसार, शराब की ई-रिटेलिंग प्रणाली की प्रक्रिया पिछले साल अगस्त में शुरू हुई जब पश्चिम बंगाल राज्य पेय निगम ने इच्छुक कंपनियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए और तदनुसार कई कंपनियों ने 25,000 रुपये की गारंटी राशि के साथ आवेदन किया. बीईवीसीओ की यह भी शर्त थी कि शराब की आपूर्ति केवल 18 वर्ष से अधिक उम्र के ग्राहकों को ही की जानी चाहिए.

यह पूछे जाने पर कि कंपनियां ग्राहक की उम्र का निर्धारण कैसे करेंगी, राज्य के आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा: हम निश्चित रूप से एक तंत्र तैयार करेंगे और कंपनियों को प्रक्रिया का पालन करना होगा. यह आपूर्ति के मुख्य मानदंडों में से एक है. आबकारी विभाग के सूत्रों ने यह भी बताया कि चार कंपनियों- बाजीमत ड्रिंक्स, नेचर्स बास्केट, डंजो डिजिटल और प्लेटिनस एनालिटिक्स को अंतिम रूप दे दिया गया है. बीईवीसीओ फरवरी के पहले सप्ताह तक इन सभी कंपनियों के साथ एक बैठक आयोजित करेगा और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. कंपनियां खुदरा दुकानों से शराब खरीदेंगी और फिर वे इसे वांछित स्थान के रूप में आपूर्ति करेंगी. शुरुआत में आपूर्ति को कोलकाता और ग्रेटर कोलकाता क्षेत्र तक सीमित रखा जाएगा और लोकप्रियता और सफलता के आधार पर आपूर्ति पूरे राज्य में उपलब्ध कराई जाएगी.

हालांकि इसकी शुरुआत कई राज्यों में तब हुई जब घर-घर शराब पहुंचाने की पहल की गई थी. कुछ राज्यों में यह स्थायी हो गया है. पश्चिम बंगाल में भी कुछ कंपनियां सीमित रूप में यह सेवा प्रदान करती हैं, लेकिन ऐसे में खरीदारों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है. आबकारी विभाग के सूत्रों ने बताया कि चयन एजेंसियों के साथ समझौता होने के बाद फैसला लिया जाएगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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