मोदीजी! माही परियोजना नहीं होती तो- नल, नल में जल, जैसे जुमले उछालकर इतराने का अवसर नहीं मिलता?

मोदीजी! माही परियोजना नहीं होती तो- नल, नल में जल, जैसे जुमले उछालकर इतराने का अवसर नहीं मिलता?

प्रेषित समय :09:07:11 AM / Tue, May 17th, 2022

प्रदीप द्विवेदी. आत्ममुग्ध पीएम नरेंद्र मोदी अक्सर इतराते हुए अपने अलावा पहले के 70 वर्षों के विकास कार्यों को नकारते रहे हैं, लेकिन आज वे स्वंय जो सुविधाएं भोग रहे हैं ये उसी विकास की देन हैं? दक्षिण राजस्थान में माही परियोजना के कारण ही नल, नल में जल जैसे जुमले उछालने का पीएम मोदी को अवसर मिला, वरना कभी कालापानी के नाम से पहचाना जानेवाला यह क्षेत्र अकाल और अभाव का आईना था!
देश में वोट बटोरने के लिए जिस गरीबी का पीएम मोदी हवाला देते हैं, वैसी गरीबी यहां के हर परिवार ने भोगी हैं? राजस्थान के तीन बार मुख्यमंत्री रहे हरिदेव जोशी ने भी अपने प्रारंभिक जीवन में वैसे ही हालात देखे, लेकिन उन्होंने संघर्ष करके सफलता प्राप्त की, कभी अपनी गरीबी पर आंसू बहाकर सियासी प्रदर्शन नहीं किया? वर्षों तक इस क्षेत्र के लोग जंगल से लकड़िया ला कर, चूल्हे पर खाना पकाते रहे, महिलाएं गार-साण, बोले तो मिट्टी और गोबर लाकर, मिलाकर फर्श बनाती रही, गांवों को तो छोडिए, बांसवाड़ा शहर में पीने के पानी के हालात इतने खराब थे कि महालक्ष्मी चौक पर, जहां राजस्थान हाईकोर्ट के जज रहे दिनकर लाल मेहता रहते थे, सार्वजनिक नल से पानी के लिए महिलाओं को घंटो इंतजार करना पड़ता था!

कांग्रेस ने माही परियोजना देकर इस क्षेत्र को स्थाई सुख-समृद्धि प्रदान की है, पेट्रोल में जमकर लुटने के बाद केवल वोट के लिए जनधन खाते में कुछ रुपए डालकर अस्थाई मदद का तमाशा नही किया है? माही परियोजना ने इस क्षेत्र के लोगों को स्थाई आत्मनिर्भर बनाया है, इसलिए केवल जुमलों का प्रसाद बांटकर उसे लंगर करार देना बेशक सियासी ठगी ही है?
आज तो इतनी सुविधाएं है, कभी भीखाभाई के बारे में पढ़ोगे तो समझ में आएगा कि नारू जैसे रोग से लड़कर कैसे जिंदगी की जंग जीती जाती है?  मोदीजी, कभी समय मिले तो वागड़ मूल के गुजराती लेखक पन्नालाल पटेल को जरूर पढ़ लेना, असली गरीबी कैसी होती है, समझ में आ जाएगा? 

काश! मोदीजी ने पटेल को पढ़ा होता, माही परियोजना को देखा होता, विनोबा को समझा होता.... पीएम नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री है, जिन्हें लगता है कि उनसे पहले बने तमाम प्रधानमंत्री अयोग्य थे? मोदीजी ने कथित डिग्री तो हासिल कर ली, लेकिन पन्नालाल पटेल को शायद नहीं पढ़ पाए हैं और न तो माही परियोजना को देखा है, न ही विनोबा भावे के भूदान को समझ पाए हैं? वागड़ के मूल निवासी गुजराती के महान साहित्यकार पन्नालाल पटेल को पढ़ा होता तो शायद समझ पाते कि आजादी के समय देश के क्या हालात थे?

https://www.palpalindia.com/2021/08/15/delhi-PM-Modi-litterateur-Pannalal-Patel-Mahi-Project-Vinoba-understood-news-in-hindi.html
सुनहरी यादें! जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने माही जल-प्रवाह का बटन दबा कर बांसवाड़ा-डूंगरपुर (वागड़) की तस्वीर और तकदीर बदलने की शुरूआत कर दी....

आदिवासियों को पूरा समय तो केवल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही दिया था!
https://m.dailyhunt.in/news/india/hindi/palpalindia-epaper-dhfcdf96d1dd8d4edc93b48684e25c82c7/aadivasiyo+ko+pura+samay+to+keval+purv+pradhanamantri+rajiv+gandhi+ne+hi+diya+tha-newsid-n208049256
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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