बुध ग्रह अगर बिगड़ गया या फिर उसने नजर फेर ली तो खुशियां बिगड़ जाती

बुध ग्रह अगर बिगड़ गया या फिर उसने नजर फेर ली तो खुशियां बिगड़ जाती

प्रेषित समय :21:40:18 PM / Tue, Jul 26th, 2022

बुध ग्रह  की पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यता के अनुसार बुध  की माता तारा हैं और पिता चंद्रमा, परंतु हिंदू पौराणिक कथा में तारा को देव गुरू बृहस्पति की धर्म पत्नी के रूप में दर्शाया गया है. 
लेकिन बुध तारा व चंद्रमा के पुत्र हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि एक पौराणिक कथा के मुताबिक चंद्रमा ने उन्हें सम्मोहित कर अपने वश में कर लिया था इसके बाद तारा व चंद्रमा के मिलने के कारण बुध का जन्म हुआ.
 ब्रह्मा जी ने तारा व चंद्रमा के पुत्र का नाम बुध रखा. बुध ग्रह भगवान नारायण का भी प्रतिनिधित्व करते हैं.
 हिंदू धर्म में बुध को देव की उपाधि प्राप्त है. सप्ताह में बुधवार का दिन बुध को समर्पित है.
बुध कहने को एक छोटा सा ग्रह है लेकिन ज्योतिष शास्त्र में बुध एक महत्वपूर्ण ग्रह के तौर पर गिना और देखा जाता है.
इसे देवताओं का राजकुमार भी कहते हैं. ज्योतिष में कहा गया है बुध सही तो सब शुद्ध यानि सबकुछ सही रहता है लेकिन अगर यही बुध अगर बिगड़ गया, नीच का हो गया या फिर उसने नजर फेर ली तो खुशियां बिगड़ जाती हैं.
बुध को सभी ग्रहों में युवराज कहा गया है. ये मिथुन और कन्या राशि के स्वामी हैं.
 मीन इनकी नीच तथा कन्या उच्च राशि कही गयी है. 
किसी भी जातक की जन्म कुंडली में ये विद्या, वाणी, लेखन, प्रकाशन, शिक्षण, बैंकिंग कार्य, वकालत, चार्टर्ड एकाउंटेंट, गीत-संगीत, व्यापार, सलाहकार तथा कुशल वक्ता के रूप में सफलता दिलाने वाले ग्रह के रूप में जाने जाते हैं जो जन्मकुंडली में इनकी स्थिति पर निर्भर करता है. साधारणतः ये लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, नवम, दशम तथा एकादश भावों में शुभ फल देता है.
 इनके द्वारा अथवा इनकी युति से बनने वाले प्रमुख योगों में भद्र योग, बुधादित्य योग, लक्ष्मी-विष्णुयोग, कुशल वक्ता योग आदि प्रमुख हैं.
ग्रहों में बुध ग्रह का महत्व बड़ा ही व्यापक है. ज्योतिष के जानकारों की अगर मानें तो बुध ग्रह के कमजोर होने से इंसान की जिंदगी में कई सारी समस्याएं आ जाती हैं.
 लेकिन अगर कुंडली में बुध बलवान हो तो इंसान को कई सारी खुशियों की सौगात मिल जाती है. तो आखिर बुध हमारे जीवन को किस तरह प्रभावित करता है.
बुध की दशाओं में खराब बुध का असर तृतीय भाव, छठा भाव ,आठवां भाव, नवा भाव ,और बारवा भाव की जब भी दशा शुरू होती है जातक को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
बुध के अशुद्ध होने का असर
-तो इंसान की जिंदगी में मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है.
-इंसान बीमारियों के चंगुल में फंस जाता है. शरीर की आभा खत्म होने लगती है.
-कर्ज से परेशान रहने लगता है और आर्थिक तौर पर बुरी तरह प्रभावित रहता है.
-बुध खराब होने पर पद प्रतिष्ठा, मान सम्मान, यश बल सबसे गिरावट आने लगती है.
-इंसान शिक्षा में कमजोर हो जाता है, सूंघने की शक्ति घट जाती है, अपनी बातों के जरिए प्रभावशाली नहीं बन पाता है.
-बुद्धिवान होने के अंहकार से ग्रसित हो जाता है
इसीलिए कहा जाता है ग्रह कोई भी हो, छोटा हो बड़ा हो. उसका प्रभाव किसी भी दूसरे ग्रह से कमतर नहीं आंका जा सकता है.
 लेकिन अगर बुध सही हो तो जीवन में खुशियों की रौशनी फैली रहती है. दुखों का अंधकार दूर रहता है, मन प्रसन्न रहता है और जीवन में शांति बनी रहती है.
बुध के शुभ होने का प्रभाव 
बुद्ध के शुद्ध होने से व्यक्ति सौंदर्यवान हो जाता है. उसकी आभा अनुपम हो जाती है, व्यक्ति अच्छा वक्ता होता है जिसकी बातों को लोग ध्यान से सुनना पसंद करते हैं, 
आमतौर पर कुंडली में बुध की स्थिति ही तय करती है कि इंसान कैसा बोलता है और कैसा व्यवहार करता है या फिर उसकी बुद्धि और व्यक्तित्व कैसा है.
बुध ग्रह से बलवान व्यक्ति अगर व्यापार करता है तो उसे खूब सफलता मिलती है. खासकर शेयर बाजार या रुपये से संबंधित कारोबार में विशेष लाभ मिलता है.
बुध आपके पक्ष में रहे तो आपको मालामाल कर देगा. आपको यश बल कीर्ति से आकाश की अनंत ऊंचाइयों तक पहुंचा देगा और अगर उसने नजर फेर ली तो आपको पाई पाई का मोहताज कर सकता है. 
ऐसे में हर इंसान यही चाहेगा कि उसका बुध हमेशा शुद्ध रहे. उस पर अपनी अच्छी नजर बनाए रखें. लेकिन कैसे आखिर क्या करें कि बुद्ध की शुद्ध दृष्टि ही हम पर पड़े या अगर बुध कमजोर हो तो फिर उसे कैसे मजबूत करके जीवन को संवारा जा सकता है. 
  बुध ग्रह अगर कमजोर हो तो किस राशि पर क्या असर डालता है .
मेष राशि: नौकरी में खूब समस्या आती है, नौकरी छूटने का भी डर रहता है, जीवन कर्जों और बीमारियों में घिर जाता है.
वृष राशि: बुध का खासा महत्व है. बिना अच्छे बुध के बिना जीवन सुखमय नहीं हो सकता.
मिथुन राशि: जीवन में संघर्ष बढ़ जाता है, नौकरी में परेशानियां हो सकती हैं.
कर्क राशि: स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है और यात्रा पर भी बुरा असर पड़ता है. चरित्र और बुद्धि बदल जाती है. जीवन में अपयश के योग बढ़ जाते हैं.
सिंह राशि: मजबूत बुध के बिना धन का योग नहीं है. एक-एक पैसे के लिए तरसना पड़ता है.
कन्या राशि: स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है और धन घटने लगता है. सौंदर्य घटने लगता है. करियर में बाधा उत्पन्न होने लगती है.
तुला राशि: भाग्य साथ नहीं देता है और मन चंचल हो जाता है. चरित्र कमजोर हो जाता है.
वृश्चिक राशि: योग्यता के बावजूद उपलब्धि नहीं मिलती. त्वचा या वाणी से संबधित विकार हो सकता है.
धनु राशि: शादी में परेशानी या शादी नहीं होगी, वैवाहिक जीवन में समस्याएं पैदा होने लगती हैं.
मकर राशि: इंसान कर्ज में डूब जाता है और नौकरी में बाधा आती है. भाग्य साथ नहीं देता है.
कुंभ राशि: बुद्धि की समस्या परेशान करती है. संतान पक्ष से समस्या के योग बन जाते हैं.
मीन राशि: जीवन में किसी भी प्रकार का सुख नहीं मिलता. वैवाहिक जीवन बरबाद हो जाता है. संपत्ति का नुकसान हो जाता है.
नोट --महादशा के अनुसार ही हमारी दशायें बदल जाती है जब भी किसी भी ग्रह की दशा आती है तभी उसका प्रभाव भी होता है. उन दशाओं के अनुसार आप अपनी कुंडली में से उस ग्रह से संबंधित पूजा अनुष्ठान उपाय करके अपनी समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं. 

शक्ति उपासक---आचार्य पटवाल
Shakti-Upasak Acharya Patwal

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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