शिप्रा और नर्मदा के तट पर ऋण मुक्ति

शिप्रा और नर्मदा के तट पर ऋण मुक्ति

प्रेषित समय :18:58:04 PM / Fri, Aug 5th, 2022

शिप्रा और माँ नर्मदा वो नदी है जहा भगवान शिव ज्योति रूप मे स्थित है,यहाँ वे अपने  भक्तो की सभी मनोकामना पूर्ण करते है,संसार की माया चक्र से उलझे व्यग्र मन को शांति देते है और भक्ति का मार्ग प्रशस्त करते है, भोलेनाथ संसार के सभी ऋणों से उलझे हुए जीव को मुक्ति और शांति प्रदान करते है.
*ऋण मुक्तेस्वर महादेव शिप्रा महाकाल उज्जैन*-
मां शिप्रा के तट पर भगवान महाकाल  जो कालों के काल है आदमी का काल यानी समय जब बिगड़ जाता है तब शिव शंभु भोलेनाथ अपने भक्तो को मुक्ति का मार्ग बताते है,शिप्रा वो नदी है जहा अमृत की  कुछ बूंदें गिरी थी, इसलिए जब सिंहस्थ मे गुरु ग्रह सिंह राशि मे होते है तब यहाँ भव्य मेला आयोजित होता है,यही पर बसे है महाकाल जो की सबसे शक्तिशाली ज्योतिर्लिंग है, ये काल का नाभि स्थान है, यहाँ पर शिप्रा के तट पर भगवान ऋण मुक्तेश्वर विराजित है, यहाँ राजा हरिश्चंद्र को घोर तपस्या के  पश्चात शिव जी ने सभी प्रकार की ऋण मुक्ति का वरदान दिया था, वही ओंकारेश्वर मे भी संगम तट पर भगवान शिव ऋण मुक्तेश्वर के रूप मे विराजित है, दोनों जगह समान पूजन विधान है,भक्ति भाव से अपने पितरों,ऋषि,समस्त संबधित गणों का पिंड दान करने के पश्चात जब आप भगवान ऋण मुक्तेस्वर की पूजा करते है तो आप को सभी प्रकार के ऋणों से मुक्ति मिलती है.
*धैर्य और अच्छे मन से तीन बार पूजन करे*- 
किसी भी प्रकार के रोग, ऋण और  दुश्मनो से पीड़ित जातक यदि तीन बार यह पूजन विधान करे तो किसी भी प्रकार का कर्ज हो या समस्या हो उससे तुरंत राहत मिलती है, तीन बार के पूजन विधान से आप की धैर्य और भक्ति की परिक्षा के साथ शुभ फलों की प्राप्ति भी हो जाती है.
*समुद्र मंथन दर्शन*-
सनातन धर्म कि हर कथा तत्व दर्शन है समुद्र मंथन यानी जीव के भवसागर रूपी मंथन मॆ को बिष निकला उसे शिव ने कंठ मॆ धारण किया अमृत देवों को तथा लक्ष्मी भगवान विष्णु ने वरण किया.राक्षस अर्थात नकारात्मक विचार दरिद्रता और ज़हर भगवान शिव के अधिकार मॆ है तथा देवत्व सकारात्मक विचार अमृत भगवान विष्णु के अधिकार मॆ.जब पाप नकारात्मक विचार जीव को पाप के दलदल मॆ ले जाते है तब भगवान शिव का नाम ही आपको पाप रूपी बिष को पवित्रता मॆ बदलता है तथा जातक मानसिक शांति पाता है किसी भी प्रकार का ऋण चाहे वह आर्थिक हो शारीरिक हो या आत्मिक हो आपको पतन कि और ले जाता है इससे आपका उद्धार भगवान शिव ही कर सकते है.
*ऋण का कारक राहु*
कालपुरुष का ऋण या बंधन राहु महाराज ही है जो बिष रूप है और भगवान शिव के कंठ मॆ है भगवान शिव कि कृपा से जीव सभी प्रकार के ॠणों से मुक्त होता है.शिवभक्ति के जल से आपका पाप रूपी ऋण ख़त्म होता है क्योंकि राहु महाराज भगवान शिव से ही शांत होते है.
*ऋण मुक्तेश्वर महादेव ओंकारेश्वर*
मां नर्मदा कालजयी, शिवपुत्री नदी है. नर्मदानदी के रूप मॆ भगवान शिव का तपरूपी पसीना बह रहा है. इसके दर्शन तथा स्नान से जातक सभी संकटों से मुक्त होता है. ओमकारेश्वर जो कि खंडवा जिला तथा मांधाता विधानसभा मॆ आता है यहां भगवान शिव मम्लेश्वर ओंकारेश्वर लिंग के रूप मॆ सदैव स्थित है. शास्त्रों मॆ जहां भी संगम है उस स्थान का विशेष महत्व है. ओंकारेश्वर मॆ मां नर्मदा तथा कावेरी का संगम हुआ. इस तट के पास स्थित है ऋण मुक्तेश्वर महादेव का सिद्ध लिंग जो कि ओंकारेश्वर पर्वत परिक्रमा मार्ग पर आता है. जो व्यक्ति मम्लेश्वर लिंग के दर्शन कर ओंकार पर्वत कि परिक्रमा करते हुए संगम मॆ स्नान कर इस पवित्र लिंग का शुद्ध पवित्र भाव से विश्वास पूर्ण ढ़ंग से पूजन करता है. भगवान ऋण मुक्तेश्वर उसे सभी प्रकार के ॠणों से मुक्त करते है.
*ऋणमुक्तेष्वर पूजन विधान*
मांधाता ओंकारपर्वत क्षेत्र पांडवों के अज्ञातवास का स्थल रहा है भगवान कृष्ण से जब उन्होने अपने कष्ट का कारण पूछा तो भगवान ने उन्हे पितृऋण के कारण इस अज्ञातवास को बताया साथ ही उन्होने संगमतट पर ऋण मुक्तेश्वर शिव कि पूजा का विधान बताया.
*चने की दाल से पूजन*
कोई भी ऋण स्वर्ण से चुकाया जा सकता है. पांडवों ने यहां सोना दानकर स्वयं के ऋण को मुक्त किया था. सोने के अभाव मॆ जो भी व्यक्ति चने की दाल जो की गुरु ग्रह की वस्तु है गुरु ग्रह से  सम्बन्धित (सोना, हल्दी, केसर, चनादाल) अपने गुरु का नाम स्मरण कर गणेश गौरी नवग्रह मंडल का पूजन कर अपने नाम कुलगोत्र का स्मरण कर पूजन करने से जातक के सभी प्रकार के भारी से भारी ॠणों का नाश होता है. भगवान शिव का यह धाम इस कलयुग के ऋणग्रस्त जीवों के लिये सभी तरह से कल्याणकारी है. जय भोलेनाथ जय ऋण मुक्तेस्वर.हमे यह समस्त जानकारी वहा के स्थानीय निवासी श्री देवेंद्र चौकसे के द्वारा उपलब्ध करायी गई.

*प.चंद्रशेखर नेमा"हिमांशु
माँ कामख्या साधक, ज्योतिष, रतन विशेषज्ञ वास्तुविद
9893280184,9893218948

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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