ठंड में बढ़ जाता है अस्थमा अटैक का खतरा? इन बातों का रखें ध्यान

ठंड में बढ़ जाता है अस्थमा अटैक का खतरा? इन बातों का रखें ध्यान

प्रेषित समय :11:09:04 AM / Tue, Jan 10th, 2023

सर्दियां आने का साथ ही कई बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है. इन्हीं बीमारियों में एक है अस्थमा की समस्या. ठंड आने के साथ ही अस्थमा के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगती है. अस्थमा श्वसन से संबंधित बीमारी है जिसमें सांस की नली में सूजन आने से इंसान को सांस लेने में तकलीफ होती है. इसलिए दमा यानी अस्थमा के मरीजों के लिए सर्दियों का मौसम थोड़ा परेशानी भरा होता है.

ठंड के मौसम में सांस की नली के सिकुड़ने और प्रदूषण की वजह से अस्थमा अटैक की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. हमारा कमजोर इम्यून सिस्टम भी अस्थमा के लक्षण के बढ़ने के पीछे एक बड़ा कारण होता है, इसिलए जरूरी है कि हम इस प्रकार की जीवनशैली अपनाएं जिससे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत हो. ठंडी की वजह से सांस की नली सिकुड़ने और लगातार स्मोग के संपर्क में रहने से दमा रोगियों की तकलीफ काफी बढ़ जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो अस्थमा की समस्या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन ज्यादातर मामलों में इसकी शुरुआत बचपन से हो जाती है. आमतौर पर यह पूरी उम्र चलने वाली बीमारी है इसे बस दवा और इनहेलर के माध्यम से काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. एक छोटे बच्चे और एक वयस्क में इस बीमारी के लगभग एक समान लक्षण पाए जाते हैं.

अस्थमा के प्रमुख लक्षण

  • लगातार खांसी आना
  • जुकाम बने रहना
  • एक साथ कई छींकें आना
  • हल्की सी मेहनत पर सांस फूलना
  • सांस लेने के दौरान सीटी जैसी आवाज निकलना
  • सीने में जकड़न महसूस होना
  • घबराहट होना

अस्थमा रोग को बढ़ाने वाले कारण

  • ठंडी हवा के संपर्क में रहना
  • कोहरा, धुंध, धुवां, धूल, प्रदूषण का संक्रमण
  • बंद घरों में रहने वाले पालतू कुत्ते और बिल्लियों के बालों से भी अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं
  • फ्रिज में रखे ठंडे खाद्य पदार्थ का उपयोग करना

ऐसे करें अस्थमा से बचवा
गर्म कपड़े पहनें: सर्दी के मौसम में अस्थमा और साइनस से पीड़ित मरीजों को एक्स्ट्रा केयर की जरूरत पड़ती है. अस्थमा के अटैक से बचने के लिए गर्म या ऊनी कपड़े पहनने चाहिए. ठंडी हवाएं इसके लक्षण को बढ़ा सकती हैं इसलिए अपने शरीर को गर्म रखना चाहिए.

धुएं से बचें: सर्दियों में धुंआ अस्थमा रोगियों की परेशानी बढ़ा देता है इसलिए साइनस और अस्थमा रोगियों को धुएं से दूर रहना चाहिए. इसके साथ ही धूल से भी बचाव करना बेहद जरूरी है.

गुनगुना पानी पिएं: सर्दियों के मौसम में खांसी जुकाम की समस्या बढ़ जाती है और अगर यह कई दिनों तक रहे तो यह अस्थमा में बदल सकती है. इसलिए ठंड के मौसम में गुनगुना पानी पीते रहना चाहिए. गुनगुने पानी से फेफड़ों में होने वाली बलगम की समस्या भी दूर होती है.

शराब-सिगरेट से दूर: अलकोहल और धूम्रपान ये दोनों ही अस्थमा और साइनस रोगियों के लिए बेहद घातक हैं. धूम्रपान फेफड़े को कमजोर बनाता है जिससे अस्थमा रोगियों की तकलीफ बढ़ सकती है. इसलिए इन आदतों में बदलाव करना जरूरी है.
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

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