रांची. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज (12 दिसम्बर) भी पूछताछ के लिए ईडी कार्यालय नहीं पहुंचे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ईडी कार्यालय चिट्ठी भेजी, जिसे सूरज नाम का कर्मचारी लेकर पहुंचा. सूत्रों की मानें तो इस चिट्ठी में हेमंत सोरेन ने ईडी से सवाल किया है कि आप मुझे किस तरह बुला रहे हैं. क्या आप मुझे एक आरोपी की तरह पूछताछ के लिए बुला रहे हैं या आप इस मामले में जांच के लिए सहयोग चाहते हैं उस आधार पर बुला रहे हैं.
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कुछ देर पहले दुमका के लिए रवाना हो गये. मुख्यमंत्री ईडी कार्यालय के पास से ही गुजरे. सीएम हेलीकॉप्टर से दुमका के लिए रवाना हो गये. ईडी का दफ्तर एयरपोर्ट के रास्ते में है लेकिन सीएम वहां नहीं ठहरे. सुबह से ही उनके ईडी कार्यालय आने को लेकर चर्चा का बाजार गर्म था सुबह 10:00 बजे से ही ईडी कार्यालय के बाहर पुलिस वालों की तैनाती की गई थी.
सूत्रों के अनुसार अपनी व्यस्तता को लेकर हेमंत सोरेन ईडी दफ्तर एक चिट्ठी भेज सकते हैं. इस चिट्ठी में पूछताछ में शामिल ना होने की वजह सरकारी कार्यों में व्यस्तता हो सकती है. यह छठी बार है जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 12 दिसंबर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था. इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पांचवा समन जारी कर 4 अक्टूबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है. जमीन घोटाला में प्रवर्तन निदेशालय लगातार हेमंत सोरेन को समन जारी कर पूछताछ के लिए बुला रही है लेकिन हेमंत सोरेन ईडी के समन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की है.
हाईकोर्ट में अब तक क्या हुआ
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तरफ से दायर क्रिमिनल रिट याचिका को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सुनने लायक नहीं है. मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र और जस्टिस आनंद सेन की खंडपीठ में हुई, जहां ईडी के वकील ने बहस करते हुए कहा कि समन को चुनौती देना सही नहीं है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट में मनोहर लाल केस का हवाला देते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि ईडी समन जारी कर सकती है.
सीएम की शिकायत क्या थी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हेमंत सोरेन ने हाईकोर्ट में 22 सितंबर को याचिका दायर की थी. इस मामले में हेमंत सोरेन ने पत्र लिखकर ईडी को इसकी जानकारी दी थी और हाईकोर्ट का निर्देश आने तक इंतजार करने का अनुरोध किया था. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि पीएमएलए 2002 में निहित प्रावधानों के तहत ईडी के अधिकारी को जांच के दौरान किसी को समन करने का अधिकार प्राप्त है, जिसे धारा 50 के तहत समन जारी किया जाता है, उससे सच्चाई बताने की अपेक्षा की जाती है.उसका बयान दर्ज किया जाता है.इसके बाद इस बयान पर दंड या गिरफ्तारी के डर से उसे इस पर हस्ताक्षर करने की अपेक्षा की जाती है.यह संविधान के अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन है.संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकार के तहत किसी व्यक्ति को इस बात का हक है कि वह यह जाने कि उसे किस मामले में और क्यों समन किया गया है.ईडी ने उन्हें समन भेजा है, लेकिन वह इस बात की जानकारी नहीं दे रहा है कि उन्हें किस सिलसिले में बयान दर्ज करने के लिए बुलाया जा रहा है.ईडी की ओर से उन्हें ईसीआईआर की कॉपी भी नहीं दी जा रही है.
क्या है पूरा मामला
दरअसल, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में समन जारी होने के बाद ही सीएम हेमंत सोरेन ने ईडी से समन वापस लेने को कहा था.उन्होंने कहा था कि हमने पहले ही अपनी संपत्ति की जानकारी दे दी हैं.अगर वह गुम हो गया है तो वे फिर से इसे उपलब्ध करा सकते हैं.गौरतलब है कि इससे पूर्व अवैध खनन मामले में ईडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पूछताछ के लिए समन जारी किया था.उस दौरान वे ईडी के समक्ष उपस्थित हुए थे और ईडी के सभी प्रश्नों का जवाब दिया था. पूछताछ के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी ईडी को उपलब्ध कराए थे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-