अनिल मिश्र/ पटना
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर से बिहार में हुए जाति जनगणना पर सवाल उठाया है. उन्होंने दावा किया है कि हमें बिहार की तरह नहीं, तेलंगाना की तरह जाति जनगणना जरूरी है. जाति जनगणना हमें बता देगी कि दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, गरीब, सामान्य वर्ग कौन और कितने हैं? आज देश में सत्ता संरचना में दलितों और पिछड़ों की भागीदारी नहीं के बराबर है.
दलितों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, लेकिन सत्ता संरचना में भागीदारी नहीं होने के कारण इसका कोई मतलब ही नहीं है. यह बात कल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने बिहार की राजधानी पटना में श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित महान स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी के जन्म दिवस पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही.राहुल गांधी ने कहा कि दो सौ बड़ी कंपनियों में एक भी दलित-ओबीसी, आदिवासी नहीं हैं.
नब्बे लोग हिंदुस्तान का बजट निर्धारण करते हैं, इन लोगों में सिर्फ तीन दलित हैं. जो तीन अधिकारी दलित हैं, उनको इन्होंने छोटे-छोटे विभाग दे रखे हैं. अगर सरकार सौ रुपये खर्च करती है तो उसमें एक रुपये का निर्णय ही दलित अफसर लेते हैं. इसी तरह पचास प्रतिशत आबादी पिछड़े वर्ग की है, उनके भी मात्र तीन ही अधिकारी हैं. दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग की भागीदारी सौ रुपये में सिर्फ छह रुपये के बराबर है.
इस अवसर पर राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसते हुए कहा कि वो दलितों को टिकट दे देते हैं, लेकिन अधिकार नहीं देते. देश में जाति जनगणना कराने की मांग करते हुए बिहार की जाति जनगणना पर सवाल भी उठाए. उन्होंने कहा कि बिहार की तरह नहीं, पूरे देश को तेलंगाना की तरह जाति जनगणना जरूरी है.
जाति जनगणना हमें बता देगी कि दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, गरीब, सामान्य वर्ग कौन और कितने हैं? इसके बाद हम न्यायपालिका, मीडिया, संस्थानों और ब्यूरोक्रेसी में इनकी कितनी भागीदारी है, इसकी सूची निकालेंगे और असलियत पता करेंगे. कांग्रेस पार्टी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को उनकी भागीदारी दिलवाना चाहती है. और यही भारतीय जनता पार्टी नहीं चाहती है.एक न एक दिन हमलोग जरूर इन लोगों को इनकी हिस्सेदारी और भागीदारी दिलवा कर रहेंगे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-