कटरा माता वैष्णो देवी यात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित भारी बारिश और सुरक्षा चिंताओं से बढ़ी मुश्किलें

कटरा माता वैष्णो देवी यात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित भारी बारिश और सुरक्षा चिंताओं से बढ़ी मुश्किलें

प्रेषित समय :21:08:25 PM / Sun, Sep 14th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कटरा. माता वैष्णो देवी की पावन यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने 14 सितंबर से यात्रा शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन लगातार हो रही मूसलधार बारिश और मार्ग पर खतरनाक हालात को देखते हुए इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि जब तक मौसम पूरी तरह से सामान्य नहीं होता और ट्रैक सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक यात्रा को शुरू करना संभव नहीं है. इस फैसले ने हजारों श्रद्धालुओं की भावनाओं को झकझोर दिया है, जो लंबे इंतजार के बाद मां के दरबार में हाजिरी देने की तैयारी कर रहे थे.

12 सितंबर को बोर्ड ने घोषणा की थी कि अगर मौसम अनुमति देगा तो 14 सितंबर से यात्रा शुरू होगी. श्रद्धालुओं में उम्मीद जगी थी कि मां के दर्शन के लिए दरवाज़े फिर से खुलेंगे. लेकिन लगातार और तेज़ बारिश ने एक बार फिर प्रशासन और बोर्ड को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर बोर्ड ने लिखा, “भवन और ट्रैक पर लगातार हो रही बारिश के चलते 14 सितंबर से यात्रा शुरू करने का निर्णय टाल दिया गया है. अगले आदेश तक यात्रा स्थगित रहेगी. सभी श्रद्धालु आधिकारिक चैनलों के माध्यम से अपडेट प्राप्त करते रहें.”

यात्रा स्थगन का यह निर्णय केवल मौसम की मार का नतीजा नहीं है बल्कि हाल की भयावह त्रासदी की यादें भी प्रशासन को अतिरिक्त सतर्क बना रही हैं. 26 अगस्त को अत्यधिक बारिश के कारण अधकुआरी के पास भूस्खलन हुआ था, जिसमें 34 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 20 से अधिक गंभीर रूप से घायल हो गए थे. यह हादसा इतना दर्दनाक था कि श्रद्धालु परिवार ही नहीं, पूरा क्षेत्र सदमे में चला गया. हादसे के तुरंत बाद सभी होटल और धर्मशालाएं खाली कराई गईं और सुरक्षा के मद्देनज़र यात्रा को स्थगित कर दिया गया.

19 दिनों से यात्रा ठप है और यह कोविड-19 लॉकडाउन के बाद सबसे लंबा अंतराल माना जा रहा है जब मां वैष्णो देवी के दरबार में श्रद्धालु नहीं पहुँच पाए. इस बीच जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने हादसे की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की. समिति को यह देखने की जिम्मेदारी दी गई कि आखिरकार इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हुई और भविष्य में इसे कैसे रोका जा सकता है. खुद उपराज्यपाल ने यह स्वीकार किया कि भूस्खलन से कुछ देर पहले ही यात्रा को रोका गया था, जिससे और बड़ा हादसा टल गया.

श्रद्धालुओं के साथ-साथ कटरा और आसपास का पूरा कारोबार भी इस असमंजस की स्थिति से प्रभावित हो रहा है. होटल व्यवसायी, दुकानदार और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग हर दिन नुकसान झेल रहे हैं. उनका कहना है कि नवरात्रि के समय श्रद्धालुओं की भारी आमद होती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ी ताकत मिलती है. लेकिन अब 22 सितंबर से शुरू होने वाले नवरात्र महोत्सव के ठीक पहले यात्रा का स्थगित रहना न केवल धार्मिक भावनाओं पर चोट है बल्कि हजारों लोगों की आजीविका पर भी संकट है.

श्रद्धालुओं में गहरी निराशा का माहौल है. कई राज्यों से आए परिवार, जिनके पास टिकट और होटल बुकिंग थी, अब मजबूर होकर वापस लौट रहे हैं. एक श्रद्धालु ने कहा, “हम महीनों से इंतज़ार कर रहे थे कि मां बुलाएँगी तो दरबार में हाज़िरी देंगे. लेकिन यह लगातार हो रही बारिश और हादसों का डर मन में बैठ गया है. सुरक्षा ज़रूरी है, लेकिन आस्था का यह रुकना बहुत पीड़ादायक है.”

दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है. अधिकारी मानते हैं कि ट्रैक पर कई जगह भूस्खलन की आशंका बनी हुई है. ऐसे में भारी भीड़ को अनुमति देना किसी भी सूरत में खतरे से खाली नहीं होगा. बोर्ड का रुख साफ है कि श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता.

इस बीच सोशल मीडिया पर श्रद्धालुओं की मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं. कुछ लोग प्रशासन के निर्णय का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि जीवन से बढ़कर कुछ नहीं. वहीं कुछ का आरोप है कि श्राइन बोर्ड ने पहले ही पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम क्यों नहीं किए. उनका कहना है कि हर साल भारी बारिश होती है और अगर ट्रैक को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाने के उपाय किए जाते तो श्रद्धालुओं को इस तरह निराशा का सामना न करना पड़ता.

कटरा के स्थानीय व्यापारी संगठन ने भी आवाज उठाई है कि सरकार को जल्द से जल्द ट्रैक की मरम्मत और सुरक्षा के उपाय करने चाहिए ताकि नवरात्र से पहले यात्रा फिर से शुरू की जा सके. उनका कहना है कि अगर इस बार भी नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं का आना बाधित हुआ तो आर्थिक संकट और गहरा जाएगा.

हज़ारों परिवार जो माता वैष्णो देवी की यात्रा से जुड़े व्यवसाय पर निर्भर हैं, वे प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि बारिश थमते ही युद्ध स्तर पर काम शुरू किया जाए. वहीं मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक बारिश की रफ्तार कम हो सकती है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में जोखिम बना रहेगा.

श्रद्धालु अब अपनी निगाहें श्राइन बोर्ड की अगली घोषणा पर टिकाए हुए हैं. नवरात्रि से पहले अगर यात्रा शुरू नहीं होती तो इसका असर न केवल आस्था बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और पूरे उत्तर भारत के धार्मिक माहौल पर पड़ेगा. हर किसी की यही प्रार्थना है कि मां वैष्णो देवी जल्द ही सबको सुरक्षित बुलाएँ और यात्रा का मार्ग फिर से भक्तों के लिए खुल सके.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-