राम मंदिर के 161 फुट ऊंचे शिखर पर लहराएगा 22 फीट का धर्म ध्वज: प्रधानमंत्री करेंगे ध्वजारोहण, पूर्णता की ओर निर्माण

राम मंदिर के 161 फुट ऊंचे शिखर पर लहराएगा 22 फीट का धर्म ध्वज: प्रधानमंत्री करेंगे ध्वजारोहण, पूर्णता की ओर निर्माण

प्रेषित समय :21:41:24 PM / Sat, Oct 25th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अयोध्या. अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक आयोजन के बाद अब एक और अत्यंत महत्वपूर्ण और भव्य कार्यक्रम की तैयारी जोरों पर है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. यह मौका होगा राम मंदिर के 161 फुट ऊंचे शिखर पर धर्म ध्वज फहराने का, जिसे स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर 2025 को संपन्न करेंगे. यह ध्वजारोहण केवल एक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं के सदियों पुराने सपने के साकार होने, और भव्य राम मंदिर के निर्माण कार्य की प्रतीकात्मक पूर्णता का प्रतीक होगा. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने इस 5 दिवसीय समारोह की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन 21 नवंबर से शुरू होकर 25 नवंबर को विधिवत संपन्न होगा, जिसमें प्रधानमंत्री मुख्य यजमान की भूमिका में उपस्थित रहेंगे.

प्राण प्रतिष्ठा के समय रामलला की मूर्ति की स्थापना ने जहाँ मंदिर के धार्मिक और आध्यात्मिक सफर को शुरू किया था, वहीं अब इस ध्वजारोहण से मंदिर के भौतिक निर्माण को एक निर्णायक मोड़ मिलेगा. राम मंदिर के शिखर पर फहराया जाने वाला यह भगवा ध्वज 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा होगा. इस ध्वज के लिए विशेष रूप से तैयारी की जा रही है, जो कई किलोमीटर दूर से दिखाई देगा और अयोध्या की नई पहचान बनेगा. माना जा रहा है कि यह कार्यक्रम भी प्राण प्रतिष्ठा की तरह ही भव्य, दिव्य और ऐतिहासिक होगा, जिसमें देशभर से साधु-संतों, राजनेताओं और गणमान्य व्यक्तियों का जमावड़ा होगा.

ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि ध्वजारोहण से पहले 21 नवंबर से ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और यज्ञ शुरू हो जाएंगे. इन अनुष्ठानों का उद्देश्य मंदिर की ऊर्जा को और अधिक सक्रिय करना और देश की सुख-शांति की कामना करना है. 25 नवंबर का दिन पूरे देश के लिए एक गौरवशाली दिन होगा, जब प्रधानमंत्री अपने हाथों से इस ऐतिहासिक ध्वज को शिखर पर स्थापित करेंगे, जो एक तरह से राम मंदिर को राष्ट्र को समर्पित करने का अंतिम चरण होगा. यह केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाएगा.

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे देश की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है. सोशल मीडिया पर #RamMandirFlag और #AyodhyaDhwajarohan जैसे हैशटैग लगातार ट्रेंड कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि यह कार्यक्रम आम जनता के बीच भी गहरी दिलचस्पी का विषय बना हुआ है. लोग इस ऐतिहासिक पल को लाइव देखने के लिए अभी से अयोध्या की यात्रा की योजना बना रहे हैं, जिसके चलते अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और होटलों की बुकिंग चरम पर पहुँच गई है.

प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व में भी राम मंदिर निर्माण में व्यक्तिगत रुचि दिखाई है और प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनका 25 नवंबर को ध्वजारोहण के लिए अयोध्या आना एक बार फिर यह संदेश देगा कि सरकार देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है. यह कदम न सिर्फ धार्मिक भावनाओं का सम्मान है, बल्कि यह दर्शाता है कि राम मंदिर अब केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन चुका है.

अयोध्या के स्थानीय लोगों में इस आयोजन को लेकर खासा उत्साह है. उनका कहना है कि राम मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराने के बाद अयोध्या की पहचान पूरी दुनिया में एक नए रूप में स्थापित होगी. सुरक्षा एजेंसियों ने इस पूरे 5 दिवसीय आयोजन के दौरान ड्रोन निगरानी और त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरे की योजना बनाई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके. मंदिर ट्रस्ट यह सुनिश्चित कर रहा है कि प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तरह ही, इस बार भी सभी व्यवस्थाएं सुचारू रहें और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ध्वजारोहण भारतीय सभ्यता और सनातन धर्म की विजय का शंखनाद है. 161 फुट की ऊँचाई पर फहरता 22 फीट का यह भगवा ध्वज, भारतीय संस्कृति और आस्था की भव्यता को दर्शाएगा. राम मंदिर का यह शिखर, जिसे नागर शैली की वास्तुकला के अनुसार तैयार किया गया है, अब इस धर्म ध्वज के साथ और भी अधिक दैदीप्यमान हो उठेगा. यह कार्यक्रम राम मंदिर के निर्माण को एक निश्चित समापन बिंदु देगा, जिसके बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के सभी हिस्से पूर्ण रूप से खोल दिए जाएंगे.

ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि 25 नवंबर को होने वाला यह कार्यक्रम भारत की उस अटूट आस्था का प्रमाण है, जिसने सैकड़ों वर्षों तक संघर्ष किया और अंततः अपनी मंजिल हासिल की. यह ध्वज, आने वाली पीढ़ियों को यह प्रेरणा देता रहेगा कि आस्था और दृढ़ संकल्प से हर मुश्किल लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है. अयोध्या अब वाकई एक वैश्विक तीर्थ स्थल के रूप में अपनी जगह बना चुका है, और यह ध्वजारोहण उस पहचान को और भी अधिक मजबूती प्रदान करेगा.

यह सुनिश्चित करने के लिए कि कार्यक्रम की पवित्रता बनी रहे, ट्रस्ट ने सभी गणमान्य व्यक्तियों और मीडिया कर्मियों के लिए सख्त प्रोटोकॉल जारी किए हैं. मीडिया को कवरेज के लिए सीमित क्षेत्रों तक ही अनुमति दी जाएगी, जबकि प्रधानमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए हैं. कुल मिलाकर, 25 नवंबर 2025 का यह दिन अयोध्या के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रहा है, जब राम मंदिर का शिखर, धर्म ध्वज के साथ, पूरी दुनिया को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश देगा. इस आयोजन की सफलता न केवल ट्रस्ट के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-