बिहार एग्जिट पोल में एनडीए को स्पष्ट बढ़त, महागठबंधन पिछड़ा, सर्वेक्षणों में नीतीश-मोदी गठजोड़ को 133 से 167 सीटों का अनुमान

बिहार एग्जिट पोल में एनडीए को स्पष्ट बढ़त, महागठबंधन पिछड़ा, सर्वेक्षणों में नीतीश-मोदी गठजोड़ को 133 से 167 सीटों का अनुमान

प्रेषित समय :19:19:15 PM / Tue, Nov 11th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं और सभी प्रमुख सर्वेक्षण संस्थानों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को बड़ी जीत की भविष्यवाणी की है. 11 नवंबर की शाम 7 बजे तक जारी नतीजों के अनुसार, एनडीए को 133 से 167 सीटों तक मिलने का अनुमान है, जबकि विपक्षी महागठबंधन (एमजीबी) को 70 से 102 सीटों के बीच सीमित बताया गया है. इन नतीजों से साफ संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला गठबंधन एक बार फिर सत्ता में वापसी की ओर अग्रसर है.

एग्जिट पोल एजेंसियों — पीपुल्स पल्स, पीपुल्स इनसाइट, मैट्राइज और पी-मार्क — ने अपने सर्वेक्षणों में अलग-अलग आंकड़े दिए हैं, लेकिन रुझान लगभग एक समान हैं. पीपुल्स पल्स के पहले प्रोजेक्शन में एनडीए को 133 से 159 सीटें, जबकि महागठबंधन को 75 से 101 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है. वहीं मैट्राइज एजेंसी ने एनडीए को 147 से 167 सीटों के बीच भारी जीत की संभावना जताई है. पीपुल्स इनसाइट ने अपने अनुमान में एनडीए को 133 से 148 सीटें दी हैं, जबकि महागठबंधन को 87 से 102 सीटों के बीच सीमित बताया है.

एनडीए के भीतर भाजपा को 68-72 सीटें, जेडीयू को 55-60 सीटें, एलजेपी को 9-12 सीटें और हम (हितमंजेही अवाम मोर्चा) को 1-2 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है. वहीं, महागठबंधन के घटक राजद को 65-72, कांग्रेस को 9-13, और वाम दलों को 11-14 सीटें मिलने का अनुमान है.

243 सीटों वाली बिहार विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 122 सीटें है. अगर एग्जिट पोल के ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो एनडीए यह सीमा पार कर निर्णायक बहुमत के साथ सत्ता में लौटेगा.

दूसरी ओर, विपक्षी खेमे के नेता और आरजेडी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने मतदान के बाद सोशल मीडिया पर कहा कि “बिहार ने इस बार चमत्कार कर दिखाया है. हर वर्ग और हर समुदाय ने लोकतंत्र के इस पर्व में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया है.” उन्होंने दावा किया कि जनता बदलाव के मूड में है.

हालांकि एग्जिट पोल के आंकड़े तेजस्वी यादव के इस दावे को कमजोर करते दिख रहे हैं. महागठबंधन को लगभग सभी सर्वेक्षणों में 100 सीटों के भीतर रखा गया है, जिससे सत्ता पलट की संभावना कमजोर पड़ती नजर आ रही है.

पीपुल्स पल्स के एक अन्य सर्वे में मुख्यमंत्री के रूप में जनता की पसंद को लेकर दिलचस्प नतीजे सामने आए हैं. इसमें तेजस्वी यादव को 32%, नीतीश कुमार को 30%, प्रशांत किशोर और चिराग पासवान को 8-8%, जबकि सम्राट चौधरी को 6% और अन्य को 14% मत मिले हैं. इससे संकेत मिलता है कि नीतीश कुमार के प्रति जनता में कुछ हद तक एंटी-इन्कम्बेंसी के बावजूद वे एनडीए की स्थिरता के प्रतीक बने हुए हैं.

बिहार में मंगलवार को संपन्न हुए दूसरे और अंतिम चरण के मतदान में रिकॉर्ड 67.14% वोटिंग हुई, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है. चुनाव आयोग के मुताबिक, मतदान के दौरान किसी बड़े व्यवधान की सूचना नहीं मिली और सुरक्षा बलों की सख्त तैनाती के बीच शांतिपूर्ण मतदान संपन्न हुआ.

इस ऐतिहासिक मतदान प्रतिशत के बाद सभी की निगाहें शाम 6:30 बजे से शुरू हुए एग्जिट पोल परिणामों पर थीं. विभिन्न चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने अपने-अपने सर्वेक्षण जारी किए. सभी ने एकमत होकर एनडीए को बढ़त दी, हालांकि कुछ ने यह भी माना कि कुछ क्षेत्रों में राजद का प्रदर्शन पहले से बेहतर रहा है.

जितन राम मांझी, जो एनडीए के सहयोगी दल हम के प्रमुख हैं, ने वोटिंग खत्म होते ही कहा था कि “हमारे गठबंधन के उम्मीदवार 80 से 120 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे.” लेकिन अब एग्जिट पोल के परिणाम उनके अनुमान से भी आगे निकलते दिख रहे हैं.

जनसुराज अभियान के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक बयान में कहा कि इस बार प्रवासी मजदूरों ने बिहार के राजनीतिक समीकरणों में नया “X फैक्टर” जोड़ा है. उन्होंने कहा कि उच्च मतदान प्रतिशत इस बात का संकेत है कि लोग पारंपरिक राजनीति से आगे बढ़कर विकल्प तलाश रहे हैं.

फिलहाल जो तस्वीर उभर रही है, उसमें भाजपा और जदयू का संयुक्त प्रदर्शन प्रभावी नजर आ रहा है. बिहार के उत्तरी और पूर्वी जिलों में भाजपा के प्रदर्शन को मजबूत बताया गया है, जबकि मध्य और दक्षिणी जिलों में जदयू ने पकड़ बनाए रखी है. राजद ने सीमांचल और मगध क्षेत्र में अपना आधार कायम रखा है, परंतु यह संख्या सत्ता में वापसी के लिए पर्याप्त नहीं दिखती.

2020 के एग्जिट पोल से तुलना करें तो तस्वीर उलटी है. उस वक्त ज्यादातर सर्वेक्षणों ने महागठबंधन को भारी बढ़त दी थी, लेकिन नतीजों में एनडीए ने 125 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. इस बार के सर्वेक्षणों में एनडीए को शुरुआती बढ़त मिल रही है, जिससे समर्थकों में जश्न का माहौल है.

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार के अनुभव और केंद्र के साथ बेहतर तालमेल के कारण एनडीए को लाभ मिला है. वहीं, मोदी फैक्टर ने भी अंतिम समय में वोटरों को प्रभावित किया.

सर्वे एजेंसियों के मुताबिक, मतदाताओं के रुझान में यह चुनाव विकास, स्थिरता और शासन के मुद्दों पर केंद्रित रहा. जातिगत समीकरणों का असर सीमित रहा, जबकि युवा मतदाताओं ने रोजगार और शिक्षा के मुद्दों पर मतदान किया.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो नौवीं बार इस पद पर बने रहने की दौड़ में हैं, के लिए यह चुनाव राजनीतिक रूप से निर्णायक माना जा रहा था. अगर एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी और एनडीए के लिए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का रास्ता साफ करेगा.

दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ने कहा कि वे नतीजों के बाद भी लोकतांत्रिक भावना के साथ जनता के फैसले को स्वीकार करेंगे. उन्होंने कहा, “हमने बदलाव की राजनीति शुरू की है और यह सफर अब नहीं रुकेगा.”

अभी वास्तविक नतीजों का इंतजार है जो 14 नवंबर को मतगणना के बाद आएंगे. तब यह तय होगा कि एग्जिट पोल की भविष्यवाणियां कितनी सटीक रहीं. लेकिन फिलहाल, बिहार की राजनीति में एनडीए का पलड़ा भारी है और महागठबंधन के लिए यह एक कठिन चुनौती का संकेत है.

इस तरह, बिहार चुनाव 2025 के एग्जिट पोल्स ने राज्य के राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है. नीतीश कुमार की रणनीति, मोदी की अपील और एनडीए के संयुक्त प्रयासों ने इस चुनाव को एक बार फिर उनके पक्ष में झुका दिया है — जबकि विपक्ष को अब उम्मीद है कि 14 नवंबर को कुछ “आश्चर्यजनक मोड़” मिल सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-