हाईकोर्ट ने डॉबर की शिकायत पर पतंजलि के च्यवनप्राश विज्ञापन पर लगाई रोक, 3 दिन में हटाने का आदेश

हाईकोर्ट ने डॉबर की शिकायत पर पतंजलि के च्यवनप्राश विज्ञापन पर लगाई रोक, 3 दिन में हटाने का आदेश

प्रेषित समय :19:36:28 PM / Tue, Nov 11th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने मंगलवार को पतंजलि च्यवनप्राश के उस विवादास्पद विज्ञापन को तीन दिनों के भीतर बंद करने का आदेश दिया है, जिसमें अन्य सभी च्यवनप्राश ब्रांडों को धोखा (धोखाधड़ी या छल) बताया गया था. यह आदेश प्रतिद्वंद्वी कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर आया है.

जस्टिस तेजस करिया ने डाबर इंडिया लिमिटेड बनाम पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया. उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों, ओवर द टॉप (ह्रञ्जञ्ज) प्लेटफॉर्म और अन्य प्रसारकों को तीन दिनों के अंदर इस विज्ञापन को हटाने, ब्लॉक करने या निष्क्रिय करने का सख्त निर्देश दिया.

कोर्ट ने दिये ये आदेश क्या

जस्टिस करिया ने अपने फैसले में कहा, प्रतिवादी (पतंजलि) राष्ट्रीय टेलीविजन चैनलों, ओटीटी प्लेटफॉर्म, प्रिंट माध्यमों और वर्ल्ड वाइड वेब/इंटरनेट पर प्लेटफॉर्म, समाचार पत्रों और अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट सहित सभी इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से विवादित विज्ञापन को तीन दिनों के अंदर हटाएं, ब्लॉक करें या उसे निष्क्रिय कर दें.

जानिए यह है पूरा मामला

हाई कोर्ट की एकल पीठ ने यह आदेश डाबर इंडिया की उस याचिका पर दिया, जिसमें पतंजलि स्पेशल च्यवनप्राश के हालिया टीवी विज्ञापन को अपमानजनक और अनुचित बताया गया था. डाबर की याचिका के अनुसार, इस विज्ञापन में बाबा रामदेव उपभोक्ताओं को चेतावनी देते हुए दिखाई दे रहे थे कि च्यवनप्राश के नाम पर ज्यादातर लोगों को ठगा जा रहा है. विज्ञापन में अन्य सभी च्यवनप्राश ब्रांडों को धोखा (धोखाधड़ी या छल) बताया गया, जबकि पतंजलि के उत्पाद को आयुर्वेद की असली शक्ति देने वाला एकमात्र असली च्यवनप्राश कहा गया.

रिपोर्ट के मुताबिक, डाबर ने आरोप लगाया कि यह विज्ञापन जानबूझकर उसके प्रमुख उत्पाद डाबर च्यवनप्राश को बदनाम करता है, जो 1949 से बाजार में 61 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी रखता है. डाबर ने यह भी तर्क दिया कि पतंजलि का यह संदेश संपूर्ण च्यवनप्राश श्रेणी का अपमान है, जिससे आयुर्वेद-आधारित हेल्थ सप्लीमेंट पर लोगों का विश्वास कम होता है. इन तर्कों पर विचार करने के बाद, हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि यह विज्ञापन संपूर्ण च्यवनप्राश उत्पादों की श्रेणी का अपमान करने का प्रयास है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-