एल्गिन अस्पताल के बाहर से ई-रिक्शा चोरी अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

एल्गिन अस्पताल के बाहर से ई-रिक्शा चोरी अस्पताल प्रशासन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल

प्रेषित समय :20:05:36 PM / Sun, Nov 30th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. शहर के प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक एल्गिन अस्पताल की लचर सुरक्षा व्यवस्था ने शनिवार, 29 नवंबर 2025 को उस समय एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया, जब इलाज कराने आए एक गरीब ई-रिक्शा चालक की आजीविका का एकमात्र साधन, उसका ई-रिक्शा, अस्पताल परिसर के ठीक बाहर से दिनदहाड़े गायब हो गया. इस घटना ने न सिर्फ एक मेहनतकश व्यक्ति को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि यह भी उजागर कर दिया है कि इतने बड़े शासकीय अस्पताल में बुनियादी सुरक्षा उपाय, जैसे कि कारगर सीसीटीवी कैमरे, तक उपलब्ध नहीं हैं.

हनुमानताल क्षेत्र के निवासी प्रद्युम्न सोनकर के लिए उनका ई-रिक्शा केवल एक वाहन नहीं था, बल्कि उनके और उनके परिवार के पेट भरने का जरिया था. वह हर दिन कड़ी मेहनत करके अपने रिक्शे से मिलने वाले पैसों से घर चलाते थे. शनिवार की सुबह, प्रद्युम्न अपनी बीमार पत्नी का इलाज कराने के लिए सिविल लाइन स्थित एल्गिन अस्पताल पहुंचे. उन्होंने अपना ई-रिक्शा, जिसका नंबर एमपी 20 आर 9439 बताया जा रहा है, अन्य वाहनों के साथ अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर बनी पार्किंगनुमा जगह पर खड़ा किया. पत्नी को लेकर वह अंदर अस्पताल की औपचारिकताओं और इलाज के लिए चले गए.

एक सरकारी अस्पताल होने के नाते, यह अपेक्षा की जाती है कि यहां आने वाले मरीजों और उनके अटेंडेंट्स की संपत्ति की सुरक्षा के लिए अस्पताल प्रशासन कम से कम एक बुनियादी सुरक्षा घेरा तैयार रखेगा. लेकिन इस मामले में, यह अपेक्षा पूरी तरह धरी रह गई. प्रद्युम्न सोनकर अपनी पत्नी का इलाज कराकर जब कुछ देर बाद बाहर निकले, तो उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ. जिस जगह उन्होंने अपना ई-रिक्शा खड़ा किया था, वह वहां से नदारद था.

ई-रिक्शा चालक ने तत्काल आसपास के लोगों से पूछताछ की, सिक्योरिटी गार्ड से संपर्क साधा, लेकिन कहीं से कोई ठोस जानकारी नहीं मिली. चंद मिनटों के भीतर ही उसकी आजीविका की पूंजी गायब हो चुकी थी. प्रद्युम्न सोनकर पूरी तरह टूट चुके थे. उनके चेहरे पर यह चिंता साफ झलक रही थी कि अब वह कैसे अपने परिवार का भरण-पोषण करेंगे, कैसे अपनी पत्नी का इलाज करवाएंगे.

इस घटना के बाद जब लोगों ने अस्पताल प्रशासन की ओर रुख किया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए, तो जो तथ्य सामने आया वह बेहद चौंकाने वाला था. पता चला कि अस्पताल परिसर के इस महत्वपूर्ण हिस्से, जहां सैकड़ों वाहन रोज़ाना खड़े होते हैं, वहां एक भी काम करने वाला सीसीटीवी कैमरा मौजूद नहीं है. इतने बड़े सिविल अस्पताल में, जहां रोज़ाना हजारों लोग आते-जाते हैं, जहां कीमती सरकारी उपकरण और लोगों की निजी संपत्ति होती है, वहां सीसीटीवी कैमरों का न होना या उनका खराब होना, अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही को दर्शाता है. यह स्थिति शहर के बीचों-बीच स्थित एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के लिए अत्यंत शर्मनाक है.

प्रद्युम्न सोनकर ने तत्काल सिविल लाइन पुलिस थाने में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है. हालांकि, बिना किसी सीसीटीवी फुटेज या ठोस गवाह के, इस चोरी का खुलासा करना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. इस मामले में पुलिस के सामने अब यह सवाल है कि क्या यह किसी संगठित गिरोह का काम है जो सरकारी अस्पतालों के बाहर कमजोर सुरक्षा का फायदा उठा रहा है, या यह किसी स्थानीय चोर का मौकापरस्त अपराध है.

यह घटना सिर्फ एक ई-रिक्शा चोरी होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जबलपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती है. यह दिखाता है कि कैसे प्रशासन नागरिकों की संपत्ति और सुरक्षा के प्रति उदासीन है. सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से फैली है और लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर रोष व्यक्त किया है. आम जनता मांग कर रही है कि अस्पताल में तत्काल प्रभाव से उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और पार्किंग क्षेत्र की सुरक्षा के लिए पर्याप्त गार्ड तैनात किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके और गरीब एवं जरूरतमंद लोग अस्पताल आते समय अपनी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त महसूस कर सकें. प्रद्युम्न सोनकर जैसे गरीब और मेहनतकश लोगों को न्याय मिलना आवश्यक है और इसके लिए अस्पताल प्रशासन को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए त्वरित कार्रवाई करनी होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-