भारतीय क्रिकेट के भविष्य पर भारी न पड़ जाए शुभमन गिल की आलोचना, टी20 विश्व कप से बाहर होने के बाद छिड़ी जहरीली बहस

भारतीय क्रिकेट के भविष्य पर भारी न पड़ जाए शुभमन गिल की आलोचना, टी20 विश्व कप से बाहर होने के बाद छिड़ी जहरीली बहस

प्रेषित समय :22:47:23 PM / Mon, Dec 22nd, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा और विवादों के केंद्र में है और वह नाम है शुभमन गिल का। कभी भारतीय क्रिकेट के 'पोस्टर बॉय' और अगले सुपरस्टार माने जाने वाले 26 वर्षीय गिल आज सोशल मीडिया पर एक ऐसी नकारात्मकता का सामना कर रहे हैं, जो न केवल उनके करियर बल्कि भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी के भविष्य के लिए भी चिंताजनक है। हाल ही में घोषित 2026 टी20 विश्व कप की टीम से उनका बाहर होना कई प्रशंसकों के लिए जश्न का विषय बन गया है, लेकिन खेल के जानकारों का मानना है कि आलोचना और व्यक्तिगत हमले के बीच की महीन रेखा अब धुंधली पड़ती जा रही है। गिल, जिन्होंने इसी साल रोहित शर्मा की जगह टेस्ट और वनडे की कप्तानी संभाली और इंग्लैंड दौरे पर भारत को सीरीज ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई, आज अपने ही देश के प्रशंसकों के निशाने पर हैं। यह स्थिति उस समय पैदा हुई है जब भारतीय क्रिकेट एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है और भविष्य के कप्तान के रूप में देखे जा रहे खिलाड़ी को इस तरह हाशिए पर धकेलना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।

शुभमन गिल के करियर का ग्राफ पिछले कुछ महीनों में जितनी तेजी से ऊपर गया, उतनी ही तेजी से टी20 फॉर्मेट में उनकी जगह पर सवाल भी उठे। जब एशिया कप के लिए उन्हें टी20 टीम में वापस बुलाकर उप-कप्तान बनाया गया, तो यह स्पष्ट संकेत था कि गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव उन्हें भविष्य के 'ऑल-फॉर्मेट' कप्तान के रूप में देख रहे थे। लेकिन इस फैसले ने एक बड़े विवाद को जन्म दिया। गिल को सलामी जोड़ी में फिट करने के लिए संजू सैमसन जैसे इन-फॉर्म खिलाड़ी को निचले क्रम पर धकेला गया और बाद में टीम से बाहर कर दिया गया। पिछले एक साल में तीन टी20 शतक लगाने वाले सैमसन की जगह गिल को तरजीह देना कई लोगों को रास नहीं आया। टीम ने एशिया कप और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज तो जीत ली, लेकिन भारत का आक्रामक बल्लेबाजी दृष्टिकोण बदल गया। अभिषेक शर्मा के साथ गिल की जोड़ी ने उस विस्फोटक शुरुआत को धीमा कर दिया जिसे भारतीय टीम ने पिछले कुछ समय में अपनी पहचान बनाया था। गिल 'एंकर' की भूमिका में सिमट गए और इसका दबाव पूरी तरह अभिषेक शर्मा पर आ गया।

आंकड़ों की बात करें तो गिल के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय में पिछला कुछ समय बेहद निराशाजनक रहा है। उन्होंने 15 मैचों में महज 137.26 के स्ट्राइक रेट से सिर्फ 291 रन बनाए और उनके बल्ले से एक भी अर्धशतक नहीं निकला। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के दौरान उन पर दबाव साफ देखा जा सकता था, जहाँ वे खराब शॉट चयन के कारण बार-बार अपना विकेट गंवाते रहे। कहानी में निर्णायक मोड़ तब आया जब चौथे टी20 से पहले नेट सत्र के दौरान गिल चोटिल हो गए। उनकी अनुपस्थिति में संजू सैमसन को फिर से ओपनिंग का मौका मिला और उन्होंने पांचवें टी20 में दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए ताबड़तोड़ 37 रन बनाए। सैमसन की इस निडर पारी ने चयनकर्ताओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि टीम को गिल की तकनीकी शुद्धता चाहिए या सैमसन की बेखौफ आक्रामकता। नतीजा यह हुआ कि टीम के उप-कप्तान होने के बावजूद गिल को 2026 टी20 विश्व कप की टीम से बाहर कर दिया गया। यह फैसला जितना चौंकाने वाला था, उतना ही व्यावहारिक भी, क्योंकि गिल का प्रदर्शन उस दिशा से मेल नहीं खा रहा था जिस ओर भारतीय टी20 टीम बढ़ रही है।

हालांकि, गिल को टीम से बाहर करना एक क्रिकेटिंग फैसला हो सकता है, लेकिन जिस तरह से उनके खिलाफ 'टॉक्सिक' माहौल बनाया जा रहा है, वह डरावना है। सोशल मीडिया पर उनकी विफलता का उपहास उड़ाना और उनके व्यक्तिगत जीवन पर छींटाकशी करना भारतीय खेल संस्कृति के गिरते स्तर को दर्शाता है। खेल पत्रकार और पूर्व खिलाड़ियों का तर्क है कि आप गिल की फॉर्म की आलोचना करें, उनके स्ट्राइक रेट पर सवाल उठाएं, लेकिन उन्हें विलेन बनाना भारतीय क्रिकेट की अगली पौध को मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। अगर हम अपने भविष्य के नायकों को एक खराब पैच के दौरान सुरक्षा देने के बजाय उन्हें भीड़ के सामने फेंक देंगे, तो कोई भी युवा खिलाड़ी जिम्मेदारी लेने से कतराएगा। शुभमन गिल अभी भी टेस्ट और वनडे के बेहतरीन बल्लेबाज और कप्तान हैं, लेकिन टी20 के इस झटके और उसके बाद हुई उनकी 'कैरेक्टर एसासिनेशन' ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपने ही सितारों को खुद नष्ट करने की राह पर निकल पड़े हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-