गोवा जिला पंचायत चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत, पीएम मोदी बोले गोवा सुशासन और प्रगतिशील राजनीति के साथ मजबूती से खड़ा

गोवा जिला पंचायत चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत, पीएम मोदी बोले गोवा सुशासन और प्रगतिशील राजनीति के साथ मजबूती से खड़ा

प्रेषित समय :22:42:36 PM / Mon, Dec 22nd, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

गोवा की राजनीति में जिला पंचायत चुनाव 2025 ने एक बार फिर साफ संकेत दे दिया है कि राज्य की जनता स्थानीय स्तर पर भी स्थिरता, सुशासन और विकास के नाम पर भरोसा जता रही है। 50 सदस्यीय गोवा जिला पंचायत में भारतीय जनता पार्टी और महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के गठबंधन ने 30 सीटें जीतकर निर्णायक बढ़त हासिल की है। इस जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत तक ने गोवा की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति आभार जताया है। चुनाव परिणाम सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में इसे 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

सोमवार 22 दिसंबर को आए नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गोवा सुशासन और प्रगतिशील राजनीति के साथ खड़ा है। उन्होंने राज्य की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा कि जिला पंचायत चुनावों में भाजपा-एमजीपी के नेतृत्व वाले एनडीए को मिला यह समर्थन गोवा के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों को और मजबूती देगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार गोवा के लोगों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जमीनी स्तर पर काम करने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत की वजह से ही यह जनादेश सामने आया है।

गोवा जिला पंचायत चुनावों में कुल 50 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हुआ था, जिसमें प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ-साथ बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे। कुल 226 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई, जिनमें उत्तर गोवा से 111 और दक्षिण गोवा से 115 प्रत्याशी शामिल थे। इनमें 62 उम्मीदवार निर्दलीय थे, जो यह दिखाता है कि स्थानीय चुनावों में अब भी व्यक्तिगत प्रभाव और क्षेत्रीय समीकरणों की अहम भूमिका बनी हुई है। इसके बावजूद भाजपा-एमजीपी गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर अपनी संगठनात्मक ताकत और जमीनी पकड़ का प्रदर्शन किया।

चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, लगभग आठ लाख मतदाताओं में से 70.81 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यह प्रतिशत स्थानीय चुनावों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। सबसे अधिक मतदान उत्तर गोवा के लातंबरसेम में दर्ज किया गया, जहां 88.29 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। इसके बाद नागरगांव और पाले जैसे इलाकों में भी 86 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। यह आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय शासन को लेकर जनता की रुचि लगातार बढ़ रही है।

परिणामों पर नजर डालें तो भाजपा ने भले ही इस बार 30 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया हो, लेकिन पिछली बार की तुलना में उसकी सीटें कुछ कम हुई हैं। पिछली जिला पंचायत में भाजपा को 33 सीटें मिली थीं। इसके उलट कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है। कांग्रेस ने इस बार 9 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी मजबूत की है, जबकि पिछली बार उसे महज 4 सीटों पर संतोष करना पड़ा था। गोवा फॉरवर्ड पार्टी, आम आदमी पार्टी और रिवोल्यूशनरी गोअंस पार्टी को एक-एक सीट मिली है। मतगणना के दौरान कुछ केंद्रों पर देर शाम तक गिनती जारी रही, जिससे एक-दो सीटों पर समीकरण बदलने की संभावना भी बनी रही।

मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए गोवा की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत राज्य सरकार के विकास कार्यों और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों पर जनता के भरोसे का प्रमाण है। सावंत ने यह भी कहा कि जिला पंचायतें ग्रामीण विकास, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय समस्याओं के समाधान में अहम भूमिका निभाती हैं और नई पंचायतें इस जिम्मेदारी को और मजबूती से निभाएंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिला पंचायत चुनावों में भाजपा-एमजीपी गठबंधन की यह जीत केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राज्य की व्यापक राजनीति पर भी पड़ेगा। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह परिणाम यह संकेत देता है कि भाजपा संगठनात्मक स्तर पर अब भी मजबूत स्थिति में है, हालांकि कांग्रेस और अन्य दलों के लिए भी यह नतीजे भविष्य की रणनीति तय करने का आधार बन सकते हैं। कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन को पार्टी के भीतर नए उत्साह के रूप में देखा जा रहा है, जबकि आम आदमी पार्टी और क्षेत्रीय दलों के लिए यह आत्ममंथन का समय माना जा रहा है।

इस चुनाव में कई दिलचस्प पहलू भी सामने आए। बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों की मौजूदगी और कुछ क्षेत्रों में कड़े मुकाबले ने यह दिखाया कि गोवा की राजनीति अब भी स्थानीय नेतृत्व और व्यक्तिगत संपर्क पर काफी हद तक निर्भर है। वहीं, मतदाताओं की भारी भागीदारी ने यह भी साबित किया कि पंचायत स्तर की राजनीति को लेकर लोगों में जागरूकता और अपेक्षाएं दोनों बढ़ी हैं।

 गोवा जिला पंचायत चुनाव 2025 ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि राज्य की जनता स्थानीय शासन में स्थिरता और विकास को प्राथमिकता दे रही है। प्रधानमंत्री मोदी के शब्दों में, यह जनादेश सुशासन और प्रगतिशील राजनीति के समर्थन का प्रतीक है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई जिला पंचायतें जमीनी स्तर पर विकास और जनसमस्याओं के समाधान में किस तरह अपनी भूमिका निभाती हैं और यह जीत 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीति को किस दिशा में मोड़ती है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-