जयपुर.भारतीय रेलवे के इतिहास में एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जिनके पास अपनी ट्रेनों की रफ्तार मापने का आधुनिकतम आधारभूत ढांचा मौजूद है। रेलवे मंत्रालय ने एक बेहद उत्साहजनक अपडेट साझा करते हुए देशवासियों की जिज्ञासा को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है कि राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले में बन रहा देश का पहला 'हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक' मार्च 2026 तक बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। यह खबर केवल एक निर्माण कार्य की प्रगति मात्र नहीं है बल्कि यह उस विजन का हिस्सा है जिसके तहत भविष्य की भारतीय ट्रेनें पटरियों पर उड़ती हुई नजर आएंगी। जोधपुर मंडल के नावा सिटी स्टेशन के पास लगभग 60 किलोमीटर लंबे इस विशेष ट्रैक का निर्माण जिस युद्धस्तर पर चल रहा है उसने न केवल इंजीनियरों बल्कि आम जनता के बीच भी यह कौतूहल पैदा कर दिया है कि आखिर इस ट्रैक पर ऐसा क्या खास होने वाला है जो अब तक भारतीय रेल नेटवर्क पर संभव नहीं था। सबसे रोमांचक पहलू यह है कि यहाँ ट्रेनों का परीक्षण 220 किलोमीटर प्रति घंटा की तूफानी रफ्तार पर किया जाएगा जो वर्तमान भारतीय ट्रेनों की औसत गति से कहीं अधिक है।
जैसे ही रेल मंत्रालय ने इस परियोजना की ताजा तस्वीरें और प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की सोशल मीडिया पर रफ्तार के दीवानों के बीच एक नई बहस छिड़ गई है। लोग यह जानने को बेताब हैं कि क्या इस ट्रैक के तैयार होने के बाद भारत की अपनी 'बुलेट ट्रेन' या अत्याधुनिक 'वंदे भारत' के नए संस्करणों का सपना जल्द पूरा होगा। पत्रकारिता के नजरिए से देखें तो यह ट्रैक एक ऐसी प्रयोगशाला है जहाँ केवल ट्रेनों की गति ही नहीं बल्कि उनके डिब्बों की स्थिरता, ब्रेकिंग सिस्टम और सुरक्षा मानकों की अग्निपरीक्षा होगी। अभी तक भारत को अपनी नई ट्रेनों और रोलिंग स्टॉक के हाई-स्पीड परीक्षण के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था या फिर मौजूदा व्यस्त रेल मार्गों पर ही घंटों का ब्लॉक लेकर ट्रायल करना पड़ता था जिससे सामान्य रेल यातायात प्रभावित होता था। लेकिन राजस्थान के रेतीले मैदानों में बन रहा यह समर्पित ट्रैक अब इस समस्या का स्थायी समाधान बनने जा रहा है। जनता में इस बात को लेकर भी उत्सुकता है कि क्या 220 की रफ्तार पर दौड़ते समय ये ट्रेनें उतनी ही सुरक्षित होंगी जितनी कि वे वर्तमान गति पर हैं।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की बारीकियों पर नजर डालें तो पता चलता है कि यहाँ एक मुख्य ट्रैक के साथ-साथ कई लूप लाइन्स और विशेष कर्व्स बनाए जा रहे हैं जो अंतरराष्ट्रीय मानकों को टक्कर देंगे। जिज्ञासा का एक बड़ा केंद्र यह भी है कि इस ट्रैक के आसपास का इलाका अब एक बड़े रेलवे हब के रूप में विकसित हो रहा है जहाँ भविष्य में अनुसंधान और विकास के नए रास्ते खुलेंगे। जब मार्च 2026 में यह ट्रैक पूरी तरह चालू होगा तब यहाँ न केवल भारतीय रेल बल्कि विदेशी कंपनियां भी अपनी ट्रेनों का परीक्षण कराने भारत आ सकेंगी जिससे देश को भारी विदेशी मुद्रा की प्राप्ति भी होगी। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या इस ट्रैक के पास कोई ऐसी गैलरी या पॉइंट होगा जहाँ से आम नागरिक इन हाई-स्पीड ट्रायल को अपनी आँखों से देख पाएंगे। युवाओं में विशेष रूप से इस बात को लेकर क्रेज है कि कैसे 'मेक इन इंडिया' के तहत बनी ट्रेनें अब अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन इसी मारवाड़ की धरती पर करेंगी।
रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार इस ट्रैक पर पुलों, टनल और सिग्नलिंग का जो जाल बिछाया जा रहा है वह भविष्य की हाई-स्पीड रेलिंग का ब्लूप्रिंट साबित होगा। यह खबर उस समय आई है जब देश भर में रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प हो रहा है और नई अमृत भारत ट्रेनें पटरियों पर उतर रही हैं। ऐसे में राजस्थान के इस टेस्ट ट्रैक का पूरा होना भारतीय रेल के आधुनिकीकरण के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा जो रफ्तार की बाधाओं को हमेशा के लिए खत्म कर देगा। जैसे-जैसे निर्माण की समय सीमा नजदीक आ रही है क्षेत्रीय लोगों में भी रोजगार और विकास की नई उम्मीदें जगी हैं क्योंकि यह इलाका अब दुनिया के रेल मानचित्र पर चमकने वाला है। भारतीय रेल की यह छलांग केवल तकनीक की नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत के उस विश्वास की है जो कहता है कि हम अब दुनिया का अनुसरण नहीं करेंगे बल्कि दुनिया को रास्ता दिखाएंगे। मार्च 2026 की उस तारीख का इंतजार अब पूरे देश को है जब पहली बार कोई ट्रेन भारतीय जमीन पर बने इस विशेष ट्रैक पर 220 की रफ्तार से दौड़कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगी।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

