भारतीय क्रिकेट में जब भी बड़े टूर्नामेंट और निर्णायक मुकाबलों की बात होती है, तो दो नाम अपने आप चर्चा के केंद्र में आ जाते हैं—रोहित शर्मा और विराट कोहली. अब जबकि 2027 आईसीसी क्रिकेट विश्व कप की तैयारियों को लेकर बहस शुरू हो चुकी है, पूर्व भारतीय स्पिनर अमित मिश्रा ने इन दोनों दिग्गजों के समर्थन में जोरदार आवाज उठाई है. मिश्रा का मानना है कि चाहे उम्र बढ़ रही हो या मैच प्रैक्टिस पहले जैसी न हो, लेकिन दबाव झेलने की कला में रोहित और विराट का कोई सानी नहीं है और यही वजह है कि उन्हें 2027 विश्व कप टीम का हिस्सा जरूर होना चाहिए.
अमित मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा कि बड़े टूर्नामेंट केवल फॉर्म से नहीं जीते जाते, वहां अनुभव, मानसिक मजबूती और मुश्किल हालात में टीम को संभालने की क्षमता सबसे ज्यादा मायने रखती है. उनके मुताबिक, द्विपक्षीय सीरीज में रन ऊपर-नीचे हो सकते हैं, लेकिन विश्व कप जैसे मंच पर ऐसे खिलाड़ी चाहिए होते हैं, जो दबाव को खुद पर नहीं, बल्कि विपक्ष पर डाल सकें. मिश्रा का कहना है कि रोहित और विराट सिर्फ अपने प्रदर्शन से ही नहीं, बल्कि अपनी मौजूदगी से भी विरोधी टीमों पर मानसिक दबाव बना देते हैं.
गौरतलब है कि मई 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद रोहित शर्मा और विराट कोहली अब केवल वनडे प्रारूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. मौजूदा क्रिकेट कैलेंडर में जहां टी20 लीग और छोटे फॉर्मेट हावी हैं, वहीं वनडे मुकाबलों की संख्या सीमित हो गई है. इसी वजह से यह सवाल लगातार उठता रहा है कि क्या कम मैच खेलने से इन दोनों दिग्गजों की लय और फिटनेस पर असर पड़ेगा. आलोचक यह भी पूछते रहे हैं कि जब 2027 विश्व कप आएगा, तब रोहित 40 की उम्र पार कर चुके होंगे और विराट भी अपने करियर के अंतिम दौर में होंगे. लेकिन अमित मिश्रा इन आशंकाओं को उतनी अहमियत नहीं देते.
मिश्रा का मानना है कि क्रिकेट केवल रिफ्लेक्स और फिटनेस का खेल नहीं है, बल्कि यह दिमाग का खेल भी है और इस मामले में रोहित और विराट आज भी बेजोड़ हैं. उन्होंने कहा कि युवा कप्तान शुभमन गिल और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए इन दोनों का साथ सोने पर सुहागा होगा. ड्रेसिंग रूम में उनकी मौजूदगी, मैच के दौरान उनकी सलाह और मुश्किल समय में उनका अनुभव युवा खिलाड़ियों को बेहतर क्रिकेटर बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. मिश्रा के शब्दों में, भले ही हर मैच में शतक न आए, लेकिन उनका प्रभाव लगातार बना रहना चाहिए और यही इन दोनों की सबसे बड़ी खासियत है.
आंकड़े भी अमित मिश्रा की बातों को मजबूत करते हैं. मौजूदा साल में वनडे क्रिकेट में रोहित शर्मा और विराट कोहली भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे हैं. विराट ने 13 मैचों में 651 रन बनाए, जिसमें तीन शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं. उनका औसत 65 से ज्यादा और स्ट्राइक रेट 96 के आसपास रहा. वहीं रोहित शर्मा ने 14 पारियों में 650 रन बनाए, दो शतक और चार अर्धशतक के साथ उनका स्ट्राइक रेट 100 से ऊपर रहा. ये आंकड़े बताते हैं कि उम्र के इस पड़ाव पर भी दोनों बल्लेबाजों की भूख और क्षमता कम नहीं हुई है.
मिश्रा ने यह भी साफ किया कि सीनियर खिलाड़ी सिर्फ नाम के दम पर टीम में नहीं होने चाहिए. उनके मुताबिक, प्रदर्शन जरूरी है, लेकिन प्रदर्शन का मतलब हर मैच में बड़ी पारी खेलना नहीं होता. कई बार मैच का रुख बदलने वाली 40 या 50 रन की पारी, या मैदान पर मौजूद रहकर विपक्ष पर दबाव बनाना भी उतना ही अहम होता है. उन्होंने कहा कि जब रोहित और विराट जैसे खिलाड़ी क्रीज पर होते हैं, तो सामने वाली टीम हमेशा यह सोचती रहती है कि ये दोनों कभी भी मैच पलट सकते हैं.
घरेलू क्रिकेट को लेकर भी अमित मिश्रा ने अहम राय रखी. उनका मानना है कि चाहे खिलाड़ी कितना भी अनुभवी क्यों न हो, मैच प्रैक्टिस का कोई विकल्प नहीं होता. उन्होंने कहा कि अगर लीग स्टेज में चार मैच हैं, तो सीनियर खिलाड़ी दो खेल सकते हैं और दो में आराम कर सकते हैं, लेकिन पूरी तरह खेल से दूर रहना सही नहीं है. घरेलू मैचों से न सिर्फ शरीर लय में रहता है, बल्कि मानसिक मजबूती भी बनी रहती है. यही वजह है कि विराट कोहली और रोहित शर्मा का विजय हजारे ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट में खेलना बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
विराट कोहली पहले भी यह कह चुके हैं कि उनके लिए क्रिकेट की तैयारी शारीरिक से ज्यादा मानसिक होती है. उन्होंने यह भी माना है कि लगातार खेलने से ही लय बनी रहती है. रोहित शर्मा के लिए भी घरेलू क्रिकेट में वापसी को फैंस एक बड़े संकेत के तौर पर देख रहे हैं. इससे यह संदेश जाता है कि दोनों खिलाड़ी 2027 विश्व कप को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और खुद को हर स्तर पर तैयार रखना चाहते हैं.
भारतीय क्रिकेट इस वक्त बदलाव के दौर से गुजर रहा है. युवा खिलाड़ी तेजी से आगे आ रहे हैं, कप्तानी की जिम्मेदारी शुभमन गिल जैसे नए चेहरों के हाथ में है और टीम भविष्य की ओर देख रही है. ऐसे में रोहित और विराट जैसे अनुभवी खिलाड़ियों का साथ इस बदलाव को संतुलित बना सकता है. अमित मिश्रा की राय यही इशारा करती है कि टीम में अनुभव और युवाओं का सही मिश्रण ही भारत को एक बार फिर विश्व कप का प्रबल दावेदार बना सकता है.
2027 विश्व कप अभी दूर है, लेकिन चर्चाएं अभी से शुरू हो चुकी हैं. अमित मिश्रा की इस टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारतीय चयनकर्ता अनुभव को प्राथमिकता देंगे या पूरी तरह युवा सोच के साथ आगे बढ़ेंगे. फिलहाल इतना तय है कि जब तक रोहित शर्मा और विराट कोहली मैदान पर हैं, भारतीय क्रिकेट के पास दबाव में भरोसा करने के लिए दो सबसे मजबूत स्तंभ मौजूद रहेंगे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

