सनातन परंपरा में रुद्राक्ष को केवल आभूषण नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति, ग्रह-शांति और कर्म-संतुलन का सजीव प्रतीक माना गया है. शिव-साक्षात स्वरूप माने जाने वाले रुद्राक्ष का उल्लेख वेदों, उपनिषदों और पुराणों में विस्तार से मिलता है. मान्यता है कि रुद्राक्ष धारण करने से व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक कष्टों का निवारण होता है तथा जीवन में स्थिरता, आत्मबल और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक रुद्राक्ष किसी न किसी ग्रह, देवता और ऊर्जा से संबंधित होता है. इसी कारण कार्य-क्षेत्र, स्वभाव, जन्म कुंडली और जीवन-लक्ष्य के अनुरूप रुद्राक्ष का चयन विशेष महत्व रखता है. चाहे वह राजनीति हो, न्यायिक सेवा, चिकित्सा, शिक्षा, व्यापार, प्रशासन या तकनीकी क्षेत्र—उचित रुद्राक्ष धारण करने से निर्णय क्षमता, नेतृत्व शक्ति, एकाग्रता और कार्य-सफलता में वृद्धि होने की मान्यता है.
विशेष रूप से एक मुखी रुद्राक्ष को समस्त रुद्राक्षों में श्रेष्ठ माना गया है, जिसे शिव-स्वरूप, सूर्य-नियंत्रित और मोक्षदायक कहा गया है. इसके साथ ही विभिन्न मुखों वाले रुद्राक्ष अलग-अलग कार्यक्षेत्रों में उन्नति, बाधा-निवारण और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाले माने गए हैं. प्रस्तुत विवरण में शास्त्रीय मान्यताओं के आधार पर रुद्राक्षों के महत्व, उनके लाभ, धारण-विधि तथा विभिन्न व्यवसायों और जीवन-लक्ष्यों के अनुसार उपयुक्त रुद्राक्षों का क्रमबद्ध वर्णन किया गया है, जिससे साधक श्रद्धा और विवेक के साथ सही चयन कर सके.
रुद्राक्ष और कार्य-क्षेत्र के अनुसार धारण
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राजनेताओं को पूर्ण सफलता के लिए तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.
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न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोग एक मुखी और तेरह मुखी रुद्राक्ष, दोनों ओर चांदी के मोती लगवाकर पहनें.
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वकील चार मुखी और तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
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बैंक मैनेजर ग्यारह मुखी और तेरह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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चार्टर्ड अकाउंटेंट आठ मुखी और बारह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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पुलिस अधिकारी नौ मुखी और तेरह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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डॉक्टर एवं वैद्य नौ मुखी और ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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सर्जन दस मुखी, बारह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग तीन मुखी और चार मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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मैकेनिकल इंजीनियर दस मुखी और ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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सिविल इंजीनियर आठ मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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इलेक्ट्रिकल इंजीनियर सात मुखी और ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर चौदह मुखी और गौरी शंकर रुद्राक्ष पहनें.
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कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर नौ मुखी और बारह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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पायलट एवं वायुसेना अधिकारी दस मुखी और ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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अध्यापक छह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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ठेकेदार ग्यारह मुखी, तेरह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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प्रॉपर्टी डीलर एक मुखी, दस मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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दुकानदार दस मुखी, तेरह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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उद्योगपति बारह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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होटल मालिक एक मुखी, तेरह मुखी और चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें.
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विद्यार्थियों और बच्चों की शिक्षा के लिए गणेश रुद्राक्ष धारण कराना चाहिए.
एक मुखी रुद्राक्ष
एक मुखी रुद्राक्ष अत्यंत पवित्र, दुर्लभ और श्रेष्ठ माना गया है. यह बड़े भाग्यशाली व्यक्ति को ही प्राप्त होता है. इसके दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है तथा धारण करने से समस्त अनिष्ट दूर होकर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. नेपाल के असली गोल एक मुखी रुद्राक्ष के दर्शन भी बहुत कम लोगों को ही प्राप्त होते हैं.
शास्त्रीय मान्यताएं
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शिवपुराण में वर्णन है कि एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला व्यक्ति कभी गरीब नहीं होता.
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एक मुखी रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रतीक है और इसका अधिष्ठाता ग्रह सूर्य है. सूर्य की अनुकूलता, शुभ फल एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए इसे धारण किया जाता है.
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यह यश, प्रतिष्ठा, सफलता, व्यापार-वृद्धि और लक्ष्मी लाभ प्रदान करता है.
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यदि कुंडली में सूर्य नीच, पीड़ित या ग्रहण योग बना रहा हो, या सूर्य की दशा चल रही हो, तो एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना विशेष लाभकारी माना गया है. राजनीति में सफलता, मान-सम्मान और नेतृत्व शक्ति के लिए भी यह उपयोगी है.
एक मुखी रुद्राक्ष का महत्व
रुद्राक्षों में एक मुखी रुद्राक्ष सर्वोत्तम, शिव-स्वरूप और सर्वकामनासिद्धि देने वाला माना गया है. इसे धारण करने से मनोबल बढ़ता है, भय समाप्त होता है और साधक चिंतामुक्त होता है. इसके प्रभाव से शत्रु बाधाएं समाप्त होती हैं और साधना-उपासना में शीघ्र सफलता मिलती है. इसे मोक्षदायक भी माना गया है.
रुद्राक्ष और ज्योतिष
एक मुखी रुद्राक्ष का नियंत्रक ग्रह सूर्य है. यदि जन्मकुंडली में सूर्य षष्ठेश, अष्टमेश या द्वादशेश होकर लग्न, छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो अथवा अशुभ ग्रहों से पीड़ित हो, तो सूर्य अशुभ फल देता है. ऐसे में एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से सूर्य दोष का निवारण होता है. मेष, कर्क, सिंह और मीन राशि वालों के लिए इसे विशेष रूप से लाभकारी माना गया है.
एक मुखी रुद्राक्ष धारण से लाभ
पद्म पुराण में कहा गया है कि यह ब्रह्महत्या जैसे महापापों को भी नष्ट करने में समर्थ है—
एकवक्त्रः शिवः साक्षाद् ब्रह्महत्यां व्यपोहति.
तस्मात्तु धारयेद्देहे सर्वपापक्षयाय च॥
सूर्य से संबंधित रोग जैसे नेत्र पीड़ा, सिरदर्द, बुखार, हृदय, पाचन, हड्डी एवं यकृत संबंधी विकारों में भी यह सहायक माना गया है. सूर्य शासन और प्रशासन का कारक ग्रह है, इसलिए शासकीय कार्यों में बाधा हो तो भी इसका लाभ बताया गया है.
एक मुखी रुद्राक्ष धारण विधि एवं मंत्र
धारण से पूर्व स्नान कर शुद्ध होकर पूजा-स्थल में बैठें. विधिपूर्वक न्यास, ध्यान और जप करें. विभिन्न ग्रंथों में अलग-अलग मंत्र बताए गए हैं—
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पद्म पुराण: ॐ दृशं नमः या ॐ रुद्र
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शिवमहापुराण: ॐ ह्रीं नमः
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स्कंद पुराण: ॐ एम् नमः
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बृहज्जाबालोपनिषद: ॐ नमः शिवाय
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परंपरागत मंत्र: ॐ एं हं औं ऐं ॐ
कम से कम 108 बार जप कर सोमवार के दिन धारण करना श्रेष्ठ माना गया है.
धारण की विधि
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12 घंटे तक गाय के दूध या शुद्ध घी में रखें.
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पंचामृत से स्नान कराकर गंगाजल से शुद्ध करें.
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धूप-दीप, तिलक, अक्षत अर्पित कर ॐ नमः शिवाय का 108 बार जप करें.
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सूर्य देव का स्मरण करते हुए ॐ ह्रीं नमः का जप करें.
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शिवजी के समक्ष अर्पित कर लाल धागे या सोना-चांदी की माला में धारण करें.
सावधानियां
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श्मशान या दाह-संस्कार में जाते समय उतार दें.
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अशुद्ध हाथों से स्पर्श न करें.
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संभव हो तो प्राण-प्रतिष्ठा अवश्य कराएं.
कार्य-क्षेत्र और जीवन-लक्ष्य के अनुसार रुद्राक्ष धारण करना आध्यात्मिक, मानसिक और व्यावसायिक उन्नति के लिए शुभ और फलदायी माना गया है. सही विधि, श्रद्धा और संयम के साथ धारण किया गया रुद्राक्ष जीवन में संतुलन, सफलता और शांति प्रदान करता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

