आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ब्राउज़र जिस तेजी से आम लोगों की डिजिटल ज़िंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं, उसी तेजी से उनसे जुड़े जोखिमों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। अब खुद OpenAI ने एक ऐसे गंभीर खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसने टेक दुनिया में हलचल मचा दी है। OpenAI का कहना है कि ChatGPT Atlas और Perplexity Comet जैसे AI ब्राउज़र्स में मौजूद एक खामी ऐसी है, जिसे शायद कभी पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकेगा। यह खामी है ‘प्रॉम्प्ट इंजेक्शन’, जिसे साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ AI सिस्टम्स के लिए आने वाले समय का सबसे बड़ा सिरदर्द मान रहे हैं।
OpenAI के मुताबिक, प्रॉम्प्ट इंजेक्शन एक तरह का साइबर अटैक है, जिसमें हैकर चालाकी से ऐसे निर्देश छिपा देते हैं, जो AI सिस्टम को असली यूज़र के आदेश को नजरअंदाज करने और हमलावर के इशारों पर काम करने के लिए मजबूर कर देते हैं। यह हमला बाहर से देखने में बेहद सामान्य लगता है, लेकिन इसके पीछे का असर बेहद खतरनाक हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, किसी AI एजेंट को भेजे गए एक ईमेल में ऐसा मैलिशस टेक्स्ट छिपाया जा सकता है, जो AI को यह निर्देश दे कि वह यूज़र की रिक्वेस्ट को अनदेखा कर दे और इसके बजाय संवेदनशील टैक्स डॉक्यूमेंट्स या निजी डेटा सीधे हमलावर को भेज दे।
AI ब्राउज़र्स की सबसे बड़ी ताकत ही इस खतरे की जड़ बनती जा रही है। ChatGPT Atlas और Perplexity Comet जैसे प्लेटफॉर्म्स यूज़र को वेब पर नेविगेशन, ईमेल पढ़ने, डॉक्यूमेंट्स समझने और यहां तक कि निजी फाइल्स का सार निकालने जैसी सुविधाएं देते हैं। इसके लिए इन्हें बड़ी मात्रा में पर्सनल और प्रोफेशनल जानकारी तक पहुंच दी जाती है। OpenAI ने साफ कहा है कि यही व्यापक एक्सेस प्रॉम्प्ट इंजेक्शन को और ज्यादा खतरनाक बना देती है, क्योंकि एक बार अगर AI भ्रमित हो गया, तो वह बिना किसी बुरी मंशा के भी बेहद संवेदनशील जानकारी लीक कर सकता है।
टेक विशेषज्ञों का कहना है कि यह खतरा पारंपरिक ब्राउज़र्स से कहीं ज्यादा जटिल है। जहां सामान्य ब्राउज़र में मालवेयर या फिशिंग जैसी समस्याओं से निपटने के लिए एंटीवायरस और सिक्योरिटी पैच लगाए जा सकते हैं, वहीं AI सिस्टम्स इंसानी भाषा को समझने और उस पर प्रतिक्रिया देने के लिए बनाए गए हैं। इसी वजह से हैकर प्राकृतिक भाषा का इस्तेमाल कर AI को धोखा दे सकते हैं। OpenAI का मानना है कि चूंकि बड़े भाषा मॉडल जैसे GPT, Gemini और Llama इंस्ट्रक्शंस को समझने और प्राथमिकता देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, इसलिए उन्हें पूरी तरह ‘प्रॉम्प्ट इंजेक्शन-प्रूफ’ बनाना बेहद मुश्किल, अगर असंभव नहीं, तो जरूर है।
OpenAI की इस चेतावनी ने एंटरप्राइज़ सेक्टर में भी चिंता बढ़ा दी है। कई कंपनियां अब अपने कर्मचारियों को AI ब्राउज़र्स और AI एजेंट्स के जरिए ईमेल मैनेजमेंट, रिपोर्ट एनालिसिस और कस्टमर डेटा हैंडलिंग जैसे काम सौंप रही हैं। ऐसे में अगर किसी एक सिस्टम के जरिए भी डेटा लीक होता है, तो उसका असर लाखों यूज़र्स तक पहुंच सकता है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में हैकर सीधे इंसानों को निशाना बनाने के बजाय AI एजेंट्स को टारगेट करेंगे, क्योंकि एक सफल हमला कई गुना बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
OpenAI ने यह भी स्वीकार किया है कि फिलहाल इस समस्या का कोई परफेक्ट सॉल्यूशन मौजूद नहीं है। कंपनी लगातार सेफगार्ड्स, फिल्टर्स और मल्टी-लेयर सिक्योरिटी पर काम कर रही है, लेकिन इंसानी भाषा की जटिलता और AI की लचीलापन इस खतरे को पूरी तरह खत्म करने में सबसे बड़ी बाधा हैं। यही वजह है कि OpenAI इसे एक “परमानेंट रिस्क” के तौर पर देख रहा है, न कि अस्थायी बग के रूप में।
यूज़र्स के लिए यह चेतावनी भी उतनी ही अहम है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI ब्राउज़र्स का इस्तेमाल करते समय लोगों को यह समझना होगा कि वे एक बेहद शक्तिशाली लेकिन संवेदनशील टूल का उपयोग कर रहे हैं। निजी दस्तावेज़, बैंकिंग जानकारी या गोपनीय ईमेल को AI के जरिए प्रोसेस कराते वक्त अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। OpenAI ने संकेत दिया है कि भविष्य में AI ब्राउज़र्स में यह स्पष्ट किया जा सकता है कि कौन-सी जानकारी साझा करना सुरक्षित है और किस स्तर तक जोखिम बढ़ जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या AI ब्राउज़र्स भविष्य हैं या एक ऐसा जोखिम, जिसके साथ जीना सीखना पड़ेगा? ChatGPT Atlas और Perplexity Comet जैसे प्लेटफॉर्म्स ने इंटरनेट इस्तेमाल करने का तरीका बदल दिया है, लेकिन साथ ही उन्होंने साइबर सिक्योरिटी की परिभाषा को भी चुनौती दी है। जहां एक ओर ये टूल्स समय बचाते हैं और जानकारी को आसान बनाते हैं, वहीं दूसरी ओर एक गलत प्रॉम्प्ट या छिपा हुआ मैलिशस निर्देश बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकता है।
फिलहाल OpenAI और अन्य टेक कंपनियां इस खतरे को कम करने के लिए नए-नए उपायों पर काम कर रही हैं, लेकिन खुद OpenAI का यह मानना कि प्रॉम्प्ट इंजेक्शन को शायद कभी पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकेगा, आने वाले डिजिटल दौर की सबसे बड़ी चेतावनियों में से एक बन गया है। यह साफ संकेत है कि AI जितना स्मार्ट होगा, उसके साथ जोखिम भी उतने ही जटिल और गहरे होते जाएंगे।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

