प्रयागराज से लापता मां और 12 साल की नाबालिग बेटी जबलपुर में सुरक्षित मिलीं

प्रयागराज से लापता मां और 12 साल की नाबालिग बेटी जबलपुर में सुरक्षित मिलीं

प्रेषित समय :15:15:16 PM / Tue, Dec 23rd, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर.लगभग तीन सप्ताह तक अनिश्चितता, चिंता और सवालों के साये में रही एक कहानी का अंत आखिरकार राहत भरी खबर के साथ हुआ। प्रयागराज के एयरपोर्ट थाना क्षेत्र से करीब 20 दिन पहले लापता हुई एक महिला और उसकी 12 वर्षीय बेटी को पुलिस ने मध्य प्रदेश के जबलपुर से सुरक्षित खोज निकाला। यह खबर सामने आते ही न सिर्फ परिवार ने राहत की सांस ली, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों ने पुलिस की तत्परता और मानवीय पहल की सराहना की। घरेलू कलह से उपजी यह गुमशुदगी अब एक ऐसे सच के रूप में सामने आई है, जो समाज, परिवार और कानून-व्यवस्था तीनों के लिए कई सवाल छोड़ जाती है।

बताया जा रहा है कि महिला का अपने पति और ससुराल पक्ष से लंबे समय से विवाद चल रहा था। रोजमर्रा के तनाव, पारिवारिक तकरार और मानसिक दबाव ने धीरे-धीरे हालात को इस कदर बिगाड़ दिया कि एक दिन महिला ने अपनी नाबालिग बेटी का हाथ थामा और घर से निकल गई। न कोई सुसाइड नोट, न कोई साफ संकेत कि वह कहां जा रही है। घरवालों को शुरुआत में लगा कि शायद वह किसी रिश्तेदार के यहां गई होगी, लेकिन जब घंटों और फिर दिनों तक कोई संपर्क नहीं हुआ, तो चिंता गहराने लगी।

परिवार ने एयरपोर्ट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस के लिए यह मामला सिर्फ एक औपचारिक फाइल नहीं था, क्योंकि इसमें एक नाबालिग बच्ची भी शामिल थी। जांच की शुरुआत मोबाइल कॉल डिटेल, सोशल मीडिया गतिविधियों और रेलवे व बस अड्डों के सीसीटीवी फुटेज खंगालने से हुई। पुलिस को शुरुआती दिनों में कोई ठोस सुराग नहीं मिला, जिससे आशंकाएं और बढ़ गईं। परिजन हर दिन थाने के चक्कर काटते रहे और सोशल मीडिया के सहारे भी मदद की गुहार लगाई गई।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को पता चला कि महिला ने प्रयागराज छोड़ने के बाद कुछ समय के लिए अलग-अलग स्थानों पर ठहराव किया। वह लगातार अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रही थी, ताकि उसे खोजा न जा सके। पुलिस सूत्रों के अनुसार, महिला मानसिक रूप से काफी तनाव में थी और किसी भी तरह की पारिवारिक दखल से दूर रहना चाहती थी। इसी दौरान वह अपनी बेटी के साथ मध्य प्रदेश के जबलपुर पहुंच गई, जहां उसने अस्थायी रूप से रहना शुरू किया।

जबलपुर पहुंचने के बाद भी मां-बेटी पूरी तरह गुमनामी में नहीं रह सकीं। स्थानीय स्तर पर कुछ गतिविधियों और सूचना तंत्र के जरिए प्रयागराज पुलिस को सुराग मिला कि दोनों जबलपुर में देखी गई हैं। इसके बाद प्रयागराज और जबलपुर पुलिस के बीच समन्वय स्थापित किया गया। तकनीकी इनपुट और स्थानीय पुलिस की मदद से आखिरकार दोनों का पता लगा लिया गया।

जब पुलिस टीम मां-बेटी तक पहुंची, तो राहत की बात यह रही कि दोनों पूरी तरह सुरक्षित थीं। बच्ची स्वस्थ थी और महिला भी किसी प्रकार की शारीरिक हिंसा या अपराध का शिकार नहीं हुई थी। पुलिस ने मौके पर ही महिला से बात की और पूरे मामले की जानकारी ली। पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि घरेलू विवाद और लगातार तनाव के कारण वह यह कदम उठाने को मजबूर हुई थी। उसका कहना था कि वह कुछ समय के लिए शांति चाहती थी और अपनी बेटी को भी उस माहौल से दूर रखना चाहती थी, जहां रोज झगड़े होते थे।

पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया के तहत मां-बेटी को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और फिर परिजनों को सूचना दी। जैसे ही यह खबर परिवार तक पहुंची, भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। बीते 20 दिनों से जिन आंखों में डर और अनिश्चितता थी, उनमें उम्मीद और राहत लौट आई। परिजनों ने पुलिस का आभार जताया और कहा कि उन्होंने सबसे बुरे हालात की आशंका कर ली थी, लेकिन अब दोनों के सुरक्षित मिलने से जिंदगी फिर से पटरी पर आती दिख रही है।

यह मामला सिर्फ एक गुमशुदगी की खबर भर नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की उस सच्चाई को भी उजागर करता है, जहां घरेलू कलह कई बार महिलाओं को इतना अकेला कर देती है कि वे अचानक सब कुछ छोड़ देने का फैसला कर लेती हैं। खासतौर पर जब इसमें बच्चे शामिल हों, तो चिंता और जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में संवाद और पारिवारिक परामर्श की बड़ी भूमिका हो सकती है, ताकि हालात इस हद तक न पहुंचें।

सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से साझा की गई। लोगों ने एक ओर पुलिस की कार्यशैली की तारीफ की, तो दूसरी ओर घरेलू हिंसा और पारिवारिक तनाव जैसे मुद्दों पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई। कई यूजर्स ने लिखा कि अगर समय रहते परिवार और समाज सहयोगी भूमिका निभाए, तो ऐसे कदम उठाने की नौबत ही न आए। कुछ लोगों ने महिला के फैसले को समझने की कोशिश की, तो कुछ ने इसे बच्चे की सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा बताया।

फिलहाल पुलिस ने दोनों को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आगे किसी तरह का विवाद या दबाव की स्थिति न बने। प्रशासन ने परामर्श और आवश्यक कानूनी मदद की भी बात कही है, ताकि परिवार के भीतर संवाद बहाल हो सके। बच्ची की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

.ive Hindustan के अनुसार, यह मामला एक बार फिर यह याद दिलाता है कि गुमशुदगी की हर खबर के पीछे सिर्फ आंकड़े नहीं होते, बल्कि इंसानी रिश्तों की जटिलता, भावनाओं का बोझ और समाज की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। 20 दिनों की यह तलाश आखिरकार एक सुखद अंत तक पहुंची, लेकिन इसके पीछे छिपे सवाल अब भी हमारे सामने हैं—क्या हम समय रहते अपने घरों के भीतर पनप रहे तनाव को पहचान पाते हैं, और क्या समाज ऐसी महिलाओं के लिए सुरक्षित संवाद का रास्ता बना पा रहा है? यही इस खबर की असली गूंज है, जो जबलपुर से प्रयागराज तक महसूस की जा रही है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-