स्मार्ट टेक्नोलॉजी के बदलते दौर में अब कैमरा केवल हाथ में पकड़े जाने वाला उपकरण नहीं रह गया है, बल्कि वह धीरे-धीरे पहनने योग्य डिवाइस का रूप ले रहा है। इसी कड़ी में Meta और Ray-Ban की साझेदारी से पेश किए गए Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास तकनीकी जगत और आम उपभोक्ताओं के बीच चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं। कई वर्षों से स्मार्ट ग्लास बाजार में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन भारी डिजाइन, जटिल तकनीक और सीमित उपयोगिता के कारण वे आम लोगों तक नहीं पहुंच पाए। Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास ने इस धारणा को तोड़ने की कोशिश की है और इसे एक लाइफस्टाइल प्रोडक्ट के रूप में प्रस्तुत किया है।
Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास दिखने में आम Ray-Ban चश्मों जैसे ही हैं। पहली नजर में इन्हें देखकर कोई यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि ये एक हाई-टेक डिवाइस हैं। यही इनकी सबसे बड़ी खासियत मानी जा रही है। तकनीक को इस तरह छिपाकर पेश करना कि वह उपयोगकर्ता की रोजमर्रा की जिंदगी का सहज हिस्सा बन जाए, Meta की रणनीति का अहम हिस्सा है। यही कारण है कि ये ग्लास खास तौर पर युवाओं, ट्रैवलर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
इन स्मार्ट ग्लास में 12 मेगापिक्सल का अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है, जो फ्रेम में बेहद सलीके से फिट किया गया है। इसके अलावा, इनमें ओपन-ईयर स्पीकर्स और पांच माइक्रोफोन मौजूद हैं, जिनकी मदद से कॉल करना, ऑडियो रिकॉर्डिंग और Meta AI से बातचीत संभव है। “Hey Meta” कहकर वॉयस असिस्टेंट को सक्रिय किया जा सकता है, जिससे बिना हाथ लगाए कई काम किए जा सकते हैं। यह फीचर खास तौर पर उन परिस्थितियों में उपयोगी है, जहां फोन निकालना या कैमरा सेट करना मुश्किल होता है।
तकनीकी रूप से ये स्मार्ट ग्लास Qualcomm के Snapdragon AR1 Gen 1 प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं और Bluetooth 5.2 व Wi-Fi 6 कनेक्टिविटी को सपोर्ट करते हैं। Meta View ऐप के जरिए इन्हें स्मार्टफोन से जोड़ा जाता है, जहां से रिकॉर्ड किए गए फोटो और वीडियो सिंक होते हैं, साथ ही डिवाइस की सेटिंग्स और अपडेट भी मैनेज किए जा सकते हैं। कंपनी का दावा है कि एक बार चार्ज करने पर इनकी बैटरी करीब चार घंटे तक चलती है और चार्जिंग केस की मदद से अतिरिक्त चार्ज लिया जा सकता है।
इन ग्लासेस का असली आकर्षण इनका “हैंड्स-फ्री” अनुभव है। उपयोगकर्ता बिना फोन निकाले, केवल एक टैप या वॉयस कमांड से फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सकता है। खासकर ट्रैवल के दौरान, ऐतिहासिक जगहों पर घूमते समय, थीम पार्क या किसी कार्यक्रम में यह सुविधा बेहद उपयोगी साबित होती है। फोन कैमरे के साथ जहां हर पल फ्रेम सेट करने, हाथ स्थिर रखने और स्क्रीन देखने की चिंता रहती है, वहीं स्मार्ट ग्लास में उपयोगकर्ता पल में पूरी तरह मौजूद रह सकता है।
कंटेंट क्रिएटर्स के लिए यह तकनीक एक नए तरह का अनुभव देती है। POV यानी फर्स्ट-पर्सन पर्सपेक्टिव से रिकॉर्ड किए गए वीडियो दर्शकों को ज्यादा वास्तविक और इमर्सिव अनुभव देते हैं। यही कारण है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह के कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है। Meta Ray-Ban ग्लास इस जरूरत को सीधे संबोधित करते हैं और पारंपरिक हैंडहेल्ड कैमरों की तुलना में एक अलग अनुभव प्रदान करते हैं।
हालांकि, इन स्मार्ट ग्लास की कुछ सीमाएं भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चुनौती फ्रेमिंग की है। चूंकि उपयोगकर्ता यह नहीं देख सकता कि कैमरा क्या रिकॉर्ड कर रहा है, इसलिए कई बार शॉट सही एंगल में नहीं आ पाते। सिर की ऊंचाई, झुकाव और देखने के तरीके का सीधा असर रिकॉर्डिंग पर पड़ता है। इसे सीखने में समय लगता है और इसके बावजूद सटीकता की कमी बनी रहती है।
कम रोशनी में कैमरे का प्रदर्शन भी एक कमजोर पहलू माना जा रहा है। छोटे सेंसर की वजह से रात या कम रोशनी वाली परिस्थितियों में फोटो और वीडियो की क्वालिटी गिर जाती है और उनमें शोर नजर आता है। ऐसे में स्मार्टफोन के एडवांस कैमरा सिस्टम के सामने ये ग्लास अभी पीछे नजर आते हैं। इसके अलावा, बैटरी लाइफ भी सीमित है। ज्यादा वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान चार्जिंग केस की जरूरत अपेक्षा से जल्दी पड़ सकती है, जो लंबी यात्राओं में असुविधाजनक साबित हो सकती है।
भारत में Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास मई 2025 में लॉन्च किए गए थे, जिनकी शुरुआती कीमत 29,900 रुपये रखी गई थी। शुरुआत में ये केवल Ray-Ban India की वेबसाइट और चुनिंदा ऑफलाइन स्टोर्स पर उपलब्ध थे, लेकिन अब इन्हें Amazon, Flipkart और Reliance Digital जैसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध करा दिया गया है। इससे इनके उपभोक्ता आधार के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास स्मार्टफोन कैमरे की जगह ले सकते हैं। विशेषज्ञों और उपयोगकर्ताओं की राय में फिलहाल इसका जवाब नकारात्मक है। ये ग्लास प्लान्ड फोटोग्राफी, प्रोफेशनल शूट या कम रोशनी वाली परिस्थितियों में स्मार्टफोन का विकल्प नहीं बन सकते। लेकिन एक सेकेंडरी कैमरे के रूप में, खासकर रोजमर्रा के पलों, ट्रैवल और एक्सपीरियंस को रिकॉर्ड करने के लिए, ये बेहद प्रभावशाली साबित हो रहे हैं।
Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास दरअसल तकनीक के उस भविष्य की ओर इशारा करते हैं, जहां यादों को कैद करने के लिए इंसान को पल से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी। यह बदलाव धीरे-धीरे हो रहा है, लेकिन इसकी दिशा स्पष्ट है। आने वाले समय में जैसे-जैसे कैमरा सेंसर, बैटरी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सुधार होगा, स्मार्ट ग्लास जैसी तकनीकें और परिपक्व होंगी। फिलहाल, Meta Ray-Ban स्मार्ट ग्लास को स्मार्टफोन कैमरे का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक कहना ज्यादा उपयुक्त होगा, जो तकनीक और जीवनशैली के बीच की दूरी को कम करने की एक अहम कोशिश है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

