ईरान में आर्थिक भूचाल, 1 डॉलर 14 लाख रियाल पार करते ही सड़कों पर उतरी जनता, बाजार बंद, सेंट्रल बैंक प्रमुख ने दिया इस्तीफा

ईरान में आर्थिक भूचाल, 1 डॉलर 14 लाख रियाल पार करते ही सड़कों पर उतरी जनता, बाजार बंद, सेंट्रल बैंक प्रमुख ने दिया इस्तीफा

प्रेषित समय :21:46:24 PM / Tue, Dec 30th, 2025
Reporter : पलपल रिपोर्टर

तेहरान। ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा रियाल के ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंचते ही देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन भड़क उठे हैं। हालात ऐसे बन गए कि कई बड़े शहरों में बाजार बंद करने पड़े और सड़कों पर हजारों लोग उतर आए।

ईरान में हाल ही में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत 14 लाख 20 हजार रियाल तक पहुंच गई, जबकि सोमवार को यह थोड़ा संभलकर 13 लाख 80 हजार रियाल प्रति डॉलर पर ट्रेड करती दिखी। मुद्रा की इस ऐतिहासिक गिरावट ने आम जनता की आर्थिक परेशानियों को और गहरा कर दिया है।

तेहरान के साथ-साथ इस्फहान, शिराज और मशहद जैसे प्रमुख शहरों में रैलियां और जुलूस निकाले गए। कई स्थानों पर व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए और अन्य व्यापारियों से भी ऐसा ही करने की अपील की। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ILNA के अनुसार, बड़ी संख्या में कारोबारियों ने कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया।

प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए तेहरान के कुछ इलाकों में पुलिस को आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। जैसे-जैसे विरोध तेज हुआ, राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव भी बढ़ता गया। इसी बीच ईरान के केंद्रीय बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान (बैंक मरकजी) के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजिन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे संकट और गहरा गया।

बताया जा रहा है कि 2022 के बाद यह ईरान का सबसे बड़ा जनआंदोलन है। इससे पहले 2022 में महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिन्होंने ईरान की राजनीति और समाज को झकझोर दिया था।

आर्थिक संकट का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। पहले से ही ऊंची महंगाई के बीच खाने-पीने की चीजें, रोजमर्रा का सामान और जरूरी वस्तुएं लगातार महंगी होती जा रही हैं। हालात और बिगड़ने की आशंका इसलिए भी है क्योंकि सरकार ने दिसंबर 2025 में पांच साल बाद पेट्रोल की कीमतों में बड़ा बदलाव किया है।

ईरान में अब तीन-स्तरीय पेट्रोल मूल्य प्रणाली लागू की गई है। इसके तहत शुरुआती 60 लीटर पेट्रोल 15,000 रियाल प्रति लीटर, अगले 100 लीटर 30,000 रियाल प्रति लीटर और उससे अधिक पेट्रोल 50,000 रियाल प्रति लीटर की दर से मिलेगा। इससे आम नागरिकों का खर्च और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले 2019 में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद हुए हिंसक प्रदर्शनों में सैकड़ों लोगों की जान चली गई थी।

इसी बीच सरकारी मीडिया में यह भी खबरें सामने आई हैं कि ईरान सरकार आगामी ईरानी नववर्ष से टैक्स बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया जा सकता है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

इन हालात की जड़ 2018 में मानी जा रही है, जब अमेरिका ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ईरान परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध दोबारा लगाए गए और ईरान की अर्थव्यवस्था लगातार दबाव में आती चली गई।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सरकार से प्रदर्शनकारियों की “जायज मांगों” को सुनने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है, लेकिन सड़कों पर उतरी जनता फिलहाल ठोस राहत की मांग पर अड़ी हुई है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-