साल 2026 में चमकेंगे ये 'अबूझ मुहूर्त' जब बिना पंचांग देखे गूंजेंगी शहनाइयां और होंगे हर शुभ काम

साल 2026 में चमकेंगे ये

प्रेषित समय :22:10:34 PM / Thu, Jan 1st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

हिंदू धर्म और वैदिक परंपराओं में किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए 'मुहूर्त' को एक अनिवार्य शर्त माना जाता है, लेकिन साल 2026 अपने साथ कुछ ऐसी विशेष खगोलीय तिथियां लेकर आ रहा है, जहाँ समय खुद किसी प्रमाण पत्र का मोहताज नहीं होगा। ज्योतिष शास्त्र की भाषा में इन्हें 'अबूझ मुहूर्त' कहा जाता है—यानी वह समय जब ब्रह्मांड की ऊर्जा इतनी सकारात्मक और प्रबल होती है कि आपको किसी पंडित से शुभ घड़ी पूछने या पंचांग के पन्ने पलटने की आवश्यकता नहीं पड़ती। अक्सर गुरु या शुक्र तारा अस्त होने पर विवाह और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर 'ब्रेक' लग जाता है, लेकिन ये अबूझ मुहूर्त उस बंद रास्ते की 'मास्टर चाबी' साबित होते हैं। संस्कारधानी के विद्वानों के अनुसार, इन विशेष तिथियों पर किया गया कोई भी कार्य अक्षय फल देने वाला और निर्विघ्न संपन्न होता है।

साल 2026 के कैलेंडर में सबसे पहला बड़ा धमाका 23 जनवरी को होने जा रहा है, जब 'बसंत पंचमी' का अबूझ मुहूर्त रहेगा। विद्या की देवी सरस्वती की आराधना का यह दिन न केवल बच्चों की शिक्षा शुरू करने के लिए, बल्कि विवाह के बंधन में बंधने के लिए भी साल के सर्वश्रेष्ठ दिनों में गिना जाता है। इसके ठीक बाद, फाल्गुन मास की मस्ती के बीच 19 फरवरी को 'फुलेरा दूज' का पर्व आएगा। भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के प्रेम का प्रतीक यह दिन गृह प्रवेश और मुंडन संस्कार के लिए 'गोल्डन चांस' माना जाता है। इस दिन की विशेषता यह है कि इसमें दोषों का प्रभाव शून्य हो जाता है और केवल मंगलकारी ऊर्जा का संचार होता है।

जैसे ही तपती गर्मी का आगाज़ होगा, 19 अप्रैल को 'अक्षय तृतीया' का वह महा-मुहूर्त आएगा जिसका पूरे साल बेसब्री से इंतज़ार किया जाता है। सोने की खरीदारी से लेकर नए व्यापार की शुरुआत तक, यह दिन सौभाग्य का पर्याय है। इसके ठीक बाद 25 अप्रैल को 'जानकी नवमी' का पावन अवसर रहेगा, जो माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में अबूझ मुहूर्त की श्रेणी में आता है। वहीं, ज्येष्ठ मास की गर्मी में शीतलता का अहसास कराने वाला 'गंगा दशहरा' इस बार 25 मई को पड़ रहा है। माना जाता है कि इस दिन गंगा मैया का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, इसलिए आध्यात्मिक और भौतिक कार्यों की शुरुआत के लिए यह दिन किसी वरदान से कम नहीं है।

साल के उत्तरार्ध में जब आषाढ़ मास की बारिश दस्तक देगी, तब 22 जुलाई को 'भड़ली नवमी' का अबूझ मुहूर्त उन लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत लेकर आएगा जिनकी शादियां मुहूर्त न मिलने के कारण अटकी होती हैं। चातुर्मास शुरू होने से ठीक पहले यह मांगलिक कार्यों का आखिरी बड़ा अवसर होगा। और अंत में, चार महीने की योगनिद्रा के बाद जब भगवान विष्णु जागेंगे, तब 20 नवंबर को 'देवउठनी एकादशी' के साथ ही साल के शुभ कार्यों का महापर्व शुरू हो जाएगा। यह वह दिन है जब पूरे देश में एक साथ लाखों शहनाइयां गूंजती हैं। साल 2026 की ये तिथियां उन सभी के लिए एक बड़ी राहत हैं जो बाधाओं से मुक्त होकर अपने जीवन के नए अध्याय की शुरुआत करना चाहते हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-