AajKaDin: 4 जनवरी 2026, वर्ष 2026 में कामयाबी के लिए सूर्यदेव और कूष्मांडामाता की पूजा-अर्चना करें!

AajKaDin: 4 जनवरी 2026, वर्ष 2026 में कामयाबी के लिए सूर्यदेव और कूष्मांडामाता की पूजा-अर्चना करें!

प्रेषित समय :20:42:43 PM / Sat, Jan 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, बॉलीवुड एस्ट्रो एडवाइजर (व्हाट्सएप- 8302755688)
वर्ष 2026 सूर्यदेव का वर्ष है, इसलिए इस साल कामयाबी के लिए नियमितरूप से सूर्यदेव और कुष्मांड़ामाता की पूजा-अर्चना करें.
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्.
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्.
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहि दुःख शोक निवारिणीम्.
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥

* देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है.
* देवी दुर्गा का चौथा स्वरूप कूष्मांडा है.
* देवी कूष्मांडा, सिंह पर सवार हैं और सूर्यलोक में निवास करती हैं, जो क्षमता किसी भी अन्य देवी-देवता में नहीं है, इसलिए जब कोई कारक ग्रह अस्त हो जाए तो देवी कूष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.
* देवी कूष्मांडा अष्टभुजा धारी हैं और अस्त्र-शस्त्र के साथ माता के एक हाथ में अमृत कलश भी है.
* देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है.  
* देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना से सूर्य ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है.
* जिन श्रद्धालुओं की सूर्य की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें भी देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.
* सम्मान, सफलता आदि की कामना रखनेवाले श्रद्धालुओं को देवी कूष्मांडा की आराधना करनी चाहिए.
* जिन श्रद्धालुओं के पिता से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी कूष्मांडा की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी.
सूर्योपासना से प्राप्त होती है... जीवन शक्ति!
* पंचदेवों में से एकमात्र प्रत्यक्ष देव सूर्य की पूजा-अर्चना से जीवन शक्ति प्राप्त होती है, जीवन ऊर्जावान बनता है क्योंकि शेष सारे ग्रह सूर्यदेव से ही ऊर्जा प्राप्त करते हैं.
* विभिन्न राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से प्रसिद्धि/प्रतिष्ठा  प्राप्त होने के साथ साथ विविध लाभ भी होते हैं.
* मेष राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से संतान सुख और ज्ञान सुख प्राप्त होता है.
* वृष राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से घर/वाहन आदि भौतिक सुख प्राप्त होते हैं.
* मिथुन राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से पदोन्नति/पराक्रम की प्राप्ति होती है.
* कर्क राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से धन संचय का लाभ मिलता है.
* सिंह राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है.
* कन्या राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से विदेश जाने के और वहां प्रसिद्धि प्राप्त करने के अवसर प्राप्त होते हैं तथा व्यय नियंत्रण का लाभ मिलता है.
* तुला राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से धनलाभ होता है.
* वृश्चिक राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से उत्तम रोजगार के अवसर मिलते हैं, कर्मक्षेत्र में सम्मान मिलता है.
* धनु राशि/लग्न वालों का सूर्योपासना से भाग्योदय होता है तथा धर्मलाभ मिलता है.
* मकर राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से सर्वकष्टों से मुक्ति मिलती है.
* कुंभ राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से पारिवारिक सुख-शांति प्राप्त होती है.
* मीन राशि/लग्न वालों को सूर्योपासना से ऋण, रोग और शत्रु से मुक्ति मिलती है.
॥आरती श्री सूर्यदेव॥
जय कश्यप-नन्दन,ॐ जय अदिति नन्दन.
त्रिभुवन - तिमिर - निकन्दन,भक्त-हृदय-चन्दन॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
सप्त-अश्वरथ राजित,एक चक्रधारी.
दु:खहारी, सुखकारी,मानस-मल-हारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
सुर - मुनि - भूसुर - वन्दित,विमल विभवशाली.
अघ-दल-दलन दिवाकर,दिव्य किरण माली॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
सकल - सुकर्म - प्रसविता,सविता शुभकारी.
विश्व-विलोचन मोचन,भव-बन्धन भारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
कमल-समूह विकासक,नाशक त्रय तापा.
सेवत साहज हरतअति मनसिज-संतापा॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
नेत्र-व्याधि हर सुरवर,भू-पीड़ा-हारी.
वृष्टि विमोचन संतत,परहित व्रतधारी॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
सूर्यदेव करुणाकर,अब करुणा कीजै.
हर अज्ञान-मोह सब,तत्त्वज्ञान दीजै॥
जय कश्यप-नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन.
दैनिक चौघड़िया - 4 जनवरी 2026
* दिन का चौघड़िया
उद्वेग - 07:20 से 08:40
चर - 08:40 से 10:00
लाभ - 10:00 से 11:20
अमृत - 11:20 से 12:40
काल - 12:40 से 02:00
शुभ - 02:00 से 03:20
रोग - 03:20 से 04:40
उद्वेग - 04:40 से 06:00
* रात्रि का चौघड़िया
शुभ - 06:00 से 07:40
अमृत - 07:40 से 09:20
चर - 09:20 से 11:00
रोग - 11:00 से 12:40
काल - 12:40 से 02:20
लाभ - 02:20 से 04:00
उद्वेग - 04:00 से 05:40
शुभ - 05:40 से 07:20 
* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.
* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.
* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.
* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, विभिन्न पंचांगों, धर्मग्रथों से साभार ली गई है, स्थानीय समय, परंपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं, क्योंकि यहां दिया जा रहा समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय समय के सापेक्ष थोड़ा अलग हो सकता है.
* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-