ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच फंसे तीन हजार भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर गहराया संकट

ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच फंसे तीन हजार भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर गहराया संकट

प्रेषित समय :21:14:46 PM / Sat, Jan 3rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली। ईरान में लगातार फैल रहे हिंसक प्रदर्शनों और अस्थिर हालात के बीच वहां अध्ययनरत लगभग तीन हजार भारतीय मेडिकल छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। देशभर के मेडिकल छात्रों के संगठन ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन की विदेशी छात्र इकाई ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा, संरक्षा और भविष्य को लेकर तत्काल कदम उठाए जाएं।

जानकारी के अनुसार, ईरान के कई प्रमुख शहरों में बीते कुछ दिनों से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों, सड़कों और शैक्षणिक परिसरों के आसपास भी तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। ऐसे में ईरान के विभिन्न मेडिकल विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। छात्र संगठनों का कहना है कि आए दिन कर्फ्यू जैसे हालात, इंटरनेट सेवाओं में बाधा और सुरक्षाबलों की सख्ती के कारण छात्रों का सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जम्मू-कश्मीर इकाई के उपाध्यक्ष मोहम्मद मोमिन खान द्वारा विदेश मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि ईरान में स्थिति तेजी से बिगड़ रही है और भारतीय छात्र खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई शहरों में हिंसा और झड़पों की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे छात्र हॉस्टल से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं। छात्रों को खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

छात्र संगठन के अनुसार, ईरान में फिलहाल लगभग तीन हजार भारतीय मेडिकल छात्र विभिन्न विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और अन्य राज्यों से आने वाले छात्रों की है। इन छात्रों ने अपने परिवारों को फोन और सोशल मीडिया के जरिए हालात की जानकारी दी है, जिससे भारत में उनके परिजन भी बेहद चिंतित हैं। कई परिवारों ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था करे।

इस मुद्दे को लेकर जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। संगठन ने प्रधानमंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पत्र में कहा गया है कि जिस तरह से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं, उसे देखते हुए दूतावास स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाए और छात्रों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा जाए।

छात्र संगठनों का कहना है कि अभी तक कई छात्रों को स्थानीय प्रशासन या विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। इंटरनेट सेवाओं में रुकावट के कारण छात्रों को भारत में अपने परिवारों और दूतावास से संपर्क करने में भी दिक्कत हो रही है। इससे मानसिक तनाव और भय का माहौल और गहरा गया है। कई छात्रों ने बताया कि कक्षाएं अनियमित हो गई हैं और परीक्षाओं को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

भारत सरकार की ओर से अब तक इस मामले पर औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पूर्व में भी यूक्रेन, सूडान और अन्य संकटग्रस्त देशों से भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए भारत सरकार ने विशेष अभियान चलाए थे। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि ईरान के मामले में भी आवश्यक होने पर सरकार ठोस कदम उठा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा है। ईरान जैसे देश में जहां पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और राजनीतिक तनाव की स्थिति रही है, वहां अचानक भड़के हिंसक प्रदर्शनों ने हालात को और जटिल बना दिया है। मेडिकल शिक्षा के लिए ईरान को चुनने वाले भारतीय छात्रों की संख्या बीते कुछ वर्षों में बढ़ी है, क्योंकि यहां की फीस तुलनात्मक रूप से कम है और पाठ्यक्रम भी मान्य है। लेकिन मौजूदा हालात ने इन छात्रों के भविष्य को असमंजस में डाल दिया है।

छात्र संगठनों ने विदेश मंत्रालय से यह भी मांग की है कि ईरान में स्थित भारतीय दूतावास में एक विशेष हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम सक्रिय किया जाए, ताकि संकट की घड़ी में छात्रों को तत्काल सहायता मिल सके। इसके साथ ही छात्रों के आवासीय क्षेत्रों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर ईरानी प्रशासन से भी समन्वय किया जाए।

ईरान में जारी अस्थिरता के बीच भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर उठी यह चिंता अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनती जा रही है। परिवारों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों की निगाहें अब भारत सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। सभी की यही अपेक्षा है कि सरकार समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप करे और विदेश में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को इस संकट से सुरक्षित बाहर निकाला जाए या कम से कम उनकी सुरक्षा को लेकर ठोस और भरोसेमंद व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-