वेदोक्त मान्यताओं में मंगलवार की हनुमान साधना, संकटमोचन का अचूक मार्ग

वेदोक्त मान्यताओं में मंगलवार की हनुमान साधना, संकटमोचन का अचूक मार्ग

प्रेषित समय :22:51:43 PM / Mon, Jan 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भारतीय सनातन परंपरा में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन की गई श्रद्धा पूर्वक पूजा, व्रत और साधना से जीवन की अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से भूत-प्रेत बाधा, नजर दोष, भय और शत्रु पीड़ा से रक्षा के लिए मंगलवार को हनुमान जी की आराधना को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। इसी आस्था के चलते देशभर में मंगलवार के दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जाती है और हनुमान उपासना को लेकर लोगों में विशेष उत्साह रहता है।

धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं के अनुसार मंगलवार को यथासंभव हनुमान मंदिर जाकर दर्शन करना श्रेष्ठ माना गया है। श्रद्धालु हनुमान जी को लाल रंग के पुष्प, विशेष रूप से लाल गुलाब अर्पित करते हैं। साथ ही इत्र अर्पित करने की भी परंपरा है, जिसे भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। प्रसाद के रूप में बूंदी, लाल पेड़े या गुड़-चना चढ़ाने की मान्यता प्रचलित है। भक्तों का विश्वास है कि इन विधियों से की गई पूजा से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।

धार्मिक आस्था के अनुसार हनुमान जी की पूजा से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है। लोकविश्वास में माना जाता है कि भूत-प्रेत बाधा, ऊपरी साया या बुरी नज़र जैसी समस्याओं से ग्रस्त व्यक्ति को मंगलवार की हनुमान उपासना विशेष राहत प्रदान करती है। इसके साथ ही शत्रु बाधा, मुकदमेबाजी, भय और मानसिक अशांति जैसी स्थितियों में भी हनुमान जी की कृपा से मार्ग प्रशस्त होता है। इसी कारण कई श्रद्धालु नियमित रूप से मंगलवार का व्रत रखते हैं और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति की कामना करते हैं।

ज्योतिष और तंत्र परंपराओं में हनुमान जी को रुद्रावतार माना गया है। इसी संदर्भ में उनका एक विशेष मंत्र “हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्” अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से व्यक्ति के भीतर साहस, आत्मविश्वास और शक्ति का संचार होता है। साथ ही नकारात्मक शक्तियां और भय दूर रहते हैं। मंगलवार को इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से विशेष फल प्राप्त होने की बात कही जाती है।

धार्मिक मान्यताओं में मंगलवार के दिन कुछ विशेष संयमों का भी उल्लेख मिलता है। परंपरा के अनुसार इस दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटना या कटवाना वर्जित माना गया है। विश्वास किया जाता है कि मंगलवार को बाल या दाढ़ी कटवाने से आयु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसी कारण कई लोग इस दिन नाई के पास जाने से परहेज करते हैं और इसे संयम तथा अनुशासन का प्रतीक मानते हैं। हालांकि आधुनिक समाज में इसे व्यक्तिगत आस्था का विषय माना जाता है, फिर भी बड़ी संख्या में लोग आज भी इस परंपरा का पालन करते हैं।

मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा और व्रत को विशेष पुण्यदायी माना गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु प्रायः दिनभर सात्त्विक भोजन करते हैं और संध्या के समय पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि इस दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। कई स्थानों पर सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ आयोजित किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं। इससे न केवल धार्मिक भावना सुदृढ़ होती है, बल्कि सामाजिक एकता भी मजबूत होती है।

हनुमान उपासना का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इसे केवल संकट टालने तक सीमित नहीं माना गया है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि हनुमान जी की आराधना से चरित्र बल, सेवा भाव और कर्तव्यनिष्ठा का विकास होता है। हनुमान जी को ब्रह्मचारी, आज्ञाकारी और पराक्रमी माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा को जीवन में अनुशासन और नैतिक मूल्यों से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि युवा वर्ग में भी हनुमान चालीसा पाठ और मंगलवार व्रत के प्रति रुचि बढ़ती दिखाई दे रही है।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि इस प्रकार की धार्मिक परंपराएं केवल आस्था तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक होती हैं। नियमित पूजा-पाठ से व्यक्ति के मन में सकारात्मकता आती है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। विशेष रूप से जब व्यक्ति भय, तनाव या अनिश्चितता से गुजर रहा होता है, तब हनुमान उपासना उसे मानसिक संबल प्रदान करती है।

आज के आधुनिक और तेज़ रफ्तार जीवन में भी मंगलवार की हनुमान पूजा की परंपरा अपनी जड़ें मजबूत बनाए हुए है। शहरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें देखी जाती हैं। कहीं बूंदी का भोग चढ़ाया जा रहा होता है, तो कहीं लाल ध्वज और सिंदूर से हनुमान जी का श्रृंगार किया जाता है। भक्तों के चेहरे पर यह विश्वास साफ झलकता है कि उनकी श्रद्धा और भक्ति से संकट दूर होंगे और जीवन में स्थिरता आएगी।

मंगलवार की हनुमान उपासना भारतीय समाज में आस्था, परंपरा और मानसिक शक्ति का प्रतीक बन चुकी है। लाल गुलाब, इत्र, प्रसाद, मंत्र जाप और पाठ के माध्यम से की गई यह साधना न केवल धार्मिक कर्मकांड है, बल्कि लाखों लोगों के लिए आशा और भरोसे का स्रोत भी है। यही कारण है कि समय के साथ-साथ भी मंगलवार का यह महत्व कम नहीं हुआ, बल्कि नई पीढ़ी के बीच भी इसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ती जा रही है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-