सनातन परंपरा में वर्ष 2026 के दौरान पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी के लिए प्रमुख स्नान पर्वों की तिथियां घोषित

सनातन परंपरा में वर्ष 2026 के दौरान पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी के लिए प्रमुख स्नान पर्वों की तिथियां घोषित

प्रेषित समय :22:22:12 PM / Tue, Jan 6th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं बल्कि मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में पूजा जाता है और इसी श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 के लिए प्रमुख स्नान पर्वों की विस्तृत सूची और धार्मिक महत्व के विवरण सामने आए हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार नए साल में मकर संक्रांति से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक कई ऐसे विशेष अवसर आएंगे जब देश की पवित्र नदियों विशेषकर गंगा, यमुना, नर्मदा और शिप्रा के तटों पर लाखों श्रद्धालुओं का जमावड़ा देखने को मिलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन विशिष्ट तिथियों पर किया गया स्नान न केवल शरीर की शुद्धि करता है बल्कि आत्मा को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्त कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। 

साल का सबसे पहला और महत्वपूर्ण स्नान पर्व 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाएगा जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे और उत्तरायण की यात्रा शुरू करेंगे। इस दिन को देवताओं का दिन माना जाता है और मान्यता है कि इस समय वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार अपने चरम पर होता है इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा या किसी भी पवित्र सरोवर में स्नान करना आध्यात्मिक उन्नति के लिए अनिवार्य माना गया है।

जनवरी के महीने में ही दूसरा बड़ा अवसर 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के रूप में आएगा जिसे माघ मास की सबसे पवित्र तिथि माना जाता है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा का जल अमृत के समान गुणकारी हो जाता है और इस दिन मौन रहकर स्नान करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है जिससे मानसिक शांति और आत्मिक बल में वृद्धि होती है।

 इसके ठीक बाद माघ महीने की पूर्णता पर 1 फरवरी 2026 को माघ पूर्णिमा का स्नान पर्व आयोजित होगा जिसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन के बारे में यह प्रचलित है कि स्वयं भगवान विष्णु गंगा जल में निवास करते हैं और जो भक्त इस दिन तिल, अन्न, घी और कंबल का दान करते हैं उन्हें अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। माघ स्नान की यह परंपरा प्रयागराज के कल्पवास से भी जुड़ी हुई है जहां श्रद्धालु पूरे एक महीने तक संयम और नियमों का पालन करते हुए नदियों के सानिध्य में रहते हैं।

ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ ही 25 मई 2026 को गंगा दशहरा का महापर्व मनाया जाएगा जो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को पड़ता है। यह वही ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दिन है जब भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा में डुबकी लगाने से व्यक्ति के दस प्रकार के पापों का शमन होता है जिसमें कायिक, वाचिक और मानसिक पाप शामिल हैं। 

साल के अंत में जब शीत ऋतु का प्रभाव बढ़ने लगता है तब 24 नवंबर 2026 को कार्तिक पूर्णिमा का महान स्नान पर्व आएगा जिसे देव दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है और इस दिन नदियों में दीपदान करने की परंपरा है जिससे पितरों को तृप्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। ज्योतिषियों का कहना है कि वर्ष 2026 के ये स्नान पर्व ग्रहों की विशेष स्थितियों के कारण और भी फलदायी होने वाले हैं क्योंकि इस दौरान ग्रहों का गोचर दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ फल देने वाला रहेगा।

इन स्नान पर्वों की महत्ता केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है क्योंकि ये अवसर पूरे देश को एक सूत्र में पिरोते हैं और लोग अपनी क्षेत्रीय सीमाओं को छोड़कर तीर्थ स्थलों पर एकत्रित होते हैं। प्रशासन ने भी अभी से इन तिथियों को लेकर अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं ताकि मकर संक्रांति और मौनी अमावस्या जैसे बड़े आयोजनों पर श्रद्धालुओं को सुरक्षा और स्वच्छता का पूरा लाभ मिल सके। हरिद्वार, काशी, प्रयागराज और उज्जैन जैसे तीर्थ नगरों में इन दिनों विशेष मेलों का आयोजन भी किया जाएगा जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को नई दिशा प्रदान करेंगे। पंडितों का परामर्श है कि यदि कोई व्यक्ति इन तिथियों पर पवित्र नदियों तक जाने में असमर्थ है तो वह घर पर ही नहाने के जल में गंगाजल की कुछ बूंदें डालकर स्नान कर सकता है और दान-पुण्य के माध्यम से समान फल प्राप्त कर सकता है। कुल मिलाकर वर्ष 2026 का कैलेंडर धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही समृद्ध रहने वाला है जो श्रद्धालुओं को भक्ति और सेवा के कई अवसर प्रदान करेगा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-