जबलपुर. कटनी और बीना के बीच रेल यातायात के इतिहास में 6 जनवरी 2026 का दिन एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया, जब लंबे समय से प्रतीक्षित तीसरी रेल लाइन के पूर्ण होने के बाद रेल सुरक्षा आयुक्त यानी सीआरएस की विशेष ट्रेन ने इस खंड पर सफल ट्रायल रन पूरा किया. 263 किलोमीटर लंबी इस तीसरी लाइन के चालू होने की प्रक्रिया के अंतिम और सबसे अहम चरण के रूप में हुए इस निरीक्षण ने न केवल पश्चिम मध्य रेलवे के इंजीनियरिंग कौशल पर मुहर लगाई है, बल्कि लाखों यात्रियों और देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी नए रास्ते खोल दिए हैं.
सुबह से ही कटनी जंक्शन पर एक अलग ही हलचल देखने को मिली. रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, सुरक्षा कर्मी और इंजीनियर पूरी तरह मुस्तैद नजर आए. प्लेटफॉर्म पर फूलों से सजी सीआरएस स्पेशल ट्रेन जैसे ही खड़ी दिखाई दी, माहौल में उत्साह और गर्व साफ झलकने लगा. यह वही क्षण था, जिसका इंतजार वर्षों से किया जा रहा था. ट्रेन के प्रस्थान के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि जबलपुर रेल मंडल की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक अब अपने लक्ष्य तक पहुंच चुकी है.
इस विशेष ट्रेन के जरिए पूरे ट्रैक का बारीकी से निरीक्षण किया गया. अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से पटरियों की मजबूती, बैलास्ट की गुणवत्ता, पुलों और पुलियाओं की सहन क्षमता, सिग्नल सिस्टम और ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों का गहन परीक्षण किया गया. तेज रफ्तार पर ट्रेन के संतुलन और कंपन को भी रिकॉर्ड किया गया ताकि भविष्य में यात्री और मालगाड़ियों के संचालन में किसी भी तरह का जोखिम न रहे. रेल सुरक्षा आयुक्त की मौजूदगी में हुए इस ट्रायल को रेलवे सुरक्षा मानकों की कसौटी पर अंतिम परीक्षा माना जाता है.
कटनी बीना रेल खंड पर तीसरी लाइन की मांग पिछले एक दशक से लगातार उठ रही थी. यह मार्ग देश के सबसे व्यस्त रेल गलियारों में शामिल है, जहां एक ओर यात्री ट्रेनों की संख्या तेजी से बढ़ी, वहीं दूसरी ओर कोयला, सीमेंट और अन्य औद्योगिक माल ढोने वाली मालगाड़ियों का भारी दबाव लगातार बना रहा. नतीजा यह हुआ कि ट्रेनों को घंटों आउटर पर खड़ा रहना पड़ता था, समय पालन बिगड़ जाता था और यात्रियों की नाराजगी बढ़ती चली गई थी. अब तीसरी लाइन के जुड़ने से इस दबाव में उल्लेखनीय कमी आना तय माना जा रहा है.
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस नई लाइन के चालू होने से ट्रेनों की क्रॉसिंग की समस्या लगभग समाप्त हो जाएगी. जबलपुर से दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य बड़े शहरों की ओर जाने वाली प्रमुख एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों को निर्बाध मार्ग मिलेगा. इससे न केवल ट्रेनों की औसत गति बढ़ेगी बल्कि समय की भी बड़ी बचत होगी. जानकारों के अनुसार, इस खंड पर जहां पहले औसतन 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार संभव हो पाती थी, वहीं अब यह बढ़कर 110 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. इसका सीधा लाभ यात्रियों को कम यात्रा समय के रूप में मिलेगा.
निर्माण कार्य के दौरान रेलवे को कई कठिन भौगोलिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. दमोह और सागर के बीच पहाड़ी इलाके, नदियों और नालों पर बड़े पुलों का निर्माण और भूमि अधिग्रहण जैसी जटिल प्रक्रियाओं ने परियोजना को चुनौतीपूर्ण बना दिया था. बावजूद इसके पश्चिम मध्य रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने आधुनिक तकनीक, भारी मशीनरी और निरंतर निगरानी के जरिए इस विशाल कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कर दिखाया. इस परियोजना में हजारों श्रमिकों और तकनीकी कर्मियों ने दिन-रात मेहनत की, जिसका परिणाम आज सबके सामने है.
सीआरएस ट्रायल रन के दौरान सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई. ट्रैक के आसपास के गांवों और बस्तियों में पहले से मुनादी कराई गई थी ताकि लोग रेल लाइन से दूर रहें. ट्रायल के समय ट्रेन की गति सामान्य से अधिक रखी गई थी, जिससे हर संभावित स्थिति की जांच की जा सके. जैसे ही यह विशेष ट्रेन बीना स्टेशन पर सुरक्षित पहुंची, वहां मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संतोष और खुशी की लहर दौड़ गई.
इस परियोजना का महत्व केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं है. कटनी बीना रेल खंड देश के प्रमुख कोयला परिवहन मार्गों में से एक है. तीसरी लाइन के शुरू होने से मालगाड़ियों का संचालन कहीं अधिक सुचारू हो सकेगा, जिससे रेलवे के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है. साथ ही, सागर, दमोह और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से मध्य प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी.
रेलवे अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि तीसरी लाइन के चालू होने के बाद अब पुराने दो ट्रैकों के रखरखाव और मरम्मत का काम भी अधिक आसानी से किया जा सकेगा. ट्रैफिक को नई लाइन पर डायवर्ट कर पटरियों की मरम्मत संभव होगी, जिससे रेल नेटवर्क की उम्र बढ़ेगी और सुरक्षा स्तर और मजबूत होगा. यह बदलाव लंबे समय में रेल दुर्घटनाओं की आशंका को भी कम करेगा.
क्षेत्रीय जनता और यात्रियों में इस खबर को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है. जबलपुर, कटनी और बीना जैसे प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों को उम्मीद है कि अब उन्हें घंटों लेट ट्रेनों की समस्या से राहत मिलेगी. महाकौशल एक्सप्रेस सहित कई महत्वपूर्ण गाड़ियों के समय पालन में सुधार आने की संभावना जताई जा रही है, जिससे वर्षों पुरानी शिकायतें दूर हो सकेंगी.
कटनी बीना तीसरी रेल लाइन पर हुआ यह सफल सीआरएस ट्रायल रन भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे के विस्तार की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है. यह परियोजना न केवल जबलपुर रेल मंडल बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के विकास की नई पटकथा लिखने जा रही है. अब औपचारिक उद्घाटन और नियमित परिचालन के साथ ही इस 263 किलोमीटर लंबे खंड पर ट्रेनों की आवाज एक नई रफ्तार, नए भरोसे और नए भविष्य की घोषणा करती सुनाई देगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

