SC का इस परीक्षा पर बड़ा आदेश: अगर एक बार भी आरक्षण का लाभ लिया तो जनरल सीट पर हक नहीं

SC का इस परीक्षा पर बड़ा आदेश: अगर एक बार भी आरक्षण का लाभ लिया तो जनरल सीट पर हक नहीं

प्रेषित समय :18:45:58 PM / Wed, Jan 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार ने यूपीएससी जैसी परीक्षा में किसी भी चरण पर आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह सामान्य श्रेणी की सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता. यह फैसला केंद्र सरकार की अपील पर सुनाया गया, जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी.

यह मामला भारतीय वन सेवा परीक्षा 2013 से जुड़ा है. परीक्षा तीन चरणों में हुई थी, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार. प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य श्रेणी का कटऑफ 267 अंक था, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 233 अंक तय किए गए थे. अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार जी किरण ने रियायती कटऑफ का लाभ लेते हुए 247.18 अंक के साथ परीक्षा पास की थी. वहीं सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार एंटनी एस मारियप्पा ने 270.68 अंक प्राप्त कर जनरल कटऑफ पर सफलता हासिल की थी.

अंतिम मेरिट लिस्ट में किसे मिली कौन सी रैंक?

अंतिम मेरिट लिस्ट में जी किरण को 19वीं रैंक और एंटनी को 37वीं रैंक मिली थी. कैडर आवंटन के समय कर्नाटक में केवल एक जनरल इनसाइडर वैकेंसी उपलब्ध थी और अनुसूचित जाति के लिए कोई इनसाइडर वैकेंसी नहीं थी. केंद्र सरकार ने यह जनरल इनसाइडर पोस्ट एंटनी को दी और जी किरण को तमिलनाडु कैडर आवंटित किया. कर्नाटक हाईकोर्ट ने बाद में यह कहते हुए जी किरण को जनरल कैडर में नियुक्त करने का आदेश दिया था कि उसकी अंतिम रैंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से बेहतर थी. केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची.

सुप्रीम कोर्ट ने ये सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई शामिल थे, ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण की छूट लेता है, तो वह नियम 2013 के तहत सामान्य श्रेणी की सूची में शामिल नहीं हो सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि बाद के चरणों में बेहतर प्रदर्शन करने के आधार पर सामान्य सीट का दावा नहीं किया जा सकता.
 

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार ने यूपीएससी जैसी परीक्षा में किसी भी चरण पर आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह सामान्य श्रेणी की सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता. यह फैसला केंद्र सरकार की अपील पर सुनाया गया, जिसमें कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी.

यह मामला भारतीय वन सेवा परीक्षा 2013 से जुड़ा है. परीक्षा तीन चरणों में हुई थी, प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार. प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य श्रेणी का कटऑफ 267 अंक था, जबकि अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 233 अंक तय किए गए थे. अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार जी किरण ने रियायती कटऑफ का लाभ लेते हुए 247.18 अंक के साथ परीक्षा पास की थी. वहीं सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार एंटनी एस मारियप्पा ने 270.68 अंक प्राप्त कर जनरल कटऑफ पर सफलता हासिल की थी.

अंतिम मेरिट लिस्ट में किसे मिली कौन सी रैंक?

अंतिम मेरिट लिस्ट में जी किरण को 19वीं रैंक और एंटनी को 37वीं रैंक मिली थी. कैडर आवंटन के समय कर्नाटक में केवल एक जनरल इनसाइडर वैकेंसी उपलब्ध थी और अनुसूचित जाति के लिए कोई इनसाइडर वैकेंसी नहीं थी. केंद्र सरकार ने यह जनरल इनसाइडर पोस्ट एंटनी को दी और जी किरण को तमिलनाडु कैडर आवंटित किया. कर्नाटक हाईकोर्ट ने बाद में यह कहते हुए जी किरण को जनरल कैडर में नियुक्त करने का आदेश दिया था कि उसकी अंतिम रैंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से बेहतर थी. केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची.

सुप्रीम कोर्ट ने ये सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस जे के माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई शामिल थे, ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि यदि कोई उम्मीदवार परीक्षा के किसी भी चरण में आरक्षण की छूट लेता है, तो वह नियम 2013 के तहत सामान्य श्रेणी की सूची में शामिल नहीं हो सकता. कोर्ट ने यह भी कहा कि बाद के चरणों में बेहतर प्रदर्शन करने के आधार पर सामान्य सीट का दावा नहीं किया जा सकता.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-