श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने पर उपजा भारी जनाक्रोश, एनएमसी के औचक निरीक्षण पर उठे गंभीर राजनीतिक सवाल

श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज की मान्यता रद्द होने पर उपजा भारी जनाक्रोश, एनएमसी के औचक निरीक्षण पर उठे गंभीर राजनीतिक सवाल

प्रेषित समय :21:48:10 PM / Wed, Jan 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कटरा. जम्मू-कश्मीर के धार्मिक और शैक्षणिक परिदृश्य में उस समय एक अभूतपूर्व भूचाल आ गया जब नेशनल मेडिकल कमीशन ने श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में चल रहे एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अनुमति अचानक वापस ले ली. बुधवार की सुबह जब कॉलेज प्रशासन ने नम आँखों के साथ छात्रों को अपना सामान समेटने और घर वापस जाने का फरमान सुनाया, तो पूरे संस्थान में चीख-पुकार और सन्नाटा एक साथ पसर गया. 'वे हमारे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?'—यह केवल एक छात्र का विलाप नहीं था, बल्कि उन सैकड़ों भविष्य के डॉक्टरों, प्रोफेसरों और प्रबंधकों की सामूहिक आवाज थी, जिन्होंने इस संस्थान को अपने पसीने से सींचा था. पत्रकारिता के गलियारों और स्थानीय गलियों में अब इस कार्रवाई को एनएमसी का 'स्वांग' और राजनीति से प्रेरित एक 'पूर्वनिर्धारित' फैसला बताया जा रहा है.

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे चौंकाने वाली परत तब खुली जब कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस बात का खुलासा किया कि उन्हें एनएमसी के निरीक्षण के लिए केवल 15 मिनट का नोटिस दिया गया था. किसी भी मेडिकल कॉलेज के बुनियादी ढांचे, फैकल्टी और लैब की गहन जांच के लिए सालों की तैयारी और घंटों के निरीक्षण की आवश्यकता होती है, लेकिन यहाँ केवल चंद मिनटों में एक पूरे संस्थान की किस्मत पर ताला जड़ दिया गया. अधिकारियों का आरोप है कि यह निरीक्षण महज़ एक औपचारिकता थी, क्योंकि फैसला पहले ही कहीं और लिया जा चुका था. उल्लेखनीय है कि यह वही कॉलेज है जो पिछले कुछ महीनों से सांप्रदायिक तनाव और मुस्लिम छात्रों के बहिष्कार की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बना हुआ था. ऐसे में एनएमसी की इस बिजली जैसी फुर्तीली कार्रवाई को सीधे तौर पर उन राजनीतिक दबावों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिन्होंने संस्थान के भीतर एक खास किस्म के ध्रुवीकरण की कोशिश की थी.

संस्थान के गलियारों से बाहर निकलते छात्रों के चेहरों पर अनिश्चितता और गुस्से के भाव साफ पढ़े जा सकते थे. मिड-टर्म की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह किसी मानसिक आघात से कम नहीं है कि उनकी डिग्री और अब तक की मेहनत एक झटके में शून्य कर दी गई. विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि नियमों का उल्लंघन था भी, तो छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग क्यों नहीं चुना गया? क्या 15 मिनट का नोटिस किसी पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है? ये सवाल अब प्रशासन की मंशा पर गहरे दाग लगा रहे हैं. कॉलेज प्रबंधन ने दबी जुबान में स्वीकार किया है कि संस्थान को निशाना बनाना दरअसल उन ताकतों की जीत है जो इस मेडिकल कॉलेज के समावेशी स्वरूप को बदलना चाहती थीं.

स्थानीय निवासियों और छात्रों के परिजनों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि माँ वैष्णो देवी के नाम पर स्थापित इस पवित्र संस्थान को राजनीति की भेंट चढ़ा दिया गया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मुस्लिम छात्रों की मौजूदगी को मुद्दा बनाकर पहले माहौल बिगाड़ा गया और जब बात नहीं बनी, तो एनएमसी जैसी नियामक संस्था का इस्तेमाल कर संस्थान की जड़ें ही काट दी गईं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना भारत में स्वायत्त संस्थानों की निष्पक्षता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है. क्या अब मेडिकल शिक्षा का भविष्य भी चुनावी गणित और ध्रुवीकरण की प्रयोगशाला बनेगा? फिलहाल, कॉलेज परिसर पुलिस के साये में है और कक्षाएं अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी गई हैं, लेकिन  कटरा   की पहाड़ियों में गूंज रहा 'न्याय' का सवाल अब दिल्ली के सत्ता गलियारों तक पहुँच चुका है. आने वाले दिनों में यह विवाद केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक बड़े कानूनी और राजनीतिक संग्राम का रूप लेने के लिए तैयार है, क्योंकि छात्रों ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-