नारकंडा, चकराता, तीर्थन घाटी, शोजा और मुनस्यारी के शांत पर्वतीय स्वर्ग , पर्यटकों के लिए बन रहे विंटर वेकेशन की पहली पसंद

नारकंडा, चकराता, तीर्थन घाटी, शोजा और मुनस्यारी के शांत पर्वतीय स्वर्ग , पर्यटकों के लिए बन रहे विंटर वेकेशन की पहली पसंद

प्रेषित समय :21:41:40 PM / Wed, Jan 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

पहाड़ों की रानी शिमला में पर्यटन के बढ़ते बोझ और बेतहाशा भीड़ ने अब यात्रियों का मोहभंग करना शुरू कर दिया है। कभी अपनी शांति और बर्फीली वादियों के लिए मशहूर शिमला अब भारी ट्रैफिक जाम, खचाखच भरी सड़कों और हाउसफुल होटलों का केंद्र बन गया है। इस शोर-शराबे से बचने के लिए भारतीय पर्यटक अब उन अनछुए और शांत ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं जहाँ हिमालय की गोद में सुकून के दो पल बिताए जा सकें। नारकंडा, चकराता, तीर्थन घाटी, शोजा और मुनस्यारी जैसे स्थान अब शांतिप्रिय यात्रियों के लिए नए विंटर डेस्टिनेशन बनकर उभर रहे हैं, जो शिमला की भीड़भाड़ वाली व्यावसायिकता को कड़ी चुनौती दे रहे हैं।

शिमला से कुछ ही दूरी पर स्थित नारकंडा उन लोगों के लिए सबसे बड़ा विकल्प बनकर उभरा है जो बिना ट्रैफिक जाम के बर्फबारी का आनंद लेना चाहते हैं। सेब के बागानों और घने जंगलों से घिरा यह क्षेत्र अपनी 'हाटू पीक' के शानदार नज़ारों के लिए जाना जाता है। नारकंडा की सबसे बड़ी खूबी इसका कम विकसित होना है, जो इसे व्यावसायिक शोर से दूर रखता है। इसी तरह उत्तराखंड का चकराता अपनी अछूती सुंदरता और शांत वातावरण के लिए चर्चा में है। यहाँ का सीमित विकास ही इसकी असली पहचान है, जहाँ चीड़ के जंगल और पथरीले रास्ते प्रकृति प्रेमियों को एक ऐसा अनुभव प्रदान करते हैं जो अब भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशनों में मिलना नामुमकिन है।

हिमाचल प्रदेश की तीर्थन घाटी भी शांति के नए केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हो रही है। 'ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क' के मुहाने पर बसी यह घाटी अपनी साफ-सुथरी नदी और घने जंगलों के कारण परिवारों और जोड़ों की पहली पसंद बन गई है। यहाँ की व्यावसायिकता से मुक्त हवा पर्यटकों को वह स्पेस देती है जिसकी तलाश में वे पहाड़ों पर आते हैं। वहीं जालौरी दर्रे के रास्ते में स्थित छोटा सा गांव 'शोजा' अपनी सादगी और हिमालय के अबाधित दृश्यों के लिए जाना जा रहा है। शोजा में कोई व्यस्त बाजार या शोरगुल नहीं है, यहाँ केवल सुबह की शांति और बर्फीले जंगलों का सुकून है, जो शिमला के व्यस्त माल रोड के बिल्कुल विपरीत है।

साहसिक यात्रियों और ट्रेकर्स के लिए उत्तराखंड का मुनस्यारी एक नया स्वर्ग साबित हो रहा है। पंचाचूली चोटियों के अद्भुत नज़ारों और ताजी पहाड़ी हवा के साथ मुनस्यारी वह शांति प्रदान करता है जो अब मुख्यधारा के हिल स्टेशनों में दुर्लभ हो गई है। पर्यटन के क्षेत्र में आ रहा यह बदलाव स्पष्ट संकेत देता है कि भारतीय यात्री अब केवल गंतव्य नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण अनुभव की तलाश में हैं। इस बढ़ते रुझान का सीधा असर पर्यटन उद्योग पर पड़ रहा है, जहाँ अब अनछुए क्षेत्रों में ईको-फ्रेंडली इन्फ्रास्ट्रक्चर और सतत पर्यटन  को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए सुखद है बल्कि यह यात्रियों को पहाड़ों के साथ एक गहरा और वास्तविक संबंध बनाने का अवसर भी प्रदान कर रहा है।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-