नई दिल्ली. केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए नए साल की शुरुआत बड़ी खुशखबरी के साथ होने जा रही है क्योंकि जनवरी 2026 से लागू होने वाले महंगाई भत्ते (DA) के आंकड़ों की तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो गई है. श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा जारी नवंबर 2025 के ऑल इंडिया प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आंकड़ों ने इस संभावना को प्रबल कर दिया है कि अगले रिवीजन में डीए में 3 से 5 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है.
नवंबर का सूचकांक 148.2 पर रहा है, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. महंगाई भत्ते का निर्धारण हर छह महीने में होने वाली एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य बढ़ती महंगाई के असर को कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर कम करना होता है. इससे पहले जुलाई 2025 में सरकार ने महंगाई भत्ते को 54 प्रतिशत से बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया था, और अब सबकी निगाहें जनवरी 2026 के नए बदलावों पर टिकी हैं.
इस पूरे कैलकुलेशन को समझने के लिए औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर गौर करना जरूरी है, क्योंकि यही वह आधार है जिसके जरिए सरकार डीए की गणना करती है. कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दिसंबर 2025 का एआईसीपीआई डेटा 147 से 148 के दायरे में बना रहता है, तो कर्मचारियों की झोली में अच्छी खासी बढ़ोतरी आएगी. ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, यदि दिसंबर महीने का सूचकांक 147 के स्तर पर आता है, तो डीए में न्यूनतम 3 प्रतिशत की वृद्धि तय है. वहीं, यदि महंगाई की रफ्तार इसी तरह बनी रहती है और दिसंबर का आंकड़ा नवंबर के स्तर यानी 148.2 के इर्द-गिर्द रुकता है, तो केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 5 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में कुल महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकता है, जो कर्मचारियों की मासिक टेक-होम सैलरी में एक सम्मानजनक इजाफा करेगा.
महंगाई भत्ते में होने वाली इस संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर न केवल सरकारी खजाने पर पड़ेगा, बल्कि देश के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के जीवन स्तर पर भी दिखेगा. जनवरी 2026 का यह रिवीजन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. आमतौर पर जब महंगाई भत्ता एक निश्चित सीमा को पार कर जाता है, तो वेतन संरचना में आमूलचूल बदलाव की मांग उठने लगती है. वर्तमान आंकड़ों के हिसाब से डीए का कैलकुलेशन यह संकेत दे रहा है कि सरकार कर्मचारियों को राहत देने के लिए मध्यम से ऊपरी स्तर तक की बढ़ोतरी का विकल्प चुन सकती है. हालांकि, आधिकारिक घोषणा के लिए अभी दिसंबर के अंतिम आंकड़ों का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन मौजूदा रुझानों ने कर्मचारी संगठनों के बीच एक सकारात्मक माहौल तैयार कर दिया है.
सैलरी के गणित को देखें तो 3 से 5 प्रतिशत की यह वृद्धि मूल वेतन के आधार पर तय की जाती है. यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 18,000 रुपये है, तो 3 प्रतिशत की वृद्धि का अर्थ है प्रतिमाह करीब 540 रुपये का इजाफा, जबकि 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर यह राशि 900 रुपये तक जा सकती है. उच्च स्तर के अधिकारियों के लिए यह वृद्धि हजारों में होगी. पेंशनभोगियों के लिए भी यह महंगाई राहत (DR) के रूप में एक बड़ी मदद साबित होगी, खासकर उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए जो अपनी दवाओं और दैनिक जरूरतों के लिए पूरी तरह पेंशन पर निर्भर हैं. आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि जिस तरह से खाद्य वस्तुओं और आवश्यक सेवाओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, उसे देखते हुए 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना अधिक तर्कसंगत प्रतीत होती है. सरकार आमतौर पर बजट सत्र या उससे ठीक पहले इन आंकड़ों के आधार पर कैबिनेट की मंजूरी के बाद औपचारिक घोषणा करती है.
फिलहाल, कर्मचारी संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है और वे सरकार पर इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि महंगाई के वास्तविक प्रभाव को देखते हुए गणना में किसी भी तरह की कटौती न की जाए. मंजीत सिंह पटेल जैसे नेताओं का तर्क है कि कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने के लिए एआईसीपीआई के हर पॉइंट को बारीकी से शामिल करना अनिवार्य है. जनवरी 2026 का यह डीए रिवीजन केवल एक वित्तीय सुधार नहीं है, बल्कि यह आगामी 8वें वेतन आयोग की आधारशिला भी रख सकता है. जैसे-जैसे दिसंबर के आंकड़ों के जारी होने का समय नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सचिवालयों और सरकारी कार्यालयों में कैलकुलेटर की टिक-टिक तेज होती जा रही है. अंतिम तस्वीर अगले कुछ हफ्तों में पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन नवंबर के 148.2 के इंडेक्स ने इतना तो सुनिश्चित कर दिया है कि नए साल में केंद्रीय कर्मचारियों की जेब पहले के मुकाबले ज्यादा भरी होगी.
DA निकालने का फॉर्मूला क्या है
पटेल ने महंगाई भत्ता निकालने का आधिकारिक फॉर्मूला उदाहरण के साथ समझाया है:
DA (%) = [{(पिछले 12 महीनों का औसत AICPI-IW × 2.88) − 261.41} / 261.41] × 100 − मौजूदा DA (%)
पहला उदाहरण: अगर AICPI-IW 148.2 रहता है, तो महंगाई भत्ता निकालने का हिसाब इस तरह बनता है. 148.2 को 2.88 से गुणा करने पर आंकड़ा 426.81 आता है. इसमें से 261.41 घटाने के बाद वैल्यू 165.4 रह जाती है.
इसे 261.41 से भाग देने पर परिणाम 0.63 आता है, जिसे 100 से गुणा करने पर कुल DA 63 प्रतिशत निकलता है. मौजूदा 58 प्रतिशत DA घटाने के बाद इसमें करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी बनती है.
दूसरा उदाहरण: अगर AICPI-IW 147 रहता है, तो 147 को 2.88 से गुणा करने पर आंकड़ा 423.36 आता है. इसमें से 261.41 घटाने के बाद वैल्यू 161.95 रह जाती है.
इसे 261.41 से भाग देने पर नतीजा 0.61 निकलता है, जिसे 100 से गुणा करने पर कुल DA करीब 61 प्रतिशत बनता है. मौजूदा 58 प्रतिशत DA घटाने के बाद इस स्थिति में महंगाई भत्ते में लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है.
कितना होगा DA, कितनी बढ़ेगी सैलरी
अगर DA में 3 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो इसका सीधा फायदा सैलरी में दिखेगा. उदाहरण के तौर पर, 50,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर मौजूदा 58 प्रतिशत DA करीब 29,000 रुपये बनता है. DA अगर 61 प्रतिशत हो जाता है, तो यह बढ़कर लगभग 30,500 रुपये हो जाएगा, यानी हर महीने करीब 1,500 रुपये ज्यादा मिलेंगे.
वहीं DA अगर 63 प्रतिशत तक पहुंचता है, तो इसी बेसिक सैलरी पर महंगाई भत्ता करीब 31,500 रुपये हो जाएगा. इसका मतलब है कि मौजूदा DA के मुकाबले करीब 2,500 रुपये प्रति महीने की बढ़ोतरी होगी. कुल मिलाकर, DA में यह इजाफा कर्मचारियों की इनकम पर साफ असर डालेगा.
सरकार DA बढ़ने का ऐलान कब करेगी?
ये सभी कैलकुलेशन अनुमान पर आधारित हैं और सिर्फ समझाने के लिए दिए गए हैं. जनवरी 2026 के लिए असली DA कितना बढ़ेगा, यह तभी साफ होगा जब श्रम मंत्रालय दिसंबर 2025 का AICPI-IW डेटा जारी करेगा.
आमतौर पर केंद्र सरकार जनवरी से लागू होने वाले DA का ऐलान मार्च या अप्रैल में करती है.
8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद
फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि 7th Central Pay Commission का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुका है.
8th Central Pay Commission के गठन के बाद, नवंबर 2025 से करीब 18 महीने में यह आयोग फिटमेंट फैक्टर पर अपनी सिफारिश देगा. यही फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों की अगली बेसिक सैलरी बढ़ोतरी तय करेगा.
फिटमेंट फैक्टर लागू होते ही महंगाई भत्ता शून्य पर रीसेट होकर बेसिक पे में मर्ज कर दिया जाएगा. हालांकि, पटेल पहले यह सुझाव दे चुके हैं कि DA को पूरी तरह खत्म करने के बजाय कोई ऐसा तरीका अपनाया जाना चाहिए, जिससे ऊंची महंगाई के दौर में कर्मचारियों की खरीदने की ताकत बनी रहे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

