ईडी के छापों के बीच ममता बनर्जी का आई-पैक ठिकानों पर पहुंचना जांच एजेंसी से टकराव, राजनीतिक साजिश और संवैधानिक बहस तेज

ईडी के छापों के बीच ममता बनर्जी का आई-पैक ठिकानों पर पहुंचना जांच एजेंसी से टकराव, राजनीतिक साजिश और संवैधानिक बहस तेज

प्रेषित समय :18:05:59 PM / Thu, Jan 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति गुरुवार को उस समय अभूतपूर्व टकराव की गवाह बनी, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास और कोलकाता स्थित आई-पैक कार्यालय पहुंच गईं. इस घटनाक्रम ने न केवल जांच एजेंसी और राज्य सरकार के बीच टकराव को खुली सड़कों पर ला दिया, बल्कि इसे केंद्र बनाम राज्य, संवैधानिक मर्यादा और राजनीतिक नैतिकता की बहस के केंद्र में भी ला खड़ा किया.

ईडी ने इसी दिन कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करते हुए आरोप लगाया कि आई-पैक से जुड़े परिसरों में चल रही तलाशी के दौरान उसे गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ा. एजेंसी का दावा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उनके सहयोगियों और पुलिस की मौजूदगी में भौतिक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जबरन हटाया गया, जिससे पीएमएलए के तहत चल रही जांच प्रभावित हुई. ईडी ने इसे जांच में अवैध हस्तक्षेप करार देते हुए अदालत से हस्तक्षेप और दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की.

ईडी की कार्रवाई गुरुवार सुबह कोलकाता के साल्टलेक स्थित गोडरेज वाटरसाइड परिसर में आई-पैक के कार्यालय और सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर शुरू हुई. जैसे-जैसे तलाशी की खबर फैली, तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और समर्थकों की गतिविधियां तेज होती गईं. कुछ ही देर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं प्रतीक जैन के आवास पहुंचीं और बाद में आई-पैक कार्यालय भी गईं. मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने जांच को राजनीतिक रंग दे दिया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई.

ममता बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में ईडी पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि एजेंसी तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने के उद्देश्य से राजनीतिक रणनीति से जुड़े अहम दस्तावेज और डिजिटल डेटा अपने साथ ले गई है. मुख्यमंत्री का दावा था कि ईडी ने पार्टी की रणनीतिक बैठकों से संबंधित सूचनाएं, संगठनात्मक दस्तावेज और संभावित उम्मीदवारों की सूची तक जब्त कर ली, जो किसी भी तरह से धन शोधन से संबंधित नहीं हैं. उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला और चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करार दिया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आई-पैक एक राजनीतिक सलाहकार संस्था है, जो विभिन्न दलों के साथ काम करती रही है और उसका कामकाज पूरी तरह पेशेवर और वैध है. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच किसी वित्तीय अनियमितता से जुड़ी है तो फिर राजनीतिक रणनीति से जुड़े दस्तावेज क्यों जब्त किए गए. ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को डराने और दबाव में लाने के लिए किया जा रहा है.

वहीं, ईडी ने अपने आधिकारिक बयान में मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया. एजेंसी ने कहा कि आई-पैक परिसरों पर की गई तलाशी पूरी तरह साक्ष्य-आधारित थी और किसी भी राजनीतिक दल या नेता को निशाना बनाने का उद्देश्य नहीं था. ईडी का कहना है कि जांच पीएमएलए के तहत चल रही है और उससे जुड़े साक्ष्यों के आधार पर ही दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं. एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत की जा रही कार्रवाई में बाधा डालना गंभीर अपराध है.

ईडी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को बताया कि तलाशी के दौरान अचानक बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा पैदा हुआ. एजेंसी का आरोप है कि इस माहौल में जांच दल पर दबाव बनाया गया और कुछ साक्ष्यों को हटाने या अपने कब्जे में लेने की कोशिश की गई. ईडी के अनुसार, यह स्थिति न केवल जांच की निष्पक्षता के लिए खतरा थी, बल्कि एजेंसी के अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता का विषय बन गई.

इस मामले को न्यायमूर्ति सुव्रता घोष की पीठ के समक्ष मेंशन किया गया, जहां अदालत ने ईडी को याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी. अदालत के इस कदम को मामले की गंभीरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. अब उच्च न्यायालय में यह तय होना है कि जांच एजेंसी के आरोपों में कितना दम है और क्या वास्तव में तलाशी के दौरान अवैध हस्तक्षेप हुआ.

राजनीतिक मोर्चे पर इस घटनाक्रम ने तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं. तृणमूल कांग्रेस ने इसे संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए कहा है कि केंद्र सरकार बंगाल में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना चाहती है. पार्टी नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री का मौके पर जाना जनता के चुने हुए प्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाना था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई गैरकानूनी कार्रवाई न हो.

इसके उलट, विपक्षी दलों और भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि किसी जांच एजेंसी की कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री का मौके पर पहुंचना और हस्तक्षेप करना संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है. भाजपा नेताओं ने इसे जांच को प्रभावित करने का प्रयास बताते हुए ईडी के आरोपों का समर्थन किया है.

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केंद्र-राज्य संबंधों की एक जटिल तस्वीर पेश करता है. एक ओर केंद्रीय एजेंसियों की स्वायत्तता का सवाल है, तो दूसरी ओर निर्वाचित राज्य सरकार की राजनीतिक आशंकाएं हैं. अदालत के सामने अब यह चुनौती होगी कि वह कानून के शासन को बनाए रखते हुए दोनों पक्षों के अधिकारों और सीमाओं को स्पष्ट करे.

आई-पैक छापे और उसके बाद मुख्यमंत्री की सक्रिय भूमिका ने बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. यह केवल एक जांच का मामला नहीं रह गया, बल्कि यह सत्ता, संस्थानों और लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच संतुलन की परीक्षा बन गया है. आने वाले दिनों में कलकत्ता उच्च न्यायालय की सुनवाई और उसके आदेश इस बात का संकेत देंगे कि इस टकराव की दिशा क्या होगी और इसके दूरगामी राजनीतिक और कानूनी प्रभाव कैसे सामने आएंगे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-