जननायक बनाम पराशक्ति: पोंगल 2026 की इस बॉक्स ऑफिस भिड़ंत ने बदला तमिल सिनेमा और राजनीति का समीकरण

जननायक बनाम पराशक्ति: पोंगल 2026 की इस बॉक्स ऑफिस भिड़ंत ने बदला तमिल सिनेमा और राजनीति का समीकरण

प्रेषित समय :19:22:38 PM / Thu, Jan 8th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

तमिलनाडु में पोंगल का त्यौहार केवल फसल उत्सव नहीं, बल्कि सिनेमाई महायुद्ध का पर्याय भी है। लेकिन साल 2026 का पोंगल इतिहास के पन्नों में सुनहरे और विवादित अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। इस बार का मुकाबला केवल दो फिल्मों के बीच नहीं, बल्कि दो विचारधाराओं और दो पीढ़ियों के बीच है। एक तरफ 'थलापति' विजय की आखिरी फिल्म 'जननायक' है, तो दूसरी तरफ 'प्रिंस' शिवकार्तिकेयन की बहुप्रतीक्षित 'पराशक्ति'। इन दोनों फिल्मों के इर्द-गिर्द बुने गए संयोग और विवाद इस त्यौहार को बेहद खास और सनसनीखेज बना रहे हैं।

सिनेमा के पर्दे पर चुनावी जंग की आहट

इस भिड़ंत का सबसे बड़ा पहलू राजनीतिक है। सुपरस्टार विजय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि 'जननायक' उनकी सिनेमाई पारी की अंतिम फिल्म (Swansong) है, जिसके बाद वे अपनी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) के जरिए 2026 के विधानसभा चुनावों में पूरी तरह उतर जाएंगे। दिलचस्प संयोग यह है कि इस फिल्म का मुकाबला 'पराशक्ति' से हो रहा है, जिसका शीर्षक दिवंगत द्रविड़ दिग्गज एम. करुणानिधि की प्रतिष्ठित फिल्म से लिया गया है।

सुधा कोंगरा द्वारा निर्देशित 'पराशक्ति' 1960 के दशक के द्रविड़ छात्र आंदोलन पर आधारित एक पीरियड ड्रामा है। इसे रेड जायंट मूवीज द्वारा वितरित किया जा रहा है, जो राज्य के उपमुख्यमंत्री और डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन की कंपनी है। सोशल मीडिया पर चर्चा गर्म है कि यह मुकाबला वास्तव में विजय की नई पार्टी बनाम सत्तारूढ़ डीएमके का 'प्रॉक्सि वॉर' है।

पोंगल 2026: एक अनोखा बॉक्स ऑफिस संयोग

इस फेस्टिव सीजन को खास बनाने वाले कुछ प्रमुख संयोग निम्नलिखित हैं:

  • तारीखों का टकराव: विजय की 'जननायक' 9 जनवरी 2026 को रिलीज हो रही है, जबकि शिवकार्तिकेयन की 'पराशक्ति' ठीक अगले दिन 10 जनवरी को दस्तक देगी। शिवकार्तिकेयन ने हाल ही में खुलासा किया कि वे इस टकराव से हैरान थे, क्योंकि उन्होंने 'जननायक' की दिवाली रिलीज को देखते हुए पोंगल की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में विजय की टीम ने भी इसी तारीख को चुना।

    सेंसर बोर्ड का विवाद: रिलीज से ठीक पहले 'जननायक' को सेंसर बोर्ड (CBFC) की ओर से देरी का सामना करना पड़ा है। विजय के प्रशंसकों और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों का आरोप है कि केंद्र सरकार और भाजपा राजनीतिक कारणों से फिल्म की रिलीज में अड़ंगा डाल रही है, जिससे इस सिनेमाई भिड़ंत में राष्ट्रीय राजनीति का तड़का भी लग गया है।

  • एक युग का अंत और नए की शुरुआत: जहाँ 'जननायक' एक लीजेंड की विदाई का प्रतीक है, वहीं 'पराशक्ति' शिवकार्तिकेयन को तमिल सिनेमा के अगले बड़े सुपरस्टार के रूप में स्थापित करने की कोशिश है। खुद विजय ने शिवकार्तिकेयन को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि "पोंगल पर दोनों फिल्मों के लिए पर्याप्त जगह है।"

'पराशक्ति' केवल एक फिल्म नहीं बल्कि द्रविड़ आंदोलन का सम्मान है, जो हिंदी थोपे जाने के विरोध (Anti-Hindi Imposition) की भावनाओं को फिर से जीवंत करती है। वहीं, 'जननायक' के ट्रेलर में विजय के किरदार को एक ऐसे नेता के रूप में दिखाया गया है जो मौजूदा व्यवस्था और भ्रष्टाचार को चुनौती देता है।

फिल्म विश्लेषकों का मानना है कि लगभग 1300 करोड़ रुपये का दांव इस पोंगल पर लगा हुआ है। पोंगल की इस लड़ाई का परिणाम केवल बॉक्स ऑफिस के नंबर तय नहीं करेगा, बल्कि यह आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए जनता के मूड का भी संकेत देगा।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-