नर्मदा जल पर सियासी तूफान के बीच नगर निगम ने खोले प्लांट के दरवाज़े, जनता ने खुद देखी सच्चाई

नर्मदा जल पर सियासी तूफान के बीच नगर निगम ने खोले प्लांट के दरवाज़े, जनता ने खुद देखी सच्चाई

प्रेषित समय :20:08:45 PM / Fri, Jan 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. नर्मदा जल प्रदूषण को लेकर सियासी बयानबाज़ी के बीच जबलपुर नगर निगम ने पारदर्शिता और जवाबदेही का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसने बहस को जमीन पर लाकर खड़ा कर दिया. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा ग्वारीघाट में सीवेज का पानी मिलने की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने के बाद भले ही राजनीति गरमाई हो, लेकिन नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इससे पहले ही शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर जरूरी कार्य और निगरानी प्रक्रिया जारी थी. इसी क्रम में नगर निगम ने प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय निवासियों को शहर के जल शोधन संयंत्रों का प्रत्यक्ष निरीक्षण कराकर यह दिखाने का प्रयास किया कि नर्मदा का पानी किस तरह वैज्ञानिक और मानक प्रक्रियाओं से गुजरकर शहरवासियों के घरों तक पहुंचता है.

नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार के निर्देश पर आयोजित इस भ्रमण में नागरिकों को ललपुर, रांझी, भोंगा द्वार और रमनगरा स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट ले जाया गया. निगमायुक्त स्वयं भी पूरे समय मौजूद रहे और अधिकारियों के साथ मिलकर नागरिकों को हर चरण की जानकारी देते रहे. भ्रमण का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं था, बल्कि जल आपूर्ति को लेकर उठ रहे सवालों का प्रत्यक्ष और तथ्यात्मक जवाब देना भी था. नागरिकों ने अपनी आंखों से देखा कि नर्मदा से लिया गया कच्चा पानी किस तरह विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं से गुजरकर शुद्ध होता है.

प्लांट में मौजूद इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने नागरिकों को बताया कि सबसे पहले नदी से रॉ वाटर इंटेक की प्रक्रिया के तहत पानी लिया जाता है. इसके बाद सेडिमेंटेशन और आधुनिक फिल्टर बेड के जरिए पानी में मौजूद सूक्ष्म कण, मिट्टी और अन्य अशुद्धियों को अलग किया जाता है. इसके अगले चरण में क्लोरीनीकरण और अन्य आवश्यक रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से कीटाणुओं को नष्ट किया जाता है ताकि पानी पूरी तरह पीने योग्य बन सके. नागरिकों ने प्रयोगशालाओं में होने वाली नियमित जांच और गुणवत्ता नियंत्रण की प्रक्रिया को भी नजदीक से देखा.

निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने इस दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर निगम की प्राथमिकता नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि जल वितरण व्यवस्था पूरी तरह से तय मानकों और नियमों के अनुसार संचालित की जाती है और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाती है. उनका कहना था कि नागरिकों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ही यह पहल की गई है ताकि जनता स्वयं देख सके कि नगर निगम किस तरह जिम्मेदारी के साथ काम कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि जब प्रशासन और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता मजबूत होता है, तभी किसी भी अफवाह या भ्रम का सही तरीके से समाधान संभव होता है.

भ्रमण में शामिल नागरिकों ने नगर निगम की इस पहल की सराहना की. कई नागरिकों ने कहा कि वे पहले जल आपूर्ति को लेकर आशंकित थे, लेकिन प्लांट का निरीक्षण करने के बाद उन्हें यह भरोसा हुआ कि शहर को मिलने वाला पानी स्वच्छ और पीने योग्य है. नागरिकों का कहना था कि इस तरह की पहल नियमित रूप से होनी चाहिए ताकि प्रशासन और आमजन के बीच संवाद बना रहे. इस अवसर पर जल प्रभारी दामोदर सोनी, पार्षद अनुराग दहिया सहित जल विभाग के तकनीकी अधिकारी कमलेश श्रीवास्तव, राजेश खंपरिया, अंकुर नाग, मंसूरी खान, शमीम खान और अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे.

इसी दिन नगर निगम आयुक्त ने कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद सुबह-सुबह शहर के विभिन्न वार्डों का औचक निरीक्षण भी किया. भीषण ठंड में भी आयुक्त का सड़कों पर उतरना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि नगर निगम प्रशासन जनसमस्याओं को लेकर गंभीर है. निरीक्षण के दौरान उन्होंने पेयजल आपूर्ति और सीवर लाइन से जुड़ी शिकायतों का मौके पर जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से सीधे सवाल-जवाब किए.

निगमायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पेयजल और सीवर से संबंधित जितनी भी शिकायतें लंबित हैं, उनका शत-प्रतिशत निराकरण सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यदि कहीं भी कोताही पाई गई तो संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे. निरीक्षण के दौरान उन्होंने जमीनी हकीकत को समझते हुए कई स्थानों पर तत्काल सुधार के निर्देश भी दिए.

सीएम हेल्पलाइन से जुड़े मामलों पर भी निगमायुक्त ने सख्त रुख अपनाया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का समाधान केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिकों की संतुष्टि के साथ किया जाए. उन्होंने कहा कि ‘संतुष्टि’ ही किसी भी समाधान की असली कसौटी है और इसमें किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी.

नगर निगम आयुक्त ने सभी विभागीय प्रमुखों और संभागीय अधिकारियों को अनिवार्य रूप से फील्ड में उतरने के निर्देश भी दिए हैं. उनका कहना था कि कार्यालयों में बैठकर समस्याओं का समाधान संभव नहीं है, इसके लिए जरूरी है कि अधिकारी नियमित रूप से वार्डों का दौरा करें, जनता से सीधा संवाद करें और मौके पर ही समस्याओं को समझकर उनका निराकरण कराएं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की सक्रियता तभी दिखाई देती है जब अधिकारी जनता के बीच मौजूद रहते हैं.

नर्मदा जल प्रदूषण को लेकर चल रही राजनीति के बीच नगर निगम की यह पहल प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की मिसाल के रूप में देखी जा रही है. जहां एक ओर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम द्वारा उठाए गए कदम यह संदेश दे रहे हैं कि तथ्यों और प्रक्रियाओं के आधार पर ही किसी भी सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए. जल शोधन संयंत्रों का खुला निरीक्षण और कड़ाके की ठंड में भी वार्डों का दौरा इस बात का संकेत है कि नगर निगम प्रशासन नागरिकों के विश्वास को बनाए रखने और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सक्रिय है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-